ग्राउंड रिपोर्ट टोहाना / संगीत रामायण लिखने वाले टोहानवी के शहर में सजा सियासी महाभारत का मंच



जहां विकास कार्य न होने की शिकायत है, वहीं ग्रुप डी में लगने के चर्चे भी हैं। जहां विकास कार्य न होने की शिकायत है, वहीं ग्रुप डी में लगने के चर्चे भी हैं।
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जहां विकास कार्य न होने की शिकायत है, वहीं ग्रुप डी में लगने के चर्चे भी हैं।जहां विकास कार्य न होने की शिकायत है, वहीं ग्रुप डी में लगने के चर्चे भी हैं।

  • चर्चा में सीट क्योंकि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बराला तिकाेने मुकाबले में फंसे

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2019, 05:42 AM IST

उत्तर भारत में रामलीला का मंचन इसी नहरों की नगरी के यशवंत सिंह टोहानवी द्वारा लिखित संगीत रामायण से होता है। इसी तरह टोहाना में सियासी महाभारत का मंचन यहां के दो पृूर्व प्रदेशाध्यक्ष और एक वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष के परिवार पर निर्भर है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला मैदान में हैं। देवेंद्र बबली व निशान सिंह का भी यहां होल्ड है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष हरपाल सिंह के बेटे परमवीर सिंह भी मैदान में हैं... पढ़िए मनोज कुमार की रिपोर्ट।

 

टोहाना विधानसभा क्षेत्र का सबसे बड़ा गांव समैण। यहां बस स्टैंड पर चाय की दुकान पर चुनावी चर्चा छेड़ी तो यहां बैठे सभी लाेग शामिल हो गए। रूपाराम ने कहा, गांव में कोई काम नहीं हुआ। नौकरी नहीं मिली, पीले कार्ड नहीं बने। बात बीच में काटते हुए रामदिया बंसल ने कहा-छोटे-मोटे दुकानदार हैं, लेकिन सियासत खूब समझते हैं। लड़के ने ग्रुप-डी का पूरा पेपर पाट दिया था, फिर भी नौकरी नहीं मिली। बबली ने सामाजिक काम खूब कराए हैं।

 

टोहाना के वाल्मीकि चौक पर पहुंच दुकानदार रामनिवास से पूछा तो तपाक से बोले -यहां टक्कर बराला और बबली में है, लेकिन एक बात कह दूं, शहर में विकास नहीं हुए। कुछ यही शब्द दूसरे दुकानदार पवन, मनोज व मनीष के भी थे। दुकानदार विष्णु ने कहा, ऐसा नहीं है कि बराला ने काम नहीं कराए। बिना सिफारिश के नौकरी दी गई। यहां से हम गांव लहरिया पहुंचे तो ग्रामीणों में एक ही चर्चा थी कि बबली किस गांव में कमजोर है और किस में बराला व परमवीर। कुछ समय बाद बबली और निशान सिंह वहां पहुंचे। करीब 35 मिनट रुकने के बाद बबली का काफिला दूसरे गांव की ओर बढ़ गया और हमने रुख गांव ढाणी सांचला की ओर किया, जहां बराला का कार्यक्रम था।

 

बराला के पहुंचने से पहले यहां हाथ में माला लिए खड़े कृष्ण ने कहा-भाई मैं पहले कांग्रेस में था, बाद में मोदी को वोट दिया। अब किसे देंगे, पूछने पर बोला-अभी तो सोचूंगा। माला तो इसलिए लाया हूं कि बराला प्रदेशाध्यक्ष हैं। देर शाम बराला और बबली के गांव बढ़ई खेड़ा की ओर रुख किया। टूट-फूटी सड़क से होकर गांव पहुंचे तो हुक्के के साथ कुर्सी पर बैठे कुछ लोग चर्चा करते हुए मिल गए। वहां जब दोनों के बारे में बातचीत शुरू की तो ग्रामीण एक साथ बोले-यहां क्या हुआ, वह तो रास्ते में ही पता लग गया होगा। ग्रामीण कुलदीप सिंह, बिंदा व धर्मपाल ने कहा, यहां दो काम महत्वपूर्ण थे जिनमें एक लिंक रोड की मरम्मत और दूसरा गांवों की ढाणियों तक रास्ता, लेकिन एक भी काम नहीं हुआ।


यह भी जानें : 12 चुनाव में कांग्रेस के 7 बार विधायक बने। दो बार कांग्रेस के वर्तमान प्रत्याशी परमवीर सिंह और पांच बार उनके पिता हरपाल सिंह। हरपाल सिंह एक बार विशाल हरियाणा पार्टी से भी जीते थे। जबकि जनता पार्टी, माकपा, इनेलो और भाजपा से एक-एक बार विधायक बने हैं।

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