हुड्डा व जाटों काे साधकर रखने के लिए दीपेंद्र काे मिला टिकट
राज्यसभा चुनाव के बाद राेहतक का दिल्ली में हिस्सा बढ़ने वाला है। भाजपा ने जहां महम के रामचंद्र जांगड़ा काे उम्मीदवार बनाया है, वहीं कांग्रेस ने पूर्व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा काे मैदान में उतारा है। इनका राज्यसभा में जाना लगभग तय माना जा रहा है। इस तरह राेहतक से तीन सांसद अब जनता की अावाज उठा सकेंगे। लाेकसभा चुनाव में हार का सामना कर चुके दीपेंद्र सिंह हुड्डा की राज्यसभा के जरिये चाैधर बरकरार रखने में उनके पिता व पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सफल रहे। रोहतक व झज्जर की 8 विधानसभा में से 7 सीटें जरूर कांग्रेस जीती थी, लेकिन दीपेंद्र की हार का मलाल था। वहीं, राेहतक, साेनीपत व झज्जर के अलावा पूरे प्रदेश के जाट वाेट बैंक पर भी कांग्रेस की निगाह है। इस वजह से हुड्डा के साथ-साथ जाटाें काे साधकर रखने के लिए दीपेंद्र का कार्ड खेला गया है। विधानसभा चुनाव में 31 सीट जीतकर हुड्डा पहले ही अपना प्रभाव कांग्रेस अालाकमान काे दिखा चुके हैं। एेसे में देश-प्रदेश के माैजूदा घटनाक्रम काे देखते हुए कांग्रेस हुड्डा की नाराजगी माेल नहीं लेना चाहती थी। हालांकि भविष्य में यह देखना राेचक हाेगा कि दीपेंद्र लाेकसभा या विधानसभा में से किसके लिए राज्यसभा की सीट छाेड़ेंगे।
बाबा बालकनाथ व सुमेधानंद भी हैं सांसद: प्रदेश की राजनीतिक राजधानी अब सांसदों का गढ़ बनने जा रही है। अभी तक रोहतक की जड़ों से जुड़े सांसदों में भाजपा के डॉ. अरविंद शर्मा रोहतक लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। बाबा मस्तनाथ मठ के महंत बाबा बालकनाथ अलवर से सांसद हैं। इससे पूर्व बाबा चांदनाथ अलवर से सांसद थे, उनके निधन के बाद बाबा बालकनाथ लाेकसभा सांसद बने। वहीं मूलरूप से बालंद के दयानंद बड़क जोकि अाजकल सरस्वती सुमेधानंद के नाम से प्रचलित हैं और भाजपा की टिकट से सीकर लोकसभा से सांसद हैं।
तीन बार सांसद रह चुके हैं दीपेंद्र: कांग्रेस से प्रत्याशी दीपेंद्र हुड्डा फिलहाल तीन बार यानी 2005, 2009 व 2014 में लगातार सांसद बनते आ रहे थे। भाजपा से उम्मीदवार बनकर आए डॉ. अरविंद शर्मा ने इस विजय रथ को 2019 में रोक दिया। इससे पहले 1952 और 57 में इनके दादा रणबीर सिंह हुड्डा सांसद रहे। चार बार पिता भूपेंद्र हुड्डा भी सांसद बने।
45 साल में चार बार चुनाव मैदान में उतरे जांगड़ा, कभी जीत नहीं पाए: हरियाणा से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाए गए रामचन्द्र जांगड़ा 45 साल से राजनीति क्षेत्र में हैं। इस दौरान उन्होंने एक लोकसभा व चार विधानसभा के चुनाव लड़े, लेकिन किसी भी चुनाव में जीत दर्ज नहीं कर पाए। रामचन्द्र जांगड़ा ने 1975 में पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के सानिध्य में राजनैतिक कॅरियर शुरू किया था। 1975 से 1987 तक वे लोकदल पार्टी में बैकवर्ड सेल के प्रधान रहे। 1987 में उन्हें लोकदल पार्टी ने सफीदों विधानसभा से टिकट दी। हार के तीन साल बाद 1990 में पूर्व सीएम बंसीलाल के नेतृत्व में हविपा में शामिल हो गए। 1991 में हविपा नेे महम विधानसभा व 2004 में करनाल लोकसभा सीट से चुनाव में उतारा। 2004 में हविपा के कांग्रेस में विलय पर जांगड़ा बीजेपी में आए। 2014 में गोहाना से बीजेपी टिकट पर चुनाव लड़ा। लेकिन 2019 में टिकट नहीं मिला।
अब राेहतक से 3 सांसद उठा सकते हैं दिल्ली में जनता की अावाज, राेहतक के 2 गुरु भी हैं सांसद