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- Kalanaur News Haryana News A Paper Was Spoiled Could Not Understand Even By Explaining To The Family The 10th Student Hanged Her Life
एक पेपर खराब गया, परिजनों के समझाने से भी नहीं समझी, 10वीं की छात्रा ने फंदा लगा दी जान
यह खबर उन अभिभावकों के लिए हैं, जिनके बच्चे परीक्षा दे रहे हैं या देंगे या फिर नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। गांव कटेसरा में फाग की रात 10वीं की छात्रा ने पंखे पर चुन्नी से फंदा लगा लिया। पीजीआई में उसकी मौत हो गई। पुलिस और परिजनों का कहना है कि छात्रा 10वीं की परीक्षा में एक पेपर अच्छा नहीं होने की वजह से परेशान थी। परिजनों ने उसे समझाने की कोशिश की कि परिणाम सही रहेगा, लेकिन वे उसे विश्वास नहीं दिला पाए। छात्रा ने इसे ही अपने जीवन की अंतिम परीक्षा समझा और मौत को गले लगा लिया। पुलिस ने परिजनों के बयान के आधार पर सीआरपीसी की धारा 174 के तहत कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के हवाले कर दिया। नंबर गेम के दबाव ने छात्रा की जान ले ली।
एक पेपर खराब हुआ तो दूसरों की भी तैयारी सही नहीं की: पुलिस के अनुसार, परिजनों ने बताया कि छात्रा गांव कटेसरा के ही एक निजी स्कूल में पढ़ती थी। इन दिनों वह 10वीं की बोर्ड परीक्षा दे रही थी। जिसका सेंटर पिलाना गांव के स्कूल में आया हुआ था। पुलिस के अनुसार छात्रा का हिंदी और सामाजिक विज्ञान का पेपर हो चुका है। इन पेपरों में से एक पेपर छात्रा का खराब हुआ था। इसके बाद से वह दुखी रहती थी। उन्होंने कहा था कि पेपर कैसा भी हुआ हो, परिणाम सही ही रहेगा, चिंता न करें। लेकिन छात्रा उस पेपर की वजह से अन्य पेपरों की तैयारी भी सही से नहीं कर पा रही थी। मंगलवार रात को वह अपने कमरे में चली गई और फंदा लगा लिया।
परीक्षा के इन दिनाें में बच्चा परेशान दिखे ताे करें बात: हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद ने डिविजन स्तर पर बच्चों को मनोवैज्ञानिक परामर्श सेवाएं देने के लिए एक पहल शुरू की है। इस पर अभिभावक इस तरह के परामर्श भी ले रहे हैं कि उनके बच्चे पढ़ाई नहीं करते या चिंता में रहते हैं। पिछले दिनाें परीक्षा संबंधी शिकायतें ही इस पर अाईं। बच्चों की बात-फोन के साथ में फ्री काउंसिलिंग के लिए इस हेल्पलाइन नंबर पर महीने के हर दूसरे और चौथे बुधवार को कॉल करें। इसके लिए 8278228020 नंबर है। रोहतक डिविजन के बाल कल्याण अधिकारी अनिल मलिक ने बताया कि दोपहर 3 से 4 बजे तक परामर्श ले सकते हैं। परिवार के सदस्य घर में संवाद जरूर करें, यह आज की आवश्यकता भी है। वहीं, इस बारे में पीजीअाई के मानसिक राेग विभाग में जाकर भी सलाह कर सकते हैं।