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कॅरियर बनाने की उम्र में मोबाइल-लेपटॉप की लत युवाओं को रातभर सोने नहीं दे रही

एक वर्ष पहले
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बदलते दौर में मोबाइल और कम्प्यूटर बच्चों, युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक के जीवन में ऐसे जुड़ गए हैं वे चाह कर भी खुद काे इससे दूर नहीं कर पा रहे हैं। रिश्तेदारों-दोस्तों से कनेक्ट होने के नाम पर स्मार्ट फोन तो सबको चाहिए, पर हाथ में फोन आते ही इसकी जरूरतें भी बदल जाती है। मोबाइल एप, गेम, सोशल साइट ने बचपन ही नहीं, अपनापन भी छीन लिया है। बच्चे हो या बड़े, सभी वीडियो बनाने और फॉलोवर्स की गिनती करने में ही बिजी है। हालात यह है कि कॅरियर बनाने की उम्र में मोबाइल-लेपटॉप की लत उन्हें रातभर सोने ही नहीं दे रही है। ऐसे केस इन दिनों काउंसिलिंग के लिए आ रहे हैं बच्चों की बात-फोन के साथ पर। हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद ने डिविजन स्तर पर बच्चों को मनोवैज्ञानिक परामर्श सेवाएं देने के लिए एक पहल शुरू की। पूरे प्रदेश में यह पहल रोहतक डिविजन में आने वाले जिले भिवानी, चरखीदादरी, सोनीपत, झज्जर में शुरू की गई। इसमें काउंसिलिंग लेने के लिए बच्चे ही नहीं युवा और अभिभावक भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अभिभावकों की परेशानी है कि बोर्ड एग्जाम सिर पर है, लेकिन मोबाइल-लेपटॉप की लत उनके बच्चों को रात भर सोने नहीं दे रही है। उनकी परफॉरमेंस को लेकर वह भी 24 घंटे चिंता में रहते हैं। वहीं शादी ना होने से युवा डिप्रेशन का शिकार है और रोज नींद की गोली ले रहा है।

डरी रहती है बेटी, आत्मविश्वास से नहीं करती कोई कामडिप्रेशन के चलते नींद की ले रहे गोली

रोहतक से एक मां की समस्या थी कि उनकी बेटी डरी हुई रहती है। वह आत्मविश्वास से कोई काम नहीं करती है। अभी फाइनल पेपर चल रहे हैं, पर वह तैयारी होते हुए भी अपना सर्वश्रेष्ठ आउटपुट नहीं दे पा रही है। इस बात से वह काफी परेशान है, क्योंकि उसे जिंदगी में आगे बहुत कुछ करना है। यही समस्या भिवानी से एक छात्र की भी रही। उसने बताया कि बोर्ड परीक्षाएं है और वह सारी रात किताबों के साथ ना होकर मोबाइल-लेपटॉप पर ही लगा रहता है। वह इस लत से छुटकारा चाहता है।

33 साल का हूं पर शादी नहीं हुई है, जॉब भी करते है,डिप्रेशन के चलते नींद की ले रहे गोली

रोहतक से ही एक 33 साल के युवा ने खुद की स्थिति से बाहर आने के लिए हेल्प मांगी। उन्हाेंने बताया कि 33 साल के हैं, पर अभी शादी नहीं हुई है। जॉब भी करते हैं, लेकिन नींद ना आने से बहुत परेशान है। अभी इतने डिप्रेशन में है कि सोने के लिए गोली खा रहे हैं। हालांकि एक महीने से गोली नहीं ली है, लेकिन बार-बार मन उसी की तरफ जाता है।

इस हेल्पलाइन पर करें कॉल

बच्चों की बात-फोन के साथ में फ्री काउंसिलिंग के लिए इस हेल्पलाइन नंबर पर महीने के हर दूसरे और चौथे बुधवार को कॉल करें। इसके लिए 8278228020 नंबर है।

घर में संवाद होना आज की है आवश्यकता

अभी रोहतक डिविजन स्तर पर बच्चों की बात-फोन के साथ शुरू की है। महीने की हर दूसरे-चौथे बुधवार को एक घंटे की काउंसिलिंग करते हैं। इसके लिए समय दोपहर 3 से 4 बजे तक हैं। अभी अलग-अलग जिलों से चार केस आए हैं और सबकी समस्या भी अलग है। समाधान एक ही है कि परिवार के सदस्य घर में संवाद जरूर करें, यह आज की आवश्यकता भी है। मोबाइल होना ठीक है, पर इसकी जरूरत की सीमा तय करें। खुद भी नियम फोलो करेंगे तो बच्चे भी करेंगे।
- अनिल मलिक, रोहतक डिविजन के बाल कल्याण अधिकारी एवं स्टेट नोडल ऑफिसर।
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