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मंडे पॉजिटिव / हरियाणा के दो जैवलिन थ्रोअर ने पैरालिंपिक के लिए कोटा दिलाए; एक ने हादसे में पैर गंवाए तो दूसरा कुश्ती छोड़कर पैरा एथलीट बना



पैरा-एथलीट संदीप चौधरी और सुमित आंतिल। पैरा-एथलीट संदीप चौधरी और सुमित आंतिल।
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पैरा-एथलीट संदीप चौधरी और सुमित आंतिल।पैरा-एथलीट संदीप चौधरी और सुमित आंतिल।

  • संदीप ने 66.18 मी. थ्रोे कर और सुमित ने 62.88 मी. थ्रो कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बेहतर किया
  • गुड़गांव के संदीप और सोनीपत के सुमित ने वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स में वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ गोल्ड और सिल्वर जीते हैं
     

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2019, 05:29 AM IST

सोनीपत (अनिल बंसल). हरियाणा के पैरा-एथलीट संदीप चौधरी और सुमित आंतिल ने देश को जैवलिन थ्रो में भारत को दो पैरालिंपिक कोटा दिलाए थे। जैवलिन थ्रो एफ64 कैटेगरी में संदीप ने गोल्ड और सुमित ने सिल्वर मेडल जीते। दोनों ने अपने-अपने वर्ल्ड रिकॉर्ड भी सुधारे। हालांकि, संदीप और सुमित दोनों हादसे के कारण दिव्यांग हुए थे। संदीप फौजी पिता की सीख के कारण खेल से जुड़े थे जबकि सुमित कुश्ती के चैंपियन बनना चाहते थे, लेकिन हादसे के बाद पैर गंवाने पड़े। इसलिए पैरा-एथलीट बने। दुबई में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में संदीप ने 66.18 मीटर जैवलिन थ्रो किया और अपना एफ44 कैटेगरी का 65.80 मी का रिकॉर्ड सुधारा। वहीं, सुमित ने 62.88 मीटर की थ्रो के साथ अपना एफ64 का 60.45 मी का रिकॉर्ड बेहतर किया। दोनों ने अगले साल टोक्यो में हाेने वाले पैरालिंपिक के लिए क्वालिफाई किया।

हमारे दोनों खिलाड़ियों के नाम जैवलिन के वर्ल्ड रिकॉर्ड, क्योंकि...
इंटरनेशनल कमेटी के अनुसार, वर्ल्ड चैंपियनशिप में एफ44 और एफ64 कैटेगरी क्लब कर दी जाती है और सिर्फ एक कैटेगरी एफ64 होती है। दोनों के वर्ल्ड रिकाॅर्ड खिलाड़ी के फाइनल में क्वालिफाई करने के आधार पर दिए जाते हैं। जैसे- अगर कोई खिलाड़ी एफ44 में खेलता है, लेकिन वर्ल्ड चैंपियनशिप में एफ64 में उतरा और वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया तो उसका रिकॉर्ड एफ44 में ही गिना जाएगा।

 

संदीप ने रियो पैरालिंपिक की हार को मोटिवेशन के रूप में लिया और गोल्ड जीता
गुड़गांव के संदीप जब 12 साल के थे, तब उन्होंने हादसे में पैर गंवा दिए थे। एक बार तो यूं लगा था, मानो जिंदगी खत्म ही हो गई है। लेकिन फौजी पिता ने बचपन से ही सीख दी थी कि अंतिम दम तक हार नहीं माननी है। उनकी इस सीख ने ही संदीप को हौसला दिया और खेल से जोड़ दिया। संदीप बताते हैं, 'परिवार और कोच के भरोसे के कारण ही मैं यहां तक पहुंच सका हूं। कोच नवल सिंह 2014 से मेरे साथ हैं। मैं रियो पैरालिंपिक में मामूली अंतर से मेडल चूक गया था और चौथे नंबर पर रहा था। जब भारत लौटा तो लगा कि चौथे और 40वें नंबर में कोई फर्क नहीं है। जब तक आप पोडियम फिनिश नहीं करते, तब तक मेहनत करते रहनी चाहिए। मैंने अपनी हार को मोटिवेशन के रूप में लिया और कड़ी मेहनत करने लगा। कोच ने फिनलैंड में मेरी टेक्नीक पर लगभग डेढ़ महीने तक काम किया। उन्होंने मेरी टेक्नीक और पावर पर काफी काम किया। इससे मेरा खेल बिलकुल ही बदल गया। मैंने पिछले साल एशियन गेम्स व अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीता तो मुझे लगा कि मेरी मेहनत सफल हो गई।' संदीप कहते हैं, 'मैं अंधविश्वासी भी हूं। मैं टूर्नामेंट में पर्सनल जैवलिन और पसंदीदा जर्सी व ट्रैक पेंट लेकर जाता हूं और कॉम्प्टिीशन के दिन वही इस्तेमाल करता हूं।'


शूटिंग: भारत को रिकॉर्ड 15वां ओलिंपिक कोटा- दोहा | कतर में जारी 14वीं एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में रविवार को भारत ने टोक्यो ओलिंपिक-2020 के लिए शूटिंग के तीन कोटे हासिल किए। ये कोटे 18 साल के शूटर ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर, अंगद वीर सिंह और मैराज अहमद ने दिलाए। इसी के साथ भारत के शूटिंग में कुल 15 ओलिंपिक कोटे हो गए हैं।


सुमित सामान्य कैटेगरी में चैंपियन नहीं बने तो पैरा एथलीट बनकर सपना पूरा किया
सोनीपत के सुमित उभरते हुए पहलवान थे। कुश्ती का वर्ल्ड चैंपियन बनना उनका सपना था। लेकिन करीब चार साल पहले दुर्घटना का शिकार हो गए, जिससे घुटने का निचला हिस्सा काटना पड़ा। सामान्य कैटेगरी में चैंपियन नहीं बन सके तो पैरा खेल से जुड़े, ताकि सपना पूरा कर सकें। सुमित के जीजाजी वीरेंद्र धनकड़ भी पैरा एथलीट (जैवलिन थ्रोअर) हैं। उन्होंने सुमित को हौसला दिया और शुुरुआती कोचिंग दी। इसके बाद द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच नवल सिंह के पास दिल्ली भेज दिया। इसके बाद सुमित ने एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई किया। इस बार उन्होंने वर्ल्ड रिकाॅर्ड के साथ सिल्वर जीता।

 

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