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वायु प्रदूषण: सर्दियों में ईंट-भट्ठों को बंद करने का लिया फैसला, चलेंगे सिर्फ 5 महीने

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 03:42 AM IST

Rohtak News - बैठक में उपस्थित ईंट-भट्ठा संचालक एसोसिएशन के पदाधिकारी। र| पंवार | रोहतक हर साल सर्दियों के सीजन में स्मॉग...

Rohtak - air pollution decision to stop brick kilns in winter only 5 months to run
बैठक में उपस्थित ईंट-भट्ठा संचालक एसोसिएशन के पदाधिकारी।

र| पंवार | रोहतक

हर साल सर्दियों के सीजन में स्मॉग बनने और उसके कारण सबसे पहले ईंट-भट्ठों को बंद करने के ऐलान को लेकर अब प्रदेश के भट्ठा संचालकों ने सर्दियों में भट्ठों को बंद करने का ही फैसला लिया है। साल में सिर्फ पांच माह ही भट्ठे संचालित किए जाएंगे। इसे लेकर शनिवार को हरियाणा प्रदेश ईंट-भट्ठा संचालक एसोसिएशन की प्रदेश स्तरीय बैठक में फैसला लिया है। सर्वसम्मति से पारित किए गए। इस प्रस्ताव को लेकर अब सीएम मनोहर लाल काे मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

रोहतक प्रदेश कार्यालय में की गई बैठक की अध्यक्षता प्रदेशाध्यक्ष गुलशन नारंग ने की। इस दौरान प्रदेशाध्यक्ष गुलशन नारंग ने मांग उठाई कि ईंट-भट्ठों को पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (इपका) की ओर से बनाए गए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) से भी बाहर किया जाना चाहिए। इसके बजाए भट्ठों के संचालक का समय ही निर्धारित कर दिया जाना चाहिए। भट्ठा संचालक दिलबाग दांगी और अनूप दहिया का कहना है कि एक बार भट्ठे में 1050 डिग्री सेल्सियस तापमान पर आग लगाने पर करीब 10 से 15 लाख रुपए तक का खर्च आता है। भट्ठा ठंडा करने में भी एक सप्ताह का समय लगता है। अचानक बंद होने से सभी संचालकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। साथ ही एसोसिएशन सरकार को आश्वस्त करेगी कि सरकार कार्य के लिए सरकारी रेट पर जितने भी माल की जरूरत पड़ेगी, वे देने के लिए तैयार रहेंगे।

इधर, प्रदूषण के चलते तीन दिन से बहादुरगढ़ में रोके गए सैकड़ों ट्रकों को रविवार दिल्ली में प्रवेश नहीं मिलेगा। अब 12 नवंबर के बाद ही दिल्ली में प्रवेश करने दिया जाएगा।


एक फरवरी से जून तक ही होगा भट्‌ठों का संचालन

प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में फैसला लिया गया कि अब एक फरवरी से जून तक ही भट्ठा संचालन करने दिया जाए। इसके बाद मानसून सीजन होने के चलते सितंबर तक भट्ठे बंद ही रहते हैं आैर सर्दी में स्मॉग के कारण अक्सर एनजीटी के आदेशों पर संचालन रोकना पड़ता है। फरवरी से जून तक गर्मी का सीजन रहता है और प्रदूषित कण भी गर्म मौसम के कारण ज्यादा नुकसानदेय नहीं हो पाते। इसलिए अागे से सर्दी में संचालन बंद करने का ही फैसला लिया है, ताकि प्रदूषण रोकने में भी सहयोग किया जा सके। प्रदेश में 2700 ईंट-भट्ठे हैं। सभी भट्ठों पर मानसून सीजन में पौधरोपण करवाया जाएगा।

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