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कांग्रेस में 42 से 12 रह गए मेयर के टिकट के दावेदार सभी कह रहे-अब हुड्डा से समर्थन मांगकर लड़ेंगे चुनाव

3 वर्ष पहले
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मेयर पद पर आजाद लड़ेंगे, लेकिन 100 फीसदी कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार रहेंगे। शुक्रवार को पूर्व सीएम हुड्‌डा से मिलकर चुनाव प्रचार की रणनीति तय करेंगे। पार्टी का पुराना कार्यकर्ता होने के साथ चुनावी समीकरण पक्ष में हैं। -राजबीर सैनी, निवर्तमान पार्षद।

कांग्रेस के सामने अब एक दर्जन नेताओं को मनाने की चुनौती, अंदरखाते एक को देना है समर्थन

भास्कर न्यूज | रोहतक

कांग्रेस की ओर से नगर निगम चुनाव सिंबल पर नहीं लड़ने की घोषणा करने के बाद से शहर की राजनीति में तेजी से समीकरण बदले हैं। कांग्रेस के हुड्डा और तंवर गुट की ओर से 42 उम्मीदवारों ने मेयर के टिकट पर दावेदारी जताई थी। ऐसे में गुटबाजी रोकने के लिए यह फैसला लिया गया कि चुनाव सिंबल पर नहीं लड़ा जाएगा। हालांकि 42 में से आधे से ज्यादा उम्मीदवार तो पीछे हट गए, लेकिन अब भी लगभग एक दर्जन उम्मीदवार ऐसे हैं जो मेयर का चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं।

अब कांग्रेस के दोनों खेमों के सामने यह चुनौती होगी कि वे अंदरखाते किसे समर्थन करेंगे। एक उम्मीदवार के नाम पर कैसे सहमति बनाएंगे। वहीं, जाति विशेष के निवर्तमान पार्षदों के एक ग्रुप ने तो गुरुवार को देर रात बैठक कर अपना उम्मीदवार खड़ा करने की प्लानिंग तैयार की। वहीं, कांग्रेस के इस कदम के बाद भाजपा पर नए सिरे से अपनी रणनीति पर मंथन कर रही है।

एक जाति विशेष के निवर्तमान व पूर्व पार्षदों ने मिलाया हाथ, उतार सकते हैं साझा उम्मीदवार
3 दिन पहले हुड्डा ने टटोली थी नब्ज, लग गया था जमावड़ा
दो दिन पहले पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने आवास पर नगर निगम चुनाव के इच्छुक उम्मीदवारों को बुलाकर नब्ज टटोली थी। तब भी हुड्डा ने कहा था कि निगम चुनाव तो बाद में लड़ लेंगे पहले दोनों बतरा एक हो जाए। इसके बाद मेयर की टिकट के इच्छुक 32 उम्मीदवारों से लिखित में आवेदन मांगे गए थे। कहा गया था कि 1 दिसंबर से पहले पहले सबकी बात सुनकर मेयर पद का पार्टी उम्मीदवार घोषित कर दिया जाएगा। अब केंद्रीय नेतृत्व के फैसले से उनके मंसूबे धरे रह गए। अब अंदरखाते कुछ उम्मीदवार ही रह गए हैं।

कई प्रत्याशी बोले- एरिया बड़ा, बिना कांग्रेस के सिंबल के चुनाव लड़ने से कोई फायदा नहीं
मेयर पद के कुछ कांग्रेसी दावेदाराें ने बिना सिंबल ही मेयर का चुनाव लड़ने का ऐलान किया तो कईयों ने हाईकमान का हुक्म बताकर दावेदारी से अपने नाम पीछे खींच लिए हैं। किसी ने आमराय से पंचायती उम्मीदवार उतारने की सलाह दे दी। सुभाष तायल ने कहा कि मेयर पद का चुनाव कांग्रेस पार्टी के सिंबल के बिना लड़ने का कोई फायदा नहीं है। सीधे चुनाव होने से एरिया बड़ा हो गया है। मेयर पद के लिए पौने दो लाख वोटर हैं, जबकि समय बहुत कम हैं। गुलशन डंग ने कहा कि कार्यकर्ता के पास और कोई चारा नहीं है। पार्टी जो आदेश देगी उसका पालन करेंगे। गुलशन ईश्पुनियानी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी है, धमाका अजीब होता है। हुड्डा साहब का आदेश मानेंगे। मेयर पद पर आजाद बिल्कुल नहीं लड़ेंगे, लेकिन पार्षद का चुनाव आजाद ही लड़ना पड़ेगा। निवर्तमान मेयर रेणु डाबला ने कहा कि पूर्व सीएम का फैसला मान्य होगा। बिजेंदर हुड्‌डा ने कहा कि मेयर के टिकट के लिए कल हुड्‌डा से मिलेंगे।

