हरियाणा / 3 पर्वतारोहियों पर माउंट एवरेस्ट के शिखर पर चढ़ने का झूठा दावा करने का आरोप



ये हैं वे तीनों पर्वतारोही, जिनके दावे पर सवाल उठ रहे हैं। (बाएं से) ये हैं वे तीनों पर्वतारोही, जिनके दावे पर सवाल उठ रहे हैं। (बाएं से)
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ये हैं वे तीनों पर्वतारोही, जिनके दावे पर सवाल उठ रहे हैं। (बाएं से)ये हैं वे तीनों पर्वतारोही, जिनके दावे पर सवाल उठ रहे हैं। (बाएं से)

  • नेपाली अखबार का दावा- जिस वक्त एवरेस्ट के शिखर पर होने की बात कही गई, उस समय वे जमीन पर थे
  • जींद की विकास राणा, कैथल की शोभा और हिसार की अंकुश कसाना पर आरोप

Jun 11, 2019, 10:37 AM IST

पानीपत. हाल ही में प्रदेश की तीन पर्वतारोहियों ने माउंट एवरेस्ट फतह करने का दावा किया था। ये दावा सवालों में घिर गया। इसको लेकर नेपाल के अखबार 'द हिमालयन टाइम्स' ने खबर प्रकाशित की। इसमें लिखा कि जींद के गांव सुदकैन खुर्द की निवासी विकास राणा, कैथल के करोरा निवासी शोभा बनवाला और हिसार के लालपुरा निवासी अंकुश कसाना ने एवरेस्ट के शिखर पर चढ़ने का झूठा दावा किया है।

 

अखबार ने इसको लेकर उसी दौरान एवरेस्ट पर चढ़ने गए अन्य पर्वतारोहियों, साथ ऊपर जाने वाले शेरपा और संबंधित विभाग के अधिकारियों से बात की। इन सभी ने उनके शिखर तक जाने की बात को नकारा। ऐसे में तीनों पर्वतारोहियों के खिलाफ नेपाल के पर्यटन विभाग ने जांच भी शुरू कर दी। अगर तीनों को दोषी पाया गया तो इन पर नेपाल का पर्यटन विभाग माउंट एवरेस्ट पर जाने का बैन भी लगा सकता है। हालांकि पर्वतारोहियों ने कहा कि आरोप निराधार हैं।

 

इन वजहों से दावों को बताया जा रहा झूठा : द हिमालयन टाइम्स ने लिखा है कि क्योंकि वे इस गर्मी के मौसम में दक्षिण क्षेत्र में नहीं आए थे, जो मार्च से मई तक चलता था। प्रेस्टीज एडवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, डंबर पराजुली ने बताया कि ये तीनों पर्वतारोही प्रेस्टीज एडवेंचर्स द्वारा संचालित आठ सदस्यीय अभियान का हिस्सा थे। 26 मई को दोपहर 12:30 बजे के करीब बेस कैंप में हम उनसे मिले, जिस दिन हरियाणा के पर्वतारोहियों ने माउंट एवरेस्ट को फतह करने का दावा किया था।

 

शेरपा ने बताया: अखबार से बातचीत में एक उच्च ऊंचाई वाले पर्वतारोही शेरपा ने कहा कि इतने कम समय में संभव ही नहीं है कि शिखर पॉइंट से बेस कैंप तक एक-दो घंटे में ही उतरा जा सके। विकास राणा को कैंप-III में मार्गदर्शन करने वाले नगीमा नोरबू शेरपा ने कहा कि हमें उनके शिखर पर जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

 

खुद का दावा: पर्वतारोहियों की तिकड़ी ने दावा किया था कि वे लगभग 10:30 बजे शिखर बिंदु पर पहुंच गए थे। 26 मई को एक उचित मौसम खोजने के बाद माउंट एवरेस्ट के शिखर तक चढ़ाई की। 29 वर्षीय अंकुश कसाना का कहना था कि पर्यटन विभाग अगले दो हफ्तों में हमारे समिट सर्टिफिकेट जारी कर देगा।

 

21 साल के बनवाला ने कहा था कि चार शेरपा गाइड के साथ वे एकमात्र पर्वतारोही थे। शेरपा के नाम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने नाम बताने से इनकार कर दिया। बनवाला ने कहा कि हम उनका नाम नहीं जानते हैं। उन्होंने अपनी शिखर तस्वीरें साझा करने से भी इनकार कर दिया था।

 

अधिकारियों की पुष्टि :

अखबार के अनुसार बेस कैंप के अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि 26 मई को कोई शिखर सम्मेलन नहीं किया गया था।

 

अगर आरोप सही हैं तो यह काफी शर्मनाक: हरियाणा की प्रसिद्ध पर्वतारोही अनीता कुंडू ने कहा कि इस बारे में उन्होंने भी नेपाल के पेपर में पढ़ा। जांच में अगर आरोप सही मिलते हैं तो यह हमारे लिए काफी शर्मनाक घटना होगी। हम पर्वतारोहण को सही मुकाम दिलाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, ऐसे में झूठे दावे करने वालों के कारण हमारे अभियान को बड़ा झटका लगेगा।

 

अनीता ने बताया कि इससे पहले भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस में कांस्टेबल दिनेश राठौड़ और उनकी पत्नी, तारकेश्वरी को 2017 में माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के गलत दावे करने पर फोर्स से बर्खास्त कर दिया गया था। दंपती पर 10 साल के लिए नेपाल में चढ़ाई करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था।

 

आरोप निराधार  :

  • जींद के विकास राणा का कहना है कि हमें शिखर तक चढ़ाई की थी। अब जो आरोप लगाए गए हैं, वे सभी निराधार हैं और इनसे हमारी छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।
  • हिसार की अंकुश कसाना ने भी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि आरोप निराधार हैं। हमारे खिलाफ साजिश है। कैथल की शोभा बनवाला का कहना है कि आरोप गलत है। सर्टिफिकेट आने के बाद सब साफ हो जाएगा।
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