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हरियाणा / प्रदूषण के कारणों पर सटीक स्टडी नहीं, पराली प्रबंधन कागज में, रोकथाम बैठकों तक सीमित



प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • हवा खराब क्यों? जिस पराली पर हल्ला वह सिर्फ 25 दिन, बाकी साल भर वाहन, इंडस्ट्री और डस्ट अधिक जिम्मेदार
  • ईपीसीए व सीपीसीबी के आदेश सही से नहीं हुए लागू, सीएम के पास विभाग आने से जगी उम्मीद
  • प्रदूषण का असल कारण क्या है व हमारी जिंदगी के सबसे बड़े मुद्दे यानी पर्यावरण पर सरकारें कितनी सतर्क हैं, आइए जानते हैं
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Dainik Bhaskar

Nov 20, 2019, 05:47 AM IST

हरियाणा. हरियाणा समेत एनसीआर में प्रदूषण से गंभीर हालात बन गए हैं। कुछ दिन छोड़ दें तो एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) एक माह से सीवियर कैटेगिरी में बना हुआ है। संसद तक इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है, लेकिन सरकारों के पास मजबूत एक्शन प्लान नहीं है। राज्य पॉल्यूशन डिपार्टमेंट की बात करें तो इस मुद्दे पर साल में बैठकें तो बहुत हुईं लेकिन, कार्रवाई तब शुरू हुई जब दिवाली के दौरान स्थिति खराब होने लगी।

 

पॉल्यूशन पर नियामक बॉडी ईपीसीए के निर्देशों के बाद आनन-फानन में उद्योग बंद कराए गए। पराली जलाने पर भी कुछ सख्ती दिखी। जबकि सालभर प्रदूषण के कारणों पर विशेष काम नहीं हुआ। प्रदेश में इसके असल कारण क्या हैं, इसे कैसे रोका जाए, इस पर कोई रणनीति-कोई गहन अध्ययन नहीं है। नई सरकार में सीएम के पास यह विभाग आने से निकट भविष्य में बेहतर काम की उम्मीद जगी है।

 

ये सच कड़े उपायों के लिए मजबूर करेगा

 

  • सांस लेने में तकलीफ, गले में खराश व आंखों में जलन आम है। दिल्ली में ऑक्सीजन बार खुला है। 299 रु. में 15 मिनट ऑक्सीजन मिल रही है।
  • इस सीजन में सिर्फ हरियाणा में करीब 20 हजार एयर प्यूरीफायर बिक चुके हैंं। जाे पिछले साल की तुलना में 18% अधिक है।
  • प्रदूषण का शिकार होने पर ओपीडी में इलाज को भी बीमा कंपनियां कवर करने लगी हैं। पहले भर्ती होने पर ही लाभ मिलता था।

पॉल्यूशन दिल्ली, एनसीआर, हरियाणा में ही पीक पर क्यों

मौसम: सर्द हवा में नमी होती है। जहरीले कण नमी पाकर धुएं-कोहरे से चिपककर स्मॉग बनाते हंै। हवा धीमी होने पर ये ऊपरी वातावरण में निकल नहीं पाते। सीमित इलाके में ही रह जाते हैं। 

भौगोलिक स्थिति: उत्तरी मैदानी इलाका हिमालय व पर्वतीय शृंखलाओं से घिरा है। कम गति की हवा उन्हें पार नहीं कर पाती। जहरीले कण बाहर नहीं निकल पाते।

 

पंजाब में अधिक जली पराली, हरसेक ने साइट से रिपोर्ट हटाई

हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (हरसेक) की साइट पर पराली जलने की रिपोर्ट जारी होनी बंद है। पता नहीं चल पा रहा है कि कितनी जगह पराली जली है। हालांकि, नासा के अनुसार पंजाब में 38 हजार तो हरियाणा में 6 हजार लोकेशन पर पराली जलाई गई है। 

 

पराली प्रबंधन: पानीपत एथनाॅल प्लांट अभी कागजों तक ही

पानीपत में एथनॉल का सबसे बड़ा प्लांट लगना है, जो 2 लाख क्विंटल पराली फ्यूल में कन्वर्ट करेगा। शिलान्यास 2017 में हुआ था पर काम अब तक शुरू नहीं हो पाया।

 

वाहन-इंडस्ट्री पर सही काम नहीं 

इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन पर कंट्रोल नहीं है, डस्ट रोकने को पानी का छिड़काव नहीं हो रहा, मियाद पूरी कर चुके डीजल-पेट्रोल वाहनों पर रोक नहीं दिखती। कंडम वाहन भी दौड़ रहे हैं।

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