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  • By donating up to 60% of liver, Dr. Poonam gave new life to her father in law and Priyanka to mother in law

हरियाणा / लिवर का 60 फीसदी तक हिस्सा दान कर डॉक्टर पूनम ने ससुर और प्रियंका ने सास को दिया नया जीवन

डॉ. पूनम सुसर रामगोपाल के साथ। डॉ. पूनम सुसर रामगोपाल के साथ।
सास इंदिरा के साथ प्रियंका। सास इंदिरा के साथ प्रियंका।
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डॉ. पूनम सुसर रामगोपाल के साथ।डॉ. पूनम सुसर रामगोपाल के साथ।
सास इंदिरा के साथ प्रियंका।सास इंदिरा के साथ प्रियंका।

  • पत्नी-बेटों का लिवर मैच नहीं हुआ तो ससुर रामगोपाल को पुत्रवधू ने किया डोनेट
  • सास इंदिरा का लिवर डैमेज होने पर बहू प्रियंका ने अपना लिवर देकर बचाई उनकी जान

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2020, 12:59 AM IST

झज्जर/डबवाली (देवेंद्र शुक्ला/पूर्ण धनेरवा). लिवर का आधे से भी ज्यादा हिस्सा सास-ससुर को देकर हरियाणा की बहुओं ने मिसाल कायम की है। बच्चों का लिवर मैच नहीं होने पर झज्जर में एक बहू ने ससुर को तो एक अन्य बहू ने डबवाली में सास को लिवर डोनेट किया।

केस-1- झज्जर की बेटी बीएमएस डॉक्टर पूनम माथुर ने अपने लिवर का बड़ा हिस्सा देकर अपने ससुर को नया जीवन दिया है। आज ससुर जान बचाने वाली लाडली पुत्रवधू को किसी देवी से कम नहीं मानते। दरअसल, झज्जर नगरपालिका के सचिव रहे लक्ष्मण दास माथुर की बेटी डॉ. पूनम की शादी दिल्ली के द्वारका में हुई है।

पूनम बताती हैं, ‘2009 में उस समय पूरा परिवार हिल गया था, जब ससुर रामगोपाल के लिवर को डॉक्टरों ने खराब बताते हुए कह दिया था कि आगे इनकी जिंदगी सिर्फ 5 साल है। कुछ साल इलाज चला, लेकिन तबीयत ज्यादा खराब रहने लगी। उनका प्रिंटिंग का व्यापार प्रभावित रहने लगा। 2014 में लिवर ट्रांसप्लांट कराने का फैसला लिया। इसके लिए लिवर का बड़ा हिस्सा चाहिए था।

परिवार के सदस्य के रूप में सबसे पहले सास का टेस्ट हुआ तो शुगर की बीमारी के कारण डॉक्टरों ने उनका लीवर लेने से मना कर दिया। पति व देवर की बीमारी के चलते उनका लीवर भी काम नहीं आया। तब मैंने अपने ससुर की जान बचाने के लिए अंगदान का फैैसला लिया। मेरा लिवर मैच भी हो गया।

तब डॉक्टरों के पैनल ने मायकेवालों की काउंसिलिंग करते हुए कहा कि आपकी बेटी लिवर का एक बड़ा हिस्सा डोनेट कर रही है। ऑपरेशन बहुत जटिल व लंबा है। जान भी जा सकती है। मेरे पिता कहने लगे कि बेटी के अंग से समधी की जान बचती है तो इससे बड़ा गर्व कुछ नहीं हो सकता। ऑपरेशन में बेटी की जान भी जाती है, तब भी फक्र होगा।

तब सबकी आंखों में आंसू आ गए और मुझमें आत्मविश्वास आया। इस घटना को जिंदगी में कभी नहीं भूल सकती। ऑपरेशन के बाद आज ससुर स्वस्थ्य हैं।’ पूनम कहती हैं कि जब मेडिकल लाइन में आई, तभी मुझे किसी की जान बचाने व किसी की जान बचने का महत्व समझाया गया था। बीमार को ठीक करना व मरते हुए को जीवन देना ही सबसे बड़ा पुण्य है।

केस-2- डबवाली की बेटी प्रवीण उर्फ प्रियंका खुराना ने लिवर का 60 फीसदी हिस्सा डोनेट कर अपनी सास को जीवनदान दिया। आज सास अपनी बहू को बड़े जिगर वाली बताती हैं। डबवाली निवासी व्यवसायी भगवानदास मोंगा की बेटी प्रियंका की शादी 2001 में सिरसा में डॉ. अर्जुनदास खुराना के बेटे हर्ष से हुई थी। 2006 से सास इंदिरा खुराना अस्वस्थ रहने लगीं।

दिल्ली के अपोलो अस्पताल में 2010 में लिवर डैमेज होने से ट्रांसप्लांटेशन की जरूरत बताई। लिवर डोनेट करने वाले की तलाश की जाने लगी, तब बहू प्रियंका ने लिवर डोनेट करने की पेशकश की। चेकअप में लिवर डोनेशन के लिए परफेक्ट मैच हुआ। 10 जनवरी 2011 को ऑपरेशन हुआ।

लिवर ट्रांसप्लांटेशन व डोनेशन की प्रक्रिया इतनी जटिल रही कि प्रियंका 15 दिन अस्पताल में भर्ती रहीं, जबकि सास को 23 दिन अस्पताल में रखा गया। प्रियंका के पिता भगवान दास व मां निर्मल ने बताया कि उनकी 3 बेटियां व 1 बेटा है। परिवार को डेरा राधा स्वामी से अंगदान की प्रेरणा मिली है। बेटी के फैसले ने रिश्तों में विश्वास बढ़ाया।

इंदिरा खुराना ने कहा कि बहू के स्नेह की बदौलत ही ट्रांसप्लांटेशन सक्सेस हुआ है। प्रवीण उर्फ प्रियंका खुराना ने कहा, ‘मैं अपने जिगर को सास के काम आ जाने पर बहुत खुश हूं। इंदिरा सिरसा में सावन स्कूल की संचालिका हैं।

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