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निजी क्षेत्र में ढाई से 15 प्रतिशत अप्रेंटिस लगाना अनिवार्य

Rohtak News - हरियाणा कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह ने अप्रेंटिसशिप अधिनियम...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 08:50 AM IST
Rohtak News - haryana news applying two and a half to 15 percent apprentices in private sector is mandatory
हरियाणा कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह ने अप्रेंटिसशिप अधिनियम के अनुसार सरकारी व निजी दोनों क्षेत्रों में निर्धारित संख्या में अप्रेंटिसशिप नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं।

वे शुक्रवार को जिला विकास भवन में रोहतक मंडल के आईटीआई प्रिंसिपल, उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशकों और औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों की बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस भी उद्योग में कर्मचारियों की संख्या 30 या इससे अधिक है, उनमें कुल संख्या का ढाई से 15 प्रतिशत तक अप्रेंटिस लगाना अनिवार्य है। अगर कोई औद्योगिक इकाई इस नियम का उल्लंघन करती है तो अधिनियम के तहत उक्त इकाई पर जुर्माना लगाने का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि कौशल के माध्यम से रोजगार देना ही सरकार का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन औद्योगिक इकाइयों में अभी तक निर्धारित संख्या में अप्रेंटिसशिप नहीं लगाए गए हैं, उनमें इस कार्य को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। एसीएस देवेंद्र सिंह ने कहा कि हरियाणा प्रदेश में निजी क्षेत्रों में 15 हजार और सरकारी क्षेत्र में 10 हजार अप्रेंटिसशिप की संख्या बनती है। इस प्रकार हर समय दोनों क्षेत्रों में 25 हजार अप्रेंटिसशिप उपलब्ध रहने चाहिए।

कौशल के माध्यम से रोजगार देना ही सरकार का मुख्य उद्देश्य

बैठक लेते हरियाणा कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह।

आईटीआई एसेसमेंट डैश बोर्ड का प्रयोग जरूर करें

एसीएस देवेंद्र सिंह ने आईटीआई प्रिंसिपल से कहा कि वह नियमित रूप से आईटीआई एसेसमेंट डैश बोर्ड का प्रयोग अवश्य करें। ताकि उन्हें एक दूसरे की आईटीआई की स्थिति का पता चल सके कि किस ट्रेड में क्या चल रहा है। इसके साथ ही उन्होंने सभी प्रिंसिपल को वर्ष 2018 में पास आउट हुए सभी छात्र-छात्राओं का 30 सितंबर तक डाटा अपडेट करने के भी निर्देश दिए, ताकि यह पता चल सके कि पास आउट हुए छात्र-छात्राओं में से कितनों ने स्वरोजगार किया है, कितने बेरोजगार हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर भी जोर देते हुए कहा कि अच्छा प्रशिक्षण होगा तो जल्द प्लेसमेंट मिलेगी। एसीएस देवेंद्र सिंह ने कहा कि आईटीआई के क्षेत्र में काफी सुधार किए गए हैं और प्रयास है कि हरियाणा की आईटीआई व्यवस्था पूरे देश में नंबर एक पर हो। बैठक में रोहतक मंडल के आयुक्त पंकज यादव, उपायुक्त आर एस वर्मा, अतिरिक्त उपायुक्त अजय कुमार, सोनीपत, झज्जर, दादरी व भिवानी जिलों के एडीसी व एसडीएम, उपरोक्त जिलों के उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक, मॉडल आईटीआई रोहतक के प्राचार्य जयदीप कादयान उपस्थित रहे।

आईटीआई में भेजी मशीनों को डिब्बों में बंद न रखें, प्रयोग में लाएं

एसीएस ने आईटीआई प्रिंसिपलों को निर्देश दिए कि वे आईटीआई में जो मशीन व अन्य उपकरण भेजे जाते हैं, उनको प्रयोग में लाएं, उनको बंद मत रखें। जिन आईटीआई में मशीनें सरप्लस है, उन्हें दूसरी आईटीआई में भेजें। ताकि विद्यार्थी उन मशीनों पर काम सीख सकें। उन्होंने कहा कि मशीनों की कीमत का भुगतान दस दिन के भीतर किया जाए। अगर इस कार्य में देरी की जाती है तो आईटीआई का प्रिंसिपल जिम्मेदार होगा।

संस्थानों को स्टार रेटिंग भी दी जाएगी

एसीएस ने बताया कि प्रदेश के सभी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में ऑन ग्रिड सोलर पावर प्लांट लगाने की योजना पर भी तेजी से काम चल रहा है। अब तक 23 संस्थानों मे कार्य अंतिम चरण में है और शेष संस्थानों मे भी यह सिस्टम जल्द ही लगवा दिया जाएगा। इससे पावर कट की समस्या निजात मिलेगी। इसके अतिरिक्त औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर हरियाणा सरकार से इन संस्थानों को स्टार रेटिंग भी दी जा रही है। इससे औद्योगिक यूनिट भी अधिक स्टार वाले तकनीकी संस्थान के बच्चों को नौकरी देने में वरीयता देंगे। उन्होंने बताया कि हाल ही में हरियाणा सरकार ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों से शिक्षा ग्रहण कर चुके छात्रों को 12वीं के बराबर दर्जा देकर बड़ी सौगात दी है। इससे भी बच्चों का उच्च शिक्षा की ओर रूझान बढ़ेगा। वे कौशल विकास की ओर कदम बढ़ाएगें। ऐसा करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य है।

आईटीआई में डुअल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग लागू

कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के निदेशक प्रभजोत सिंह ने कहा कि आईटीआई में डुअल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग लागू किया है। इस सिस्टम के जरिए बच्चों को थ्योरी तो आईटीआई में पढ़ाई जाती है, उनका प्रेक्टिकल औद्योगिक इकाई में करवाया जाता है। इसका मकसद यही है कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले बच्चों को उसी या किसी अन्य उद्योग में प्लेसमेंट मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि महिला व नाबालिग अप्रेंटिसशिप को सुबह 9 से 5 बजे तक संस्थान पर रखा जा सकता है, जबकि पुरुष वयस्क को देर के समय में भी औद्योगिक इकाई पर रखा जा सकता है।

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