इन कांग्रेसियों ने ठोकी मेयर चुनाव लड़ने की दावेदारी
ऐसे फैसले से धक्का तो लगता ही है। पार्टी की मजबूरी हाईकमान जाने। पार्टी सिंबल देती तो अच्छी बात थी। फिर भी मेयर पद का चुनाव लडूंगा। शहर की जनता का साथ है। - सूरज रसवंत, व्यापारी।

कांग्रेस के समर्थन से ही मेयर का चुनाव लड़ूंगा। 1992 से पार्टी का सिपाही हूं। हाईकमान का फैसला बदल गया, नहीं तो पार्टी का सिंबल भी लेता। मेयर व पार्षद दोनों फार्म भरूंगा। -सुरेश गुप्ता, पूर्व पार्षद।

कांग्रेस पार्टी से मेयर पद का प्रबल दावेदार शुरू से हूं। सिंबल नहीं मिलेगा तो भी हम निर्दलीय होकर भी भूपेंद्र हुड्‌डा के नेतृत्व में मेयर का चुनाव लड़ेंगे। -सीताराम सचदेवा, पूर्व पार्षद।

एक उम्मीदवार को समर्थन देकर लड़ेंगे चुनाव : बतरा
नगर निगम का छोटा चुनाव है। इसमें बांटने की बीजेपी तैयारी में थी, लेकिन कांग्रेस ने उसकी चाल फेल कर दी। वर्ष 1968 को छोड़कर 1952 से आज तक कभी भी निकाय चुनाव में कांग्रेस ने पार्टी सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ा। पिछली बार के नतीजे सामने हैं। बिना सिंबल पर लड़े ही नगर निगम के मेयर पद हमारा कब्जा रहा। अब भी हमने चुनावी फील्ड नहीं छोड़ा है। कोशिश करेंगे कि एक ही कैंडीडेट कांग्रेस समर्थित मेयर पद का उम्मीदवार बने। -भारत भूषण बतरा, पूर्व विधायक।

निगम के चुनाव को लेकर मैं अपने निर्णय पर अटल हूं। मेयर का चुनाव लड़ूंगा। दो दिन का वक्त दो। हर हाल में कांग्रेस पार्टी का ही समर्थित उम्मीदवार रहूंगा। इस संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्‌डा से मिलकर कल ही बात की जाएगी। -सूरजमल रोज, निवर्तमान पार्षद।

सिंबल पर नगर निगम का चुनाव नहीं लड़ने का फैसला हाईकमान का है, लेकिन पहले और आज भी मेयर पद का प्रबल दावेदार हूं। सिंबल पर नहीं लेकिन कांग्रेस पार्टी के समर्थन से ही मेयर पद का चुनाव मैं लड़ूंगा। -गुलशन ईशपुनियानी, प्रधान, शौरी क्लाथ मार्केट।

भाजपा खेमे में भी हलचल

सबसे आगे दौड़ने वाले अब पीछे छूटते दिखे

कांग्रेस की ओर से निगम का चुनाव बिना सिंबल लड़ने की घाेषणा का असर बीजेपी खेमे में भी दिखाई दे रहा है। कल तक मेयर पद के प्रमुख दावेदार पीछे छूटते दिखाई दिए। वहीं, जातीय समीकरण का हवाला देते हुए गुरुवार को दो अन्य पदाधिकारियों ने खुद की दावेदारी ठोक दी, जबकि एक उम्मीदवार पहले से ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल के संपर्क में हैं। इन सबकी नजर शुक्रवार को दिल्ली की बैठक पर है। जहां मेयर के टिकट पर मुहर लगेगी।

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