हरियाणा / टीचर की नौकरी छोड़कर अब हेलिकॉप्टर उड़ाती है 2 बेटियों की मां; कश्मीर में उड़ा रहीं चॉपर



महेंद्रगढ़ की सुनीता कुमारी। महेंद्रगढ़ की सुनीता कुमारी।
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महेंद्रगढ़ की सुनीता कुमारी।महेंद्रगढ़ की सुनीता कुमारी।

  • महेंद्रगढ़ जिले के छोटे से गांव रसूलपुर से संबंध रखती हैं सुनीता कुमारी, स्कूल में विज्ञान पढ़ाती थी बच्चों को
  • शादी के 10 साल बाद बनाया अमेरिका जाकर फ्लाइंग सीखने का मन, रिटायर्ड सूबेदार पिता ने खर्चे 45 लाख

Dainik Bhaskar

Oct 09, 2019, 06:25 PM IST

महेंद्रगढ़. कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद वहां सेना को ले जाने वाले डबल इंजन वाला स्कवायरल चॉपर उड़ाने वालों में 49 साल की सुनीता कुमारी यादव भी शामिल हैं। सुनीता की दो बेटियां हैं और वह हरियाणा में साइंस टीचर थी। छोटी बहन के तानों के बाद सुनीता ने नौकरी छोड़ी और पिता की सहायता से वह अमेरिका के फ्लोरिडा गईं और वहां हेलिकॉप्टर फ्लाइंग सीखी। अब वह पवन हंस इंटरप्राइजेज में पायलट हैं।

 

महेंद्रगढ़ जिले के गांव रसूलपुर में रिटायर्ड सूबेदार तुलाराम की तीन संतानों में सबसे बड़ी सुनीता कुमारी यादव साइंस की पढ़ाई पढ़ी हुई हैं। वह डीएवी स्कूल में बच्चों को साइंस पढ़ाती थीं। छोटी बहन कमल और छोटा भाई विशाल भी एयर इंडिया में कार्यरत हैं। पिता तुलाराम ने दैनिक भास्कर प्लस एप को बताया कि एक दिन बातोंबातो में सुनीता ने पायलट बनने की इच्छा जताई थी। बेटी के सपने को हौसले के पंख लगाते हुए अमेरिका भेजने की तैयारी कर डाली। उन्होंने बताया कि सुनीता को छोटी बहन कमल ने ताना मार दिया, 'पायलट बनना कोई आसान बात नहीं है।' इसके बाद यह इच्छा जुनून में बदल गई और साइंस टीचर की नौकरी छोड़ दी।
 
2010 में पिता तुलाराम ने 35 लाख रुपए खर्च करके फ्लोरिडा भेजा, क्योंकि उस वक्त यहां हेलिकॉप्टर पायलट के कोर्स के इतने स्कोप नहीं थे। टेस्ट के बाद सुनीता वहां चली गई। वहां 6 महीने में कोर्स पूरा होना था, पर मौसम की दिक्कत की वजह से ज्यादा समय लग गया। इसके बाद परिवार ने 10 लाख रुपए और खर्चे भी लगे। वहीं, सुनीता ने भी मेहनत में कोई कसर नहीं छोड़ी। 

 

वहां से आने के बाद भारत में पायलट जॉब के लिए कोशिशें शुरू की तो काफी संघर्ष के बाद भारत की सबसे बड़ी हेलिकॉप्टर कंपनी पवन हंस इंटरप्राइजेज में बात बन गई। दो बेटियों की मां सुनीता अब पिछले करीब 4 साल से वह इसमें कार्यरत हैं और अब यूरोकॉप्टर एस-350 बी-3 उड़ाती हैं। इस चॉपर के जरिये जम्मू-कश्मीर में पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों के अलावा आपातकालीन सुविधाओं के जरूरतमंद सामान्य लोगों को भी मदद पहुंचाती रही हैं। 5 अगस्त को जब जम्मू-कश्मीर में तमाम मोबाइल फोन और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थी, तब से लेकर सुनीता ने 43 दिन उड़ान भरी हैं।

 

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