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फरीदाबाद / अरावली क्षेत्र में बनी कांत एन्क्लेव पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई, प्रशासन ने तोड़े मकान



जिला प्रशासन की टीम मकान गिराते हुए। जिला प्रशासन की टीम मकान गिराते हुए।
पुलिस व रैपिड एक्शन फोर्स की मौजूदगी में हुई कार्रवाई। पुलिस व रैपिड एक्शन फोर्स की मौजूदगी में हुई कार्रवाई।
मौके पर मौजूद स्थानीय लोग। मौके पर मौजूद स्थानीय लोग।
बड़ी संख्या में मौजूद रहा पुलिस बल। बड़ी संख्या में मौजूद रहा पुलिस बल।
13 निर्माण गिराए गए। 13 निर्माण गिराए गए।
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जिला प्रशासन की टीम मकान गिराते हुए।जिला प्रशासन की टीम मकान गिराते हुए।
पुलिस व रैपिड एक्शन फोर्स की मौजूदगी में हुई कार्रवाई।पुलिस व रैपिड एक्शन फोर्स की मौजूदगी में हुई कार्रवाई।
मौके पर मौजूद स्थानीय लोग।मौके पर मौजूद स्थानीय लोग।
बड़ी संख्या में मौजूद रहा पुलिस बल।बड़ी संख्या में मौजूद रहा पुलिस बल।
13 निर्माण गिराए गए।13 निर्माण गिराए गए।

  • अरावली क्षेत्र में बनाई गई थई कांत एन्क्लेव, सुप्रीम कोर्ट ने वापिस फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को जमीन देने के लिए दिए थे आदेश

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2019, 11:40 AM IST

फरीदाबाद। फरीदाबाद के सूरजकुंड रोड पर अरावली क्षेत्र में बनाई गई कांत एन्क्लेव पर सोमवार 1 अप्रैल को सुबह-सुबह प्रशासन के बुल्डोजर शुरू हो गए। यहां बनाए गए मकानों को गिरा दिया गया। इस दौरान 13 निर्माण तोड़े गए। पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स व जिला प्रशासन के लोग मौजूद रहे। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुई। इस दौरान लोगों ने विरोध किया लेकिन प्रशासन ने उनकी एक न सुनी।  
 

 

ये है पूरा मामला

  1. दरअसल 11 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने कांत एन्क्लेव पर फैसला देते हुए कहा था कि कांत एन्क्लेव की जमीन फॉरेस्ट लैंड है। जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की स्पेशल बेंच ने 18 अगस्त 1992 के बाद हुए अवैध निर्माण को ढहाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने हालांकि 17 अप्रैल 1984 से 18 अगस्त 1992 के बीच हुए निर्माण को नुकसान न पहुंचाने को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि सभी निर्माणों को गिराया जाए। जमीन वापस फॉरेस्ट को दी जाए।
     

  2. सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को कहा था कि अवैध निर्माण को गिराने की कार्रवाई को 31 दिसंबर 2018 तक पूरा किया जाए। कोर्ट ने ये भी कहा था कि कंपनी के अनुसार एन्क्लेव डेवलेप करने में 50 करोड़ का खर्च हुआ है। इसलिए नुकसान की भरपाई के लिए 5 करोड़ जमा किए जाए। कोर्ट ने सरकार को ये भी कहा कि प्रभावित लोगों को 10 दिसंबर तक पैसा दें जिनके घर तोड़े जाने हैं। 11 दिसंबर को फिर हुई सुनवाई में मुख्य सचिव सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए।
     

     

  3. चीफ सेक्रेटरी ने कोर्ट को ये बताया

    चीफ सेक्रेटरी ने कोर्ट को बताया का कांत एन्क्लेव में रहने वाले लोगों ने जगह खाली करने के लिए और समय मांगा है। कांत एन्क्लेव में रहने वालों ने कहा कि उन्हें अप्रैल 2019 तक का समय दिया जाए। उनकी तरफ से कहा गया कि हमारे पास रेंट देने तक के पैसे नहीं है। ऐसे में हम कहां जाएं। जो भी रहने वाले लोग हैं वे रिटायर्ड हैं और अभी तक उन्हें मुआवजे के पैसे नहीं मिले हैं। 
     

  4. कोर्ट ने कहा कि जिन प्लॉट्स पर निर्माण हुआ है उनमें से हर प्लॉट मालिक को 50 लाख रुपए मुआवजा दिया जाए। चीफ सेक्रेटरी के मुताबिक कांत इन्क्लेव में 1617 प्लॉट हैं। निर्माण सिर्फ 33 प्लॉटों पर हुआ है। दिसंबर में हुई सुनवाई में यह तय हुआ था कि जो मकान मालिक 15 दिसंबर तक शपथपत्र दाखिल करेंगे उन्हें 31 जुलाई तक खुद ही आवास गिराने की छूट दी जाएगी। अन्यथा 31 मार्च के बाद उनके आवास गिरा दिए जाऐंगे। 42 में से 22 मालिकों ने अदालत में शपथपत्र दाखिल कर दिया था लेकिन 20 समय पर शपथपत्र नहीं दे सके थे।  
     

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