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कोरोनावायरस से वैश्विक अर्थव्यवस्था को 147 लाख करोड़ रु. के नुकसान की आशंका, ग्रोथ रेट 2.5% से नीचे

एक वर्ष पहले
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इस संकट से सबसे बुरी तरह तेल और कमोडिटी का आयात करने वाले देश प्रभावित होंगे

दुनिया के सौ से ज्यादा देशों में फैल चुका कोरोनावायरस चीन के साथ साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी रोग बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र की ट्रेड एंड डेवलेपमेंट एजेंसी ने कहा है कि कोरोनावायरस से वैश्विक अर्थव्यवस्था को 2 लाख करोड़ डॉलर (148 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान होने की आंशका है। दुनिया के कई देश इसकी वजह से मंदी में जा सकते है। साथ ही वैश्विक सालाना विकास दर के 2.5 फीसदी से नीचे आने का अनुमान है।

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने कहा कि कोरोना वायरस से फैली महामारी के दुखद मानवीय परिणामों के अलावा इससे आर्थिक अनिश्चितता भी फैल गई है। हमारा अनुमान है कि ग्लोबल इकोनॉमी इस साल आर्थिक सुस्ती में रहेगी और आर्थिक विकास दर 2 फीसदी से नीचे आ सकती है। इस मानवीय त्रासदी से इस साल हजारों लोगों की मौत के साथ साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था को 1 लाख करोड़ डॉलर का नुकसान होगा। एक प्रारंभिक अनुमान के आधार पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को चीन सहित कुल 2 लाख करोड़ का नुकसान होने की आशंका है। इसमें सबसे बुरी तरह प्रभावित तेल आयातक और कमोडिटी आयातक देश होंगे। इन देशों की विकास दर लगभग 1 फीसदी तक कम होगी। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ल्ड इकोनॉमी के लिए यह तबाही का दौर साबित हो रहा है। अर्थव्यवस्था 0.5 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ रही है। ग्लोबल सप्लाई चेन टूटने से पहले ही खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को गिरते कच्चे तेल की कीमतों ने दोहरे संकट में फंसा दिया है। मुश्किलों से गुजर रहा इंटरनेशनल फाइनेंशियल मार्केट कोरोना से कितना और प्रभावित होगा, यह बताना मुश्किल है। विशेषज्ञों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संकट से बाहर निकलने में अकेले सेंट्रल बैंक सक्षम नहीं हैं। इसके लिए आक्रामक वित्तीय खर्च के साथ उचित मैक्रो-इकोनॉमिक पॉलिसी बनानी होगी।

भारत को अब तक व्यापार में 25000 करोड़ रु. का नुकसान

एजेंसी ने कहा कि कोरोनावायरस का भारत की अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। भारत को व्यापार में अब तक लगभग 25.70 हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है। चीन में मैन्युफैक्चरिंग के स्लोडाउन से सबसे ज्यादा प्रभावित 15 देशों में भारत शामिल है। चीन में मैन्युफैक्चरिंग स्लोडाउन से वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है। इस वजह से अब तक पूरी दुनिया में 3.70 लाख करोड़ रुपए (50 बिलियन डॉलर) का निर्यात घट गया है।

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