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जैविक खेती में रासायनिक से अधिक पैदावार

एक वर्ष पहले
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मूवमेंट फॉर सोशियो-इकॉनोमिक चेंज (एम-सेक) और लोकहित संस्था की ओर से प्रदेश स्तरीय किसान सह कवि गोष्ठी की गई। इसमें कृषि क्षेत्र की दशा पर चर्चा के साथ काव्य पाठ भी हुआ। कार्यक्रम में कृषि, सिंचाई व मार्केटिंग की चुनौतियां, क्या कृषि को लाभकारी और जैविक खेती को टिकाऊ बनाना संभव है और आधुनिक कृषि में महिलाओं की भूमिका और कृषि क्षेत्र में रोजगार की स्थिति पर खुली चर्चा हुई। दिनभर चले इस कार्यक्रम में प्रदेश भर से 100 से अधिक प्रगतिशील किसान, कवि और कृषि वैज्ञानिक व विशेषज्ञ शामिल हुए। अपने अध्यक्षीय भाषण में अर्थशास्त्री प्रो. राजिंदर चौधरी ने कहा कि जैविक खेती को लेकर गलतफहमी दूर होनी चाहिए कि यह समूची आबादी का पेट नहीं भर सकती। कृषि विज्ञान केंद्र रोहतक के कृषि वैज्ञानिक डाॅ. नरेश सांगवान ने कहा कि भारतीय एग्री साइंटिस्टों ने अन्य देशों के मुकाबले अच्छा काम किया है।

कार्यक्रम के दौरान पानीपत से प्रगतिशील किसान बिजेंदर, दादरी से ओमपाल, करनाल से सुखबीर, गुरुग्राम से सुमित व अरुण गुलिया, रोहतक से किसान व कृषि अर्थशास्त्री महिंदर मलिक, हिसार से जैविक किसान सुदर्शन कंवारी, पूर्व प्रिंसिपल डा. वेद प्रकाश श्योराण, डा. संतोष मुदगिल व डाॅ. कृष्णा चौधरी, कृषि वैज्ञानिक महावीर नरवाल आदि ने सारगर्भित विचार रखे। कवियों में आगरा से रामस्वरूप दिनकर, रोहतक से विजय विभोर, राजपाल रंगा, अर्चना कोचर, सुनीता बहल, जींद से शकुंतला ने कविता पाठ किया और अपनी कविताओं के माध्यम से किसानों के दुखदर्द बयां किए। कार्यक्रम का संचालन चंचल नांदल व धन्यवाद ज्ञापन प्रदीप हुड्डा ने दिया।

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