40 हजार श्रद्धालुओं के लिए नहर के किनारे बनाया जा रहा 2 किलोमीटर लंबा कच्चा घाट / 40 हजार श्रद्धालुओं के लिए नहर के किनारे बनाया जा रहा 2 किलोमीटर लंबा कच्चा घाट

Rohtak News - नहाय खाय के साथ 4 दिवसीय छठ महापर्व का शुभारंभ 11 नवंबर से हो रहा है। शनिवार को जेसीबी और फोकलेन मशीन से नहर की पटरी पर...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2018, 03:45 AM IST
Rohtak - 2 kilometer long kacha ghat being constructed along the canal for 40 thousand pilgrims
नहाय खाय के साथ 4 दिवसीय छठ महापर्व का शुभारंभ 11 नवंबर से हो रहा है। शनिवार को जेसीबी और फोकलेन मशीन से नहर की पटरी पर उगी झाड़ियों और पुल के पास जमा कचरे की सफाई करवाई गई। इस बार पूजा के लिए 40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। उनके लिए 2 किलोमीटर लंबाई में नहर के किनारे कच्चा घाट बनाया जा रहा है। पटरी पर उड़ रही धूल को दबाने के लिए पानी के 35 टैंकर से छिड़काव किया जाएगा। पूर्वांचल एकता सेवा समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों व कार्यकर्ताओं की टीम ने शनिवार को सुबह 11 बजे शाम 4 बजे तक श्रमदान किया। व्रती लोगों की सुविधा के लिए नहर में उतरने के लिए सीढ़ियां बनाई गई। इस दौरान समिति के प्रधान आचार्य ब्रज किशोर शास्त्री, उप प्रधान सुमित्रा देवी, कोषाध्यक्ष राम एकवाल राय, सचिव रणधीर राय, सह सचिव संजीव सिंह, प्रेस सचिव अजय सिन्हा, दिनेश सिंह, नारायण मौर्य, गोपाल झा, सुबोध आदि ने सहयोग किया। रविवार को भी नहर पर सफाई करवाई जाएगी।

रोहतक के भालौठ सब ब्रांच नहर पर स्थित पुल के पास जमा कचरे की सफाई करती फोकलेन मशीन।

ऐसे समझें छह पर्व

नहाय खाय: छठ महापर्व की पूजा का पहला दिन रविवार को कार्तिक शुक्ल चतुर्थी पर नहाय खाय से शुरू होगा। घर की सफाई के बाद व्रती शाकाहारी भोजन करते हैं। भोजन में व्रतियों व परिवार के सभी सदस्यों को कद्दू की दाल व चावल ग्रहण करना पड़ता है।

लोहंडा और खरना: दूसरे दिन सोमवार को दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को व्रती भोजन करेंगे। इसे खरना कहते हैं। प्रसाद के लिए लोगों को आमंत्रित किया जाएगा। गन्ने के रस में चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिट्‌ठा व घी चुपड़ी रोटी बनेगी।

संध्या अर्घ्य: मंगलवार को कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर छठ प्रसाद में ठेकुआ,चावल के लड्डू बनाया जाएगा। इसके अलावा चढ़ावा के रूप में लाया गया सांचा और फल भी छठ प्रसाद में व्रती शामिल करते हैं। सूर्य को संध्या अर्घ्य के साथ तीसरे दिन की पूजा संपन्न होगी।

उषा अर्घ्य: कार्तिक शुक्ल सप्तमी बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ जल में खड़े होकर श्रद्धालु सामूहिक रूप से एकत्रित होकर अर्घ्य अर्पित करेंगे। व्रती कच्चे दूध का शरबत पीकर और थोड़ा प्रसाद ग्रहण कर छठ महापर्व का व्रत पूर्ण करते हैं।

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