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पुलवामा में शहीद सीआरपीएफ जवानों को राष्ट्र न भूला है न कभी भूलेगाः अजीत डोभाल

एक वर्ष पहले
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  • सीआरपीएफ के 80वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
  • कहा- देश की अंदरूनी सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ महत्वपूर्ण, ध्वज का मान बढ़ाया
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गुड़गांव. पुलवामा में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा कि राष्ट्र उन शहीदों को भूला नहीं है और न ही भूलेगा। उन्होंने कहा कि हमें क्या करना है हमारा मार्ग क्या हो, हमारा ध्येय क्या हो, हमारी प्रक्रिया किस प्रकार की हो, इसका समय क्या हो, इसका निर्धारण इस देश करने में देश का नेतृत्व सक्षम है और उसमें हौंसला भी है। चाहे वे आतंकवादी हो या इसका समर्थन करने वाले लोग हों, हम इनका मुकाबला करेंगे।  

1) 37 साल मैं भी यूनिफॉर्म से जुड़ा रहा लेकिन सीआरपीएफ की अपनी विशेषता

डोभाल मंगलवार को सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के 80वें स्थापना दिवस पर गुड़गांव स्थित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने शहीदों के परिवारों को भी नमन किया और कहा कि उनकी कमी पूरी नहीं की जा सकती। लेकिन, शहीदों के परिवारों का पूरा राष्ट्र ऋणी है।

उन्होंने कहा कि आंतरिक सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपने ध्वज का मान बढ़ाया। डोभाल ने शहीद जवानों के परिवार को नमन करते हुए कहा कि आपका मनोबल ऊंचा है तो देश का मनोबल भी ऊंचा रहेगा। सीआरपीएफ के जवानों ने अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन किया है।

उन्होंने कहा, इतने लंबे समय तक देश की सेवा का गौरव सीआरपीएफ को प्राप्त है। शायद यही एक फोर्स है जो भारत के इतने बड़े क्षेत्र में पहुंची है। आज से 79 साल पहले इसी दिन सरदार पटेल ने ध्वज प्रदान किया था। जब किसी को ध्वज प्रदान किया जाता है तो यह उम्मीद की जाती है कि वे इसका नाम रोशन करेंगे। आपने इसका नाम रोशन ही नहीं किया बल्कि ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। 

डोभाल ने कहा कि मेरा भी इस यूनिफॉर्म और भारत की सुरक्षा के साथ जुड़ाव रहा है। 37 साल मैं भी पुलिस में रहा हूं। लगभग सभी सेना और बलों के साथ काम करने का मौका मिला। लेकिन सीआरपीएफ की अपनी विशेषता है, जो किसी अन्य में नहीं। चाहे वीआईपी सिक्यूरिटी हो, चाहे आतंकवाद का मुद्दा हो, चाहे नॉर्थ-ईस्ट हो। जहां भी भारत को आंतरिक सुरक्षा का सामना करना पड़ा, कोई भी जगह ऐसी नहीं थी, जहां सीआरपीएफ को न भेजा गया हो। यही बड़ी विशेषता है। दूसरी विशेषता इस फोर्स पर विश्वसनीयता है। 

 

आंतरिक सुरक्षा का महत्व बहुत बड़ा है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद 37 ऐसे राष्ट्र थे जो या तो टूट गए या कोई अन्य परिवर्तन हुआ था। उसमें से 28 का कारण आंतरिक सुरक्षा थी। देश अगर कमजोर होते हैं तो उसका कारण कहीं न कहीं आंतरिक सुरक्षा की कमी होती है। इसका दायित्व सीआरपीएफ पर है तो आप समझ सकते हैं कि कितनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी आपको मिली है।

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