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यहां 23 साल से नहीं गली राजनीतिक दलों की दाल, हमेशा निर्दलीय ही मारते रहे बाजी

10 महीने पहले
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पूंडरी की रोड़ बाहुल्य सीट पर जाट, राजपूत व ब्राह्मणों के भी कई बड़े गांव हैं।
  • चर्चा में सीट क्योंकि कई पूर्व विधायक निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में

प्रदेश के 90 विधानसभा हलकों में पूंडरी का सियासी मिजाज सबसे हटकर है। दरअसल, यहां पिछले 23 साल में जितने भी विधानसभा चुनाव हुए, किसी भी दल की दाल नहीं गली। यहां राजनीतिक दलों के गुणा-भाग फेल हैं। पूंडरी सीट जहां 1991 के बाद कोई भी राजनीतिक दल नहीं जीता, यहां वोटर खुलेआम बोलते हैं, साहब मेरिट छोड़िए पास मार्क्स मिल जाएं तो आपका नसीब है, सबको आदर देते हैं वोटर, करते हैं अपने मन की...पढ़िए सुशील भार्गव की रिपोर्ट।   वर्ष 1996 से लेकर 2014 के चुनावांे में पांच बार यहां से निर्दलीय प्रत्याशी ही जीत दर्ज करते रहे हैं। अबकी बार भी सियासी गेम कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है। भाजपा-कांग्रेस जीतोड़ प्रयास में जुटी हैं कि किसी तरह वोटर्स का निर्दलीय को जिताने का स्वभाव बदल जाए पर वोटरों का मूड कोई पढ़ नहीं पा रहा। राष्ट्रवाद और विकास के दम पर वोट मांगे जा रहे हैं, जबकि क्षेत्रवाद भी मुद्दा है। कहते हैं यहां का वोटर सबको तवज्जो देता है, लेकिन हमेशा अपने मन की ही करता है। रोड़ बाहुल्य सीट पर जाट, राजपूत व ब्राह्मणों के भी बड़े गांव हैं। पाई, ढांड, फरल, फतेहपुर के अलावा कई बड़े गांव तय करते हैं कि ताज किसके सर सजे।

यूं बदले अबकी बार राजनीतिक घटनाक्रम : पूंडरी में दिनेश कौशिक वर्तमान विधायक हैं। जनसभाओं मंे दावे हो रहे हैं कि पांच साल में 500 करोड़ रुपए विकास कार्यों पर लगे हैं। पूंडरी-फतेहपुर दो कस्बे एक साथ जुड़े हुए हैं, दोनों की मुख्य सड़क फोर लेन बन चुकी है। भाजपा ने प्रदेश महामंत्री एडवोकेट वेदपाल को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा। तुरंत बाद दिनेश कौशिक भी चुनावी दंगल में आजाद प्रत्याशी के रुप में उतर आए हैं। दंगल में रोमांच और बढ़ गया, जब वर्ष 2000, 2005, 2014 से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ चुके रणधीर सिंह गोलन भी चुनावी मैदान में आजाद प्रत्याशी के रूप में पहुंच गए।
 
हां, भाजपा ने यहां से चार बार विधायक रहे चौ. ईश्वर सिंह के बेटे तेजवीर सिंह को अपनी पार्टी में मिला लिया, क्योंकि कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया। पूर्व विधायक नरेंद्र शर्मा भी फिर से आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में हैं। कांग्रेस से सतबीर भाणा चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि सबसे बड़े गांव पाई से राजू ढुल जेजेपी से और यहीं से सुनीता ढुल बसपा की टिकट पर चुनाव लड़ रही हंै। बहरहाल सियासी जंग तेज हो गई है। सभी अपने-अपने स्तर पर अपनी जड़ों को मजबूती से गहराई में उतराने में लग गए हैंं।

ये बोले वोटर- जनता बेहाल, कोई नहीं सुनता : पूंडरी तीर्थ के पास अखबार पढ़ रहे 72 साल के सुभाष बताते हैं, पूंडरी में लोकल मुद्दे हैं, लोगों के काम समय पर नहीं होते। ऑफिसों में कोई नहीं सुनता। वे कहते हैं यहां तो आजाद जीतते हैं, पार्टी वाले मेरिट तो छोड़िए, पास होने वाले अंक ले लें तो भी उनका नसीब है।
 

आज तक रेल नहीं दिखी: फतेहपुर निवासी संजय बताते हैं, हर बार लोकसभा चुनावों मंे कैथल से करनाल रेलवे लाइन की बात होती है, यह लाइन पूंडरी से गुजरनी है, पता नहीं यह लाइन कब बनेगी और कब रेल की सीटी यहां सुनाई देगी।

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