राजनीति / इनेलो को फिर झटका, गोपीचंद गहलोत को सीएम मनोहर लाल ने करवाया भाजपा में शामिल



सीएम मनोहर लाल खट्टर के साथ मौजूद गोपीचंद गहलोत। सीएम मनोहर लाल खट्टर के साथ मौजूद गोपीचंद गहलोत।
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सीएम मनोहर लाल खट्टर के साथ मौजूद गोपीचंद गहलोत।सीएम मनोहर लाल खट्टर के साथ मौजूद गोपीचंद गहलोत।

  • गुरुग्राम के पीडब्लूडी रेस्ट हाउस में आयोजित कार्यक्रम में हुए शामिल

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2019, 03:18 PM IST

गुरुग्राम। हरियाणा में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, इंडियन नेशनल लोकदल को लगातार झटके लग रहे हैं। उनके बड़े नेता पार्टी से किनारा कर रहे हैं। शनिवार को पूर्व डिप्टी स्पीकर व इनेलो नेता गोपीचंद गहलोत भाजपा में शामिल हो गए। उन्हें सीएम मनोहर लाल खट्टर ने गुरुग्राम के पीडब्लूडी गेस्ट हाउस में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पार्टी में शामिल करवाया। बता दें कि गहलोत पहले भी भाजपा में रह चुके हैं। 

11 साल तक भाजपा में रह चुके हैं गोपीचंद

  1. गोपीचंद पहले भी 11 साल तक भाजपा में रह चुके हैं। उन्होंने 1991 में गुरुग्राम विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। वे यह चुनाव जीत नहीं पाए थे। 2000 में विधानसभा चुनाव में से एक बार फिर से निर्दलीय लड़े और विधायक बने। इसके बाद ओमप्रकाश चौटाला से नजदीकी के चलते वे इनेलो में शामिल हो गए थे।   

  2. बीते दिनों में कई विधायक हो चुके हैं इनेलो से भाजपा में शामिल

    बीती जून महीने में इनेलो के नूंह से विधायक जाकिर हुसैन और जींद के जुलाना से विधायक परमिंदर सिंह ढुल भाजपा में शामिल हुए थे। रोहतक के जिलाध्यक्ष व राष्ट्रीय प्रवक्ता सतीश नांदल भी भाजपा में शामिल हुए थे। सितंबर में पार्टी के तत्कालीन सांसद दुष्यंत चौटाला और उनके भाई दिग्विजय चौटाला को निष्कासित किए जाने के बाद उन्होंने अपनी नई जननायक जनता पार्टी बनाई। इसके बाद हुए नगर निगम मेयर चुनाव हो या फिर जींद उपचुनाव और लोकसभा चुनाव, सभी में इनेलो कमजोर साबित हुई और लोकसभा में उसका एक भी प्रत्याशी जमानत तक नहीं बचा पाया। ऐसे में उसके विधायकों का मोहभंग होना शुरू हो गया।  

  3. 2014 में जीती थी 19 सीटें

    2014 में हुए विधानसभा चुनाव में इनेलो 19 सीटें जीतकर हरियाणा विधानसभा में पहुंची थी। अभय चौटाला नेता प्रतिपक्ष बने थे। 2019 में इनेलो के जींद से विधायक हरिचंद मिड्ढा और पिहोवा जसविंद्र संधू की मौत हो गई। इसके बाद चौटाला परिवार में विवाद शुरू हो गया। दुष्यंत, दिग्विजय, अजय चौटाला को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।

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