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सेना केे 4 संस्थान सेक्टर-4 में एक ही छत के नीचे बनेंगे

एक वर्ष पहले
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देश और प्रदेश को सबसे ज्यादा सैनिक देने वाली रोहतक की धरती के पूर्व सैनिक की मांग जल्द पूरी होने की उम्मीद जगी है। शहर में सेना के चार संस्थान अलग-अलग जगह पर किराए की इमारतों को पूर्व सैनिक एक छत के नीचे लाने की मांग कर रहे हैं। पूर्व सैनिकों के सभी सैनिक कल्याण संस्थान एक कॉम्प्लेक्स में लाने की मांग पर अब डीसी आरएस वर्मा ने संज्ञान लिया है। सैनिक स्टेशन हेड क्वार्टर रोहतक के एडम कमांडेंट कर्नल भास्कर गुप्ता ने डीसी आरएस वर्मा से मिलकर सैनिकों की इस लंबित मांग पर चर्चा की। इस पर डीसी आरएस वर्मा ने सकारात्मक कार्यवाही का संकेत देते हुए कर्नल भास्कर को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के कार्यालय में एस्टेट अफसर से मिलने को कहा। इस पर कर्नल भास्कर गुप्ता ने एस्टेट ऑफिसर हुडा से मुलाकात की।

जमीन की पैमाइश करने पहुंचे अधिकारी

2018 में पूर्व सैनिकों ने सीएम को भेजा था पत्र

सैनिक कल्याण संस्थानों के लिए पूर्व सैनिकों की मांग थी कि जिले के सभी सैनिक वेलफेयर संस्थानों के लिए प्रदेश सरकार कहीं भी जिला मुख्यालय रोहतक में 2 से 3 एकड़ जमीन अलॉट कर दें। जहां पूर्व सैनिकों को सेवा दे रही पूर्व सैनिक सीएसडी कैंटीन, जिला सैनिक बोर्ड, डीपीडीओ, ईसीएचएस और स्टेशन हेड क्वार्टर एक ही कॉम्प्लेक्स में बनाकर पूर्व सैनिकों को सेवाएं दें सकें। वर्तमान में ये सैनिक संस्थान 4 किलोमीटर के दायरे में शहर के अलग अलग स्थानों पर हैं। इस मांग के लिए पूर्व सैनिकों ने अक्टूबर 2018 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को एक मांग पत्र भेजा था। इसकी एक प्रतिलिपि सेना के विभिन्न संस्थानों के साथ-साथ डीसी को भी प्रेषित की गई थी।

पूर्व सैनिकों को होती है परेशानी: शहर में सेना के चार संस्थान अलग-अलग जगह पर किराए की इमारतों में होने के चलते पूर्व सैनिकों की शहर में चक्करघिन्नी बनी रहती है। यदि पूर्व सैनिकों या उनकी वीरांगनाओं को कैंटीन कार्ड बनवाना है तो इसका फार्म भरने के लिए सीएसडी कैंटीन में जाना पड़ता है और इसी फार्म पर वेरिफिकेशन करवाने के लिए साढ़े चार किमी दूर जिला सैनिक बोर्ड में जाना पड़ता है। यदि मामला पेचीदा हुआ तो सोनीपत रोड पर स्टेशन हेडक्वार्टर तक तीन किमी का सफर तय करना पड़ता है।

पूर्व सैनिकों का सपना भविष्य में साकार होगा

सेक्टर-4 में 2.12 एकड़ भूमि का एक प्लाट जो 2010 में एडब्ल्यूएचओ को अलाॅट किया था। अब वह प्लाट पूर्व सैनिकों के इन चारों संस्थानों के लिए जेई रामप्रसाद को साथ जाकर दिखाने के लिए कहा। जेई रामप्रसाद कर्नल भास्कर गुप्ता, कैप्टन जगबीर मलिक और सूबेदार मेजर जे. शर्मा को साइट पर ले गए। साइट भौगोलिक दृष्टि से इन संस्थानों के लिए उचित पाई गई। कर्नल भास्कर ने इस पर अपनी सहमति प्रकट की है। एडब्ल्यूएचओ अब इस जमीन को लेने का इच्छुक नहीं है तो ऐसे में अब पूर्व सैनिकों को उम्मीद है कि यह डिफेन्स भूमि पूर्व सैनिक संस्थानों के लिए मिल जाएगी और पूर्व सैनिकों के सभी सैनिक कल्याण संस्थान एक छत के नीचे लाने का पूर्व सैनिकों का सपना निकट भविष्य में साकार हो जाएगा।

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अक्टूबर 2018 को प्रकाशित खबर।

नक्शे की जांचते अधिकारी।
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