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साेशल मीडिया की लत बढ़ा रही प्रेग्नेंसी में दिक्कत, उड़ रही नींद

एक वर्ष पहले
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व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर जैसे अन्य कई सोशल मीडिया प्लेटफार्म की वजह से गर्भवती महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सिविल अस्पताल और पीजीआई के गायनी विभाग में आने वाली 22 से 30 साल तक की उम्र की औसतन 60 फीसदी गर्भवती महिलाएं नींद पूरी न होने, भूख न लगने, चिड़चिड़ापन आने सहित अन्य कई समस्याएं गिना रही हैं। महिला चिकित्सकों की ओर से गर्भवती की काउंसिलिंग के दौरान उनसे रूटीन शेड्यूल के बारे में ब्योरा जुटाया गया तो इनमें से 40 फीसदी से ज्यादा महिलाओं ने दोपहर और रात में सोने के समय के दौरान पांच से छह घंटे मोबाइल पर सोशल मीडिया पर बिताने की बात कही। इस वजह से ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर का समय तक ध्यान न रहने की बात स्वीकारी। ज्यादा समय मोबाइल पर बिताने की वजह से उनकी फिजिकल एक्टिविटी कम हो रही हैं।

वहीं, सरवाइकल पेन से भी जूझना पड़ रहा है। महिला चिकित्सक गर्भवती को सलाह दे रही हैं कि वो सोशल मीडिया का मोह छोड़कर सुबह और शाम की सैर, भोजन में पौष्टिक आहार और नाश्ते में फलों का सेवन करें।

चिकित्सकों की सलाह

}जरूरी होने पर मोबाइल पर समय दें।

}गर्भ धारण के छह माह तक फोलिक एसिड गोलियों का सेवन करें। }बंद डिब्बे का जूस व पेय पदार्थ लेने से बचें।

}गर्भ धारण के बाद चिकित्सकों से नियमित चेकअप कराएं।

ये हो रहे नुकसान

}भूख कम लगना।

}नींद पूरी न होना।

}चिड़चिड़ापन बढ़ना।

}गर्भ में पल रहे बच्चे पर रेडिएशन का खतरा।

}पर्याप्त डाइट न लेने से शरीर में खून की कमी होना।

पीजीआई के गायनी विभाग की ओपीडी में आने वाली प्रेग्नेंट महिलाएं नींद पूरी न होना, भूख न लगना और चिड़चिड़ापन रहने की समस्या गिनाती हैं। जब उनकी काउंसिलिंग की गई तो उन्होंने दिनचर्या में अधिकतर समय पर सोशल मीडिया पर व्यस्त रहने की बात कही।
-डॉ. स्मिति नंदा, एचओडी, गायनी डिपार्टमेंट, पीजीआई, रोहतक।

40% महिलाएं मोबाइल एडिक्शन की जद में, व्यायाम और सैर पर ध्यान दे रहीं कम **

22-30 साल की गर्भवती महिलाओं में मोबाइल की लत ज्यादा**

सिविल अस्पताल और पीजीआई में रोजाना 300 गर्भवती की होती है ओपीडी

शरीर को पौष्टिक, हेल्दी फूड नहीं मिल पा रहा : सिविल अस्पताल में औसतन 300 और पीजीआई के गायनी विभाग में रोजाना औसतन 400 के करीब गर्भवती महिलाओं की ओपीडी होती है। महिलाओं की समय-समय पर हीमोग्लोबिन की जांच कराई जाती है। इनमें से अधिकांश महिलाओं में आठ से नौ ग्राम तक खून की मात्रा मिल रही है। चिकित्सक बताती हैं कि काउंसिलिंग के दौरान पाया गया कि शहरी क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं ने जंक फूड और रेस्टारेंट के खाने को तरजीह दी है। इस वजह से शरीर को पौष्टिक और हेल्दी फूड नहीं मिल पा रहे।

सिविल अस्पताल में महिलाअाें की जांच करती हुई डाॅक्टर।
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