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पीजीआई के 2 ओटी में एक साथ हो सकेंगे किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन

एक वर्ष पहले
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प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआई में जल्द शुरू होने वाले न्यू ओटी कम आईसीयू कॉम्पलेक्स के दो आपरेशन थिएटर में किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट की प्रक्रिया सुविधा न्यूनतम रेट पर शुरू किए जाने पर मंथन चल रहा है। प्राइवेट अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट कराने में 2 से 7 लाख रुपए तक खर्च आता है। इसके लिए हरियाणा स्वास्थ्य विभाग व पीजीआई के चिकित्सकों की 75 सदस्यीय टीम गठित की गई है। जो पेशेंट को ब्रेन डेड घोषित करते हुए सर्टिफिकेट जारी करेगी। क्योंकि मरीज का ब्रेन डेड होने की स्थिति में शरीर के बाकी अंग जीवित रहते हैं, ऐसे में ज़रुरतमंद मरीज को ब्रेन डेड पेशेंट की किडनी प्रत्यारोपित की जा सकती है। जब किडनी फैलियर अंतिम चरण पर पहुंच जाता है, तो उसे केवल डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट द्वारा ही नियंत्रित किया जा सकता है। डायलिसिस सप्ताह में एक बार किया जा सकता है या इससे अधिक बार भी। यह स्थितियों पर निर्भर करता है। प्रत्यारोपण में बीमार किडनी को स्वस्थ किडनी से बदल दिया जाता है। वर्तमान समय में पीजीआई के चार चिकित्सकों को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए ट्रेनिंग दिलाई जा चुकी है। हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. ओपी कालरा ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों को चंडीगढ़, गुरु ग्राम व दिल्ली के लिए चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

पीजीआई में हर साल आठ हजार किडनी रोगी इलाज को आ रहे

पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग के चिकित्सकों का दावा है कि विभाग व ओपीडी में हर साल आठ हजार किडनी रोगी सामने आ रहे हैं। जिन्हें पीजीआई में इलाज उपलब्ध कराया जाता है। विभाग में रोजाना साढ़े तीन सौ के करीब ज़रुरतमंद किडनी रोगियों को डायलिसिस की सुविधा दी जाती है। चिकित्सक बताते हैं कि लोगों में बहुत कम या ज्यादा पानी पीना, दोनों ही आदतें किडनी पर दबाव डालती हैं। बहुत कम पानी पीने से विषैले तत्व शरीर में जमा होने लगते हैं, जो कई रोगों का कारण बन सकते हैं। अचानक बहुत ज्यादा पानी पीना भी किडनी पर दबाव बढ़ाता है। शरीर की जरूरत के अनुसार एक दिन में डेढ़ से दो लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। अधिक दवाओं का सेवन किडनी पर बुरा असर डालता है।

18 से 55 की उम्र का कोई भी स्वस्थ शख्स दे सकता है किडनी

हेल्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति व सीनियर नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. ओपी कालरा ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट एक ऐसी सर्जरी है, जिसमें क्रोनिक किडनी फेल्योर के मरीज को अलग से एक स्वस्थ किडनी लगा दी जाती है। इससे व्यक्ति को डायलिसिस पर रखने की जरूरत नहीं पड़ती। स्वस्थ किडनी या तो एक जीवित व्यक्ति दे सकता है या फिर डॉक्टरों की ओर से घोषित किया हुआ एक ब्रेन डेड व्यक्ति। कोई भी स्वस्थ व्यक्ति, जिसका ब्लड ग्रुप मरीज से मिलता हो, जो 18 से 55 की उम्र के बीच का हो, वह अपनी किडनी दान दे सकता है। नियमों के अनुसार किडनी दान देने वाला व्यक्ति परिवार का सदस्य होना चाहिए या कोई रिश्तेदार।

टीम गठित, जल्द यूनिट शुरू होते ही मिलेगी सुविधा

प्रदेश स्तर पर 75 चिकित्सकों की टीम गठित हो चुकी है, जिसमें पीजीआई के डॉक्टर भी शामिल हैं। ये टीम पेशेंट को ब्रेन डेड घोषित करते हुए शरीर के बाकी अंगों की जांच कर उनके क्रियाशील होने का सर्टिफिकेट जारी करेगी। इसके बाद ही ज़रुरतमंद मरीज में किडनी ट्रांसप्लांट किया जाएगा। जल्द ही न्यू ओटी कम आईसीयू कॉम्पलेक्स का संचालन शुरू होने के बाद दो आपरेशन थिएटर में किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट शुरू कर दी जाएगी। चार चिकित्सकों को ट्रेनिंग दिलाई जा चुकी है।
-डॉ. गजेंद्र सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, पीजीआई, रोहतक।

किडनी रोग के ये हैं लक्षण

अधिकतर लोगों में गुर्दों के रोगों के गंभीर लक्षण दिखाई नहीं देते, जब तक उनका रोग एडवांस स्टेज तक नहीं पहुंच जाता। गुर्दों के रोगों के सामान्य लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं जैसे व्यक्ति अधिक थका हुआ और कम ऊर्जावान महसूस करे, ध्यानकेंद्रन में समस्या आना, भूख कम लगना, नींद न आना, मांसपेशियों में खिंचाव व ऐंठन, पैर और टखने फूल जाना, सूखी और खुजली वाली त्वचा, रात में बार-बार पेशाब आना, छाती में दर्द होना।

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