पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Haryana
  • Rohtak
  • Sampla News Haryana News Farmers39 Trend Towards Cultivation Of Button Mushroom At Control Temperature In Off Season

ऑफ सीजन में कंट्रोल तापमान पर बटन मशरूम की खेती की तरफ किसानों का बढ़ा रुझान

2 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
प्रवीन दत्तौड़ | सांपला (रोहतक)

परमपरागत मशरूम की खेती करने के बजाए अब किसान आधुनिक तरीके से कंट्रोल तापमान (एयर कंडीशन रूम ) पर ऑफ सीजन में मशरूम की खेती कर मालामाल हो रहे है। एक अनुमान के तौर पर प्रदेश में करीब सवा दो सौ किसान इस तकनीक से खेती कर रहे है। हालांकि यह शुरूआत में मंहगा प्रोजेक्टस किसानों को दिखाई देता है। लेकिन सरकार की तरफ से भी कंट्रोल तापमान पर खेती करने वाले किसानों को एकीकृत मिशन के तहत बढ़ावा देने के लिए अनुदान दिया जा रहा है। हालांकि अनुदान प्रति यूनिट नियमानुसार 8 लाख रूपए तक ही दिया जा रहा है,जबकि यूनिट लगाने का खर्च करीब 16 से 20 लाख रूपए तक आता है। इसके लिए बैंक से लोन भी आसानी से मिल जाता है। ऑफ सीजन में मशरूम उगाने वाले किसान अपनी फसल को भी ओपन मार्किट की अपेक्षा होटलों या इस प्रकार का काम करने वालों के साथ एग्रीमेंट कर बेच रहे है। जिससे मार्किट में होने वाले रेट के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता । जिस कारण किसान को लगातार लाभ मिलता रहता है।

मशरूम कल्टीवेशन को 3 यूनिटों में बांटा गया

सरकार की तरफ से मशरूम कल्टीवेशन को 3 यूनिटों में बांटा गया है। एकीकृत मिशन के तहत प्रत्येक यूनिट पर सरकार की तरफ से लागत मुल्य का अधिकतम 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। जो नियमानुसार 8 लाख रूपए तक ही होता है। ये यूनिट स्पान मैकिंग यूनिट,कंपोस्ट मैकिंग यूनिट व मशरूम प्रोडक्शन यूनिट हैं। किसान अपनी इच्छानुसार कोई भी एक ,दो या तीनों यूनिट लगा सरकार से अनुदान ले सकता है। अनुदान सरकार द्वारा सीधे बैंक खाते में दिया जा रहा है।

मशरूम की खेती पर सरकार दे रही लागत मूल्य का 50% तक अनुदान

सरकार दे रही अनुदान : बागवानी विभाग के डा.राकेश कुमार का कहना है कि सरकार कंट्रोल तापमान (एयर कंडीशन रूम ) पर मशरूम कल्टीवेशन को बढ़ावा देने की दिशा में काफी काम कर रही है। एकीकृत मिशन के तहत प्रति यूनिट लागत मुल्य का 50 प्रतिशत या 8 लाख रूपए तक का अनुदान दिया जा रहा है। प्रदेश में कंट्रोल तापमान पर मशरूम की खेती करने वाले किसानों की लगातार तादात बढ़ रही है। हालांकि आज भी बड़े भाग पर परमपरागत मशरूम की खेती करने वाले किसानों की संख्या ज्यादा है।

11 साल से कर रहा मशरूम की खेती, नहीं हुआ नुकसान

पिछले 11 साल से मशरूम की खेती करने वाले गुड़ग्राम के खेडक़ी ढोला निवासी कूदेराम ने बताया कि वह साल 2008 से मशरूम की कंट्रोल तापमान (एयर कंडीशन रूम) पर खेती कर रहा है। लेकिन कभी कोई नुकसान नहीं हुआ। पूसा से 30 दिनों की ट्रैनिंग लेने के बाद उसने बैंक से लोन लेकर काम शुरू किया। अब उसका कई होटलों के साथ 6-6 माह के लिए अग्रीमेंट हो चूका है। जिससे मशरूम के रेट कम-ज्यादा होने पर उसको कोई फर्क नहीं होता। हर सीजन में 140 रूपए प्रति किलोग्राम के भाव से उसकी मशरूम आसानी से बिक रही है। एक 30 बाइ 50 के कंट्रोल तापमान रूम 6 बाइ 4 के 30 बैड बनाए जाते है। प्रत्येक बैड से 20 किलोग्राम तक मशरूम का उत्पादन मिलता है। जो हर तीसरे दिन प्राप्त होता है। रूम का तापमान 14 से 16 डिग्री तक मेनटेंन रखा जाता है। ताकि उत्पादन लगातार अच्छा बना रहे। बिजाई के 28 से 30 दिनों बाद फसल उत्पान शुरू हो जाता है जो 40 दिनों तक जारी रहता है। वहीं कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया भी 28 से 30 दिनों के बीच की है। सरकार की तरफ से अनुदान प्राप्त करने के लिए जो रूम वर्तमान में 20 बाइ 40 साइज के है।

खबरें और भी हैं...