हरियाणा / ऑनलाइन फ्रॉड का केंद्र मेवात: ओएलएक्स जैसी साइट्स पर फौजी बन दिखाते हैं वाहन, बुलाकर अरावली पर लूट लेते हैं

यह फोटो तब की है जब हमने (ठग गिरोह के साथ रिपोर्टर) गैंग में शामिल हो खेल को समझा। कैसे वो ठगी करते हैं। खेत में बैठे ये सभी युवा फोन और लैपटॉप से यही काम कर रहे हैं। यह फोटो तब की है जब हमने (ठग गिरोह के साथ रिपोर्टर) गैंग में शामिल हो खेल को समझा। कैसे वो ठगी करते हैं। खेत में बैठे ये सभी युवा फोन और लैपटॉप से यही काम कर रहे हैं।
नूंह पुलिस ने लोगों को लूट से बचाने के लिए बोर्ड लगाया है। नूंह पुलिस ने लोगों को लूट से बचाने के लिए बोर्ड लगाया है।
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यह फोटो तब की है जब हमने (ठग गिरोह के साथ रिपोर्टर) गैंग में शामिल हो खेल को समझा। कैसे वो ठगी करते हैं। खेत में बैठे ये सभी युवा फोन और लैपटॉप से यही काम कर रहे हैं।यह फोटो तब की है जब हमने (ठग गिरोह के साथ रिपोर्टर) गैंग में शामिल हो खेल को समझा। कैसे वो ठगी करते हैं। खेत में बैठे ये सभी युवा फोन और लैपटॉप से यही काम कर रहे हैं।
नूंह पुलिस ने लोगों को लूट से बचाने के लिए बोर्ड लगाया है।नूंह पुलिस ने लोगों को लूट से बचाने के लिए बोर्ड लगाया है।

  • 30 दिन में 8 प्रयासों से गिरोह में मिली एंट्री, खेतों में देखे फ्रॉड के नए-नए तरीके
  • यहां पुलिस भी बिना तैयारी नहीं जाती, 3 दिन रुककर भास्कर ने की इन्वेस्टिगेशन

दैनिक भास्कर

Jan 22, 2020, 06:21 AM IST

पानीपत. दिन पर दिन ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाएं बढ़ रही हैं। हर राेज अलग-अलग तरीके से लोग ठगे जा रहे हैं। इस अपराध की जड़ तलाशते हुए हम पहुंचे गुड़गांव के साइबर थाने। यहां सालभर में दर्ज 8700 मामलों ने चौंका दिया। पता चला कि इन दिनों ठगों ने ओएलएक्स जैसी साइट्स को जरिया बना रखा है। 60 % केस की जांच हरियाणा व राजस्थान के मेवात में घूम रही थी तो हमने भी उसी ओर रुख किया। यहां फिशिंग आम है।

एक मछली पालन और दूसरी ऑनलाइन धोखाधड़ी (phishing)। ठगों के गांव तो पहचान में आ गए, पर इन तक पहुंचना मुश्किल था। पुलिस भी बिना फूलप्रूफ प्लान इन पर हाथ नहीं डालती। ये पुलिसवालों पर हमला कर देते हैं। कई बार हमें भी लौटना पड़ा। एक माह में आठ प्रयास के बाद हम इस तरह की गैंग तक पहुंच पाए। तीन दिन उनके साथ रहकर जाना कि कैसे आपके हर ट्रांजेक्शन पर उनकी नजर है।

कैसे ये आपके दिमाग से खेलते हैं और आजकल कैसे फौजी बनकर आपको लूट रहे हैं। नूंह जैसे क्षेत्र में बैठे ये ठग इतने शातिर हैं कि फोन पर ओटीपी लेकर ठगी करना तो इनका मिनटों का काम है। ये इससे कहीं आगे बढ़े हुए हैं। बैंक के पूरे सिस्टम को हैक कर लेते हैं। आइए जानते हैं इनके मायाजाल के बारे में...

