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दुख-सुख में समानता के भाव में माेक्ष सा अानंद : अाचार्य मैत्रेय

एक वर्ष पहले
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आचार्य मैत्रेय ने कहा कि व्यक्ति को दुख और सुख में समानता का भाव रखना चाहिए। क्योंकि सुख का अहसास देने वाली चीजें ही आगे चलकर दुख का कारण बनती हैं। वे महाशय धर्मचंद गांधी आर्य समाज मानसरोवर कॉलोनी में रविवार को अायोजित कार्यक्रम में उपस्थित आर्यजनों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भौतिक व आध्यात्मिक जीवन में सफलता के लिए तप जरूरी है। यदि तप साध लिया जाए तो व्यक्ति सुखों की खान का अधिकारी बन जाता है। जो सुख बांटने में मिलता है उसकी अनुभूति कुबेर का खजाना भोगने में नहीं मिलता है। शहर विