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14 साल बाद बिना सर्वे बनाए राशन कार्ड, जो गरीबी रेखा से निकल गए उनके भी बने

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 05:10 AM IST

Rohtak News - 14 साल (साल 2005 में सर्वे किया था) बाद बिना सर्वे किए ही नए राशन कार्ड छाप दिए गए। राशन कार्ड में उन्हें भी जिंदा दिखा...

Kalanaur News - haryana news after 14 years ration cards made without survey which also came out of the poverty line
14 साल (साल 2005 में सर्वे किया था) बाद बिना सर्वे किए ही नए राशन कार्ड छाप दिए गए। राशन कार्ड में उन्हें भी जिंदा दिखा दिया, जिनकी दो साल पहले ही मौत हो चुकी है। जबकि इनके परिवार के लोग राशन कार्ड से नाम कटवा चुके थे। इसके साथ ही बहुत से ऐसे हैं, जोकि बीपीएल के दायरे से बाहर आ चुके हैं, लेकिन उनके बीपीएल कार्ड बनाकर बांटे जा रहे हैं। नए बने राशन कार्ड में भारी भरकम गलतियां हैं।

कुछ डिपो ऐसे हैं, जिनके अधीर कई गांव हैं, जबकि राशन कार्ड पर उसी गांव का नाम छापा गया, जिस गांव के नाम से डिपो अलॉट हुआ था। अभी ये कमियां चंद डिपो पर ही सामने आई हैं। क्योंकि अभी तक जिले में मात्र पांच हजार राशन कार्ड ही डिपो तक पहुंचे हैं। प्रिंटिंग प्रेस से पूरे जिले के राशन कार्ड मिक्स कर पैक कर भेज दिए गए। अब पिछले दो-तीन माह से कर्मचारी एक-एक कर उन्हें अलग-अलग करने में जुटे हैं।

एपीएल की कॉपी आई, डाटा प्रिंट नहीं किया गया

यमुनानगर जिले में 308249 राशन कार्ड हैं। इसमें एएवाई 9752, एसबीपीएल 18868, सीबीपीएल 33094, ओपीएच 83941 हैं। इन चार श्रेणी के राशन कार्ड धारकों को सरकार की तरफ से खाद्य सामग्री और अन्य लाभ दिए जाते हैं। अभी इन्हीं श्रेणी के राशन कार्ड बांटे जा रहे हैं। एपीएल राशन कार्ड 162594 है। एपीएल की कॉपी तो आ गई है, लेकिन कार्ड धारक की डिटेल उस पर प्रिंट नहीं है।


गलतियों को ठीक किया जा रहा है: डीएफएससी


साल 2016 के डाटा के अनुसार राशन कार्ड प्रिंट हुए हैंं। 2017 में राशन कार्ड को प्रिंट किया गया। कैपिटल बिजनेस सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड सिक्योरिटी प्रिंट यूनिट दिल्ली में इन्हें प्रिंट कराया। 2017 के अंत व वर्ष 2018 की शुरुआत में वहां से प्रिंट होकर कार्ड हर जिले में डीएफएससी आॅफिस पहुंच गए थे। 10 माह तक सरकार ने राशन कार्ड बांटने के आदेश नहीं दिए, पैकिंग में बंद रहे। कार्डधारकों से बीपीएल कार्ड के 10 रुपए, एपीएल के 20 और ओपीएच के 15 रुपए प्रिंट के लिए जा रहे हैं।

4 रोचक किस्से

3 गांव का बनाया एक डिपो

गांव इशरपुर के नाम से डिपो है। इस डिपो के अधीर इशरपुर, रामपुर माजरा और रतनपुरा गांव हैं। तीनों गांव के लोगों के राशन कार्ड पर उनके गांव का नाम इशरपुर लिख दिया गया। डिपो संचालक ने इस बारे में अधिकारियों को बताया तो अधिकारियों ने अभी राशन कार्ड न बांटने की हिदायत दी है।

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ढाई साल पहले मौत हो चुकी

इशरपुर के राजकुमार की ढाई साल पहले मौत हो गई। परिवार का बीपीएल राशन कार्ड है। नए कार्ड में भी राजकुमार का भी नाम प्रिंट होकर आया है। परिवार के लोग नाम कटवा चुके थे। अधिकारी कह रहे हैं कि कंप्यूटर से प्रिंट निकाल कर राशन कार्ड में लगाया जा रहा है। उनके पास कंप्यूटर में अपडेट डाटा है।

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नाम कटाया फिर बन गया कार्ड

कलानौर निवासी रीना की दो साल पहले शादी हो चुकी है। मायके वालों के राशन कार्ड से उनका नाम कट चुका है। जो नया राशन कार्ड आया है, उसमें नाम है। इस मामले में भी अधिकारियों का कहना है कि कंप्यूटर से अपडेट डाटा का प्रिंट आउट निकालकर नए राशन कार्ड में लगाया जा रहा है।

3

बेटा विदेश चला गया

गांव भुखड़ी का एक परिवार का बीपीएल कार्ड बना है। साल 2005 में जब कार्ड बना था, तब परिवार की हालत कमजोर थी। बच्चे बड़े होकर कमाने लगे। एक बेटा विदेश चला गया। अच्छे पैसे घर भेज रहा है। नए मकान बना लिए। परिवार का बीपीएल कार्ड है।

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