ठगी के तरीके जो दो दर्जन से अधिक मामलों के मास्टरमाइंड ने बताए

रिपोर्टर: ओएलएक्स पर कांड कैसे करो सो?
मास्टरमाइंड: जनाब..ओएलएक्स ही थोड़े है! ऐसी जितनी साइटें हैं सब पर गाड़ी का फोटो डालें हैं। रेट मार्केट से कम रखें, जो फोन आवें हैं उनमें से हम देखे हैं किसका शिकार करें। देखे हैं के आदमी बोले कैसे है। कुछ से खाते में पैसे डलवा लेवे हैं और बाकि को पास की लोकेशन पर बुलावे हैं। वहीं से हमारा बंदा उसे लेके आवे है। आगे दो-तीन आदमी और साथ हो चले हैं। अरावली जैसी सुनसान जगह ले जाकर कट्‌टा दिखाया, दो-चार जड़े नहीं के एटीएम ही थमा देवे है। सारे पैसे निकाल ले हैं। पीटते हैं और करके फोटो खींच लेवें और भगा देते हैं। इतने पैसे देवे हैं के लौट सके। तू रुक जरा तुझसे भी जल्द करवाते हैं कांड।


रिपोर्टर: यो फोटो किसकी गाड़ी की डालो हो?
मास्टरमाइंड: शहर की सारी गाडी अपनी हैं। किसी की भी मिल जावे उसका फोटो लिया, नंबर प्लेट या तो दिखावें नहीं या बदल देवें हैं। पता भी नहीं चले के उसकी गाड़ी का फोटो कब लिया। जिस फोन से बात करें हैं वो और सिम दोनों ही फर्जी होवें हैं। यहां तो सब कुछ फर्जी मिल जावे है। आदमी भी क्राइम के लिए किराए पर मिल जाए हैं,जैसे तू मिल गया।


रिपोर्टर: भाई फौजी के फोटो का प्रयोग क्यों करें हैं।
मास्टरमाइंड: फौजी को ठगना और उसके नाम पर ठगना दोनों ही आसान होवे है। आम आदमी के झांसे में लोग इतने जल्दी नहीं आवें। फोटो फेसबुक से उठा लेवें और अपने पास आर्मी - पुलिस वालों के नकली कागज तैयार होवें हैं। तू भी सीख जावेगा।

रिपोर्टर: अपना एरिया बदनाम है फिर भी लोग कैसे जाल में फंस जावें हैं?
मास्टरमाइंड: जो लोकेशन देवें वो सोहना, फरीदाबाद, गुड़गांव की होवे है। किसी को शक ना होवे है। 


रिपोर्टर: दो से 10 रुपए ही क्यों जब खाते से ज्यादा निकाल सके हो?
मास्टरमाइंड: सारे आज ही जान लेवेगा के। बैंक में हजारों खाते होवे हैं। ये दो-दो रुपए ही लाखों हो जावे हैं। आम आदमी रोज-राेज खाते नहीं जांचता। साल छह महीने में एक बार ही देखे है। आदमी सालभर में इतनी ट्रांजेक्शन करे है के उसे खुद भी याद नहीं रहता। 


रिपोर्टर: बैंक भी हैक? इसमें फंसे नहीं हो के?
मास्टरमाइंड: अपना सब सिस्टम है। पैसे को पहले नेपाल में भेजे हैं और फिर वहां से दोबारा अपने खतों में लावे हैं। मजदूरों के नाम पर खाते खुलवाते हैं और उन्हीं में पैसे रखें हैं। इनकी चेकबुक और एटीएम हमारे पास होवे है।

रिपोर्टर: झारखंड के जामताड़ा की तरह एटीएम से भी ठगी करो हो के?
मास्टरमाइंड: यो जामताड़ा के है म्हारे आगे। एटीएम से तो हम ठगी के रोज नए तरीके निकाल लेवे हैं। अपना असूल पैसे पर नहीं, दिमाग पर वार करना होवे है। जो जिस तरह का आदमी हो उससे उसी तरह से बात करे हैं और उसी की भाषा में। एटीएम के ओके बटन में एल्फी डालकर, एटीएम में खड़े रहकर दूसरों की जानकारी देखना, एटीएम काट लाने के तो हम माहिर हैं। 

अपील से समझिए किस पैमाने पर हो रही है ठगी

नूंह पुलिस ने लोगों को लूट से बचाने के लिए बोर्ड लगाया तो ग्रामीणों ने इसे अपमान बताकर  गिरा दिया। अब यह बोर्ड थाने में दीवार के पास रख दिया है। यह ठगों की धमक बताने के लिए काफी है।

वक्त के साथ बदल देते हैं तरीके

  • शुरुआत: जामताड़ा की तरह फर्जी ओटीपी से
  • फिलहाल: ओएलएक्स पर फौजी बन कर 
  • ऐसा भी.. रुकी इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर 
  • बैंकों के रुके हुए लोन के नाम पर 
  • जस्ट डायल से नंबर लेकर 
  • हैक कर खातों से एक साथ रकम निकाल कर 
  • आधार लिंक व पेटीएम केवाईसी के नाम पर 

