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89 फीसदी मोबाइल टावर बगैर फीस भरे चल रहे, सील होंगे

एक वर्ष पहले
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शहर के विभिन्न इलाकों में लगे मोबाइल टावरों को लेकर अब तक 11 प्रतिशत टावर संचालकों ने ही निगम को निर्धारित फीस की अदायगी की है। शहरी क्षेत्र में लगभग 350 मोबाइल टावर चल रहे हैं। इनमें से 89 फीसदी का संचालन बगैर फीस चुकाए हो रहा है। वहीं निगम को अंतिम नोटिस भेजने के बावजूद टैक्स वसूली में कामयाबी नहीं मिल पा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में महज 16 दिन शेष हैं। इसको देखते हुए नगर निगम की ओर से टावर संचालकों से शत-प्रतिशत वसूली की तैयारी है। मामले में 17 मार्च को अंबेडकर चौक स्थित नगर निगम कार्यालय में सुबह साढ़े 11 बजे बैठक बुलाई गई है। इसमें सभी मोबाइल टावर कंपनियों के प्रतिनिधियों को शामिल होना अनिवार्य किया गया है। इन्हें फीस भरने के लिए आखिरी अल्टीमेटम दिया जाएगा। इसके बाद ये टावर सील होंगे।

बड़े बकाएदारों पर मंगलवार से शुरू करेंगे सीलिंग की कार्रवाई

नगर निगम ने प्राॅपर्टी टैक्स के दो से 6 लाख के 135 बड़े बकाएदारों की सूची तैयार की है। तीन दिन पहले अभियान चलाकर दो दर्जन बकाएदारों से लिखित में लेते हुए 16 मार्च तक एरियर सहित बकाया भुगतान की मोहलत दी गई थी। 17 मार्च से इनके खिलाफ भी सीलिंग कार्रवाई शुरू करने की तैयारी है।

मोबाइन टावर व केबल संचालकों को लेकर नगर निगम के कमिश्नर प्रदीप गोदारा ने कहा कि इन्हें काफी समय दिया जा चुका है। 17 मार्च की बैठक में गैरहाजिर रहने वाले और 31 मार्च से पहले फीस की शत प्रतिशत अदायगी नहीं करने वाली कंपनियों के टावर सील किए जा सकते हैं।

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