किसान बंजर जमीन पर झींगा पालन कर कमा सकते हैं 12 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर

Rohtak News - अगर तकनीकी ज्ञान से खारे पानी की भूमि पर सफेद झींगा पालन किया जाए तो बेरोजगार युवक इस कार्य से अच्छी आय प्राप्त कर...

Jan 16, 2020, 08:40 AM IST
अगर तकनीकी ज्ञान से खारे पानी की भूमि पर सफेद झींगा पालन किया जाए तो बेरोजगार युवक इस कार्य से अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। हरियाणा राज्य में लगभग 20 हजार एकड़ भूमि खारे पानी से ग्रस्त है, इसका उपयोग सफेद झींगा पालन के लिए किया जा सकता है। सफेद झींगा पालन के लिए तालाब निर्माण, ट्यूबवेल, एलीगेटर, जनरेटर, जाल, पीवीसी पाइप, डीजल इंजन व बिजली के उपकरण आदि खरीदने पर करीब ढाई लाख प्रति हेक्टेयर या 10 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से खर्च आता है। इस खर्च का वहन किसान स्वयं या बैंक की ओर से ऋण प्राप्त करके कर सकता है। हरियाणा सरकार की ओर से मत्स्य विभाग के माध्यम से 12.5 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर या 5 लाख प्रति एकड़ की दर से अनुदान प्रदान किया जाता है। इस प्रकार किसान खारे भूजल व लवणीय भूमि का सदुपयोग करते हुए 12 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष या करीब 5 लाख प्रति एकड़ प्रतिवर्ष कमाई कर सकता है।

डीसी आरएस वर्मा ने बताया कि बेकार लवणीय जमीन को सफेद झींगा पालन लंबी अवधि के लिए बेरोजगार युवक को पट्टे पर दे सकता है जो कि इस बेकार पड़ी जमीन किसान के लिए अतिरिक्त आय का साधन बन जाती है और एक रोजगार सर्जन हो जाता है। लवणीय (क्षारीय) मृदा और लवणीय भूजल होने की वजह से इन जमीनों पर खेती नहीं हो पाती है, लेकिन अब इन बंजर जमीनों पर किसान समुद्री सफेद झींगा पालन करके लाभ कमा सकते हैं। देश के अलावा अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में झींगा की मांग बहुत ज्यादा है।

चीन के बाद दूसरे नंबर पर भारत : केंद्रीय कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, मछली उत्पादन में भारत, विश्व में चीन के बाद लगातार दूसरे नंबर पर बना हुआ है। देश में मात्स्यिकी एक बड़ा सेक्टर है और लगभग 150 लाख लोग मत्स्य व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। झींगा मछली में भारत विश्व में प्रथम स्थान रखता है और यह झींगा का सबसे बड़ा निर्यातक है। भारत जल कृषि से मछली उत्पादन करने वाला दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। वैश्विक जल कृषि उत्पादन में यह लगभग 6.3 प्रतिशत का योगदान करता है।

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