देशभर को ठग रहे

नूंह, हथीन और राजस्थान के सीमाई क्षेत्र के थानों में दर्ज 206 शिकायतों में हरियाणा से 45, राजस्थान से 32, बेंगलुरु से 12, तमिलनाडु से 14, केरल से 8, पश्चिम बंगाल से 11, एमपी से 7, यूपी से 15, पंजाब से 18, दिल्ली से 6, झारखंड से 15 और बिहार से 23 पीड़ित हैं। शिकायतें बेहद कम दर्ज होती हैं, वारदात कई गुना ज्यादा होती हैं। नूंह के पुन्हाना के 10 गांव इसका केंद्र हैं जिनमें इंदाना, नई, बिछोर, तिरवाडा और बासेडा प्रमुख हैं। हथीन के नूंह से सटे हुए 4 गांव, इसी से सटे राजस्थान के भरतपुर के जुरहरा थाने के गांव, राजस्थान के अलवर का मेवात क्षेत्र शामिल है।

प्रदेश में सालाना 150 करोड़ से अधिक की ऑनलाइन ठगी; हर दूसरा केस अरावली शृंखला से सटे इसी इलाके से जुड़ा

गुरुग्राम वाले एक एरिया में ही 2019 में 8700 शिकायतें ऑनलाइन ठगी की आईंं। इनमें करीब 40 करोड़ की ठगी हुई। पूरे प्रदेश में 150 करोड़ से अधिक की। इनमें से करीब 5 हजार केसों में का लिंक इसी मेवात क्षेत्र से है। 


केएमपी से सोहना-नूंह कट पर उतरते ही सड़क टी पॉइंट बनाती है। एक तरफ गुड़गांव से लगता साेहना है, जहां इमारतें विकास की नई ऊंचाई छू रही हैं। दूसरी तरफ है मेवात (नूंह) का इलाका जो लंबे समय से सोने की नकली ईंट के नाम पर ठगी के लिए बदनाम रहा है। अरावली पर्वत शृंखला से लगता यह इलाका पर्यटन नहीं ठगों के लिए मुफीद शेल्टर बन गया है। जैसे-जैसे गाड़ी नूंह की ओर बढ़ती है, नए निर्माण दिखाई देते हैं, उनमें से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे भी एक है।

इसके बन जाने पर सहूलियतों से ज्यादा चर्चा लूट और धोखाधड़ी के बढ़ जाने की है। लोग कहते हैं कि मुंबई और गुजरात तक ठगी का एक्सप्रेस-वे खुल जाएगा। फिलहाल सोने की ईंट के नाम पर बदनामी के बाद धंधे में आई मंदी ने यहां ऑनलाइन ठगी का नया रास्ता खोल दिया है। पुराने ठग नई ठगी में शिफ्ट हुए तो नए लड़कों लाइन लग गई। तावड़ू घाटी से लेकर, खेत, मैदान और अरावली की पहाड़ियों तक भी नई उम्र के युवक बैठकर फोन पर लगे दिख जाएंगे। इनमें से अधिकतर फ्रॉड की कोशिश में लगे होते हैं। यहीं से न केवल हरियाणा बल्कि देशभर के लोगों से ठगी हो रही है। 


अब ओएलएक्स, शॉपिंग साइट्स और एटीएम कार्ड की डिटेल लेकर पैसे ट्रांसफर करने जैसी ठगी आम है। इतना ही नहीं फोटोग्राफर, नक्शा बनवाने और सीसीटीवी कैमरे लगवाने के बहाने ऑनलाइन बुलाकर भी लूट लेते हैं। बिना नंबर या टूटी फूटी नंबर प्लेट वाली बाइकों पर अधिकतर अंडर एज युवा फर्राटे भरते दिखते हैं। इन्हें कोई टाेकने वाला नहीं है। जैसे ट्रैफिक रूल्स यहां के लिए बने ही नहीं हैं।

खैर यहां से पुन्हाना के लिए आगे बढ़ते हैं तो धीरे-धीरे सड़क संकरी होती जाती है, जिस पर आम वाहन कम और माइनिंग वाले बड़े ट्रॉले अधिक दिखते हैं। खुले मैदानों में बड़ी-बड़ी बाइकें किनारे खड़ी कर झुंड में बैठकर लड़के कुछ अलग ही कर रहे होते हैं। करीब जाने पर एक-एक कर यहां से वे निकलने लगते हैं। पुन्हाना से बिछौर की ओर बढ़ते हैं तो गांवों के किनारे साइन बोर्ड पर कालिख के निशान दिखते हैं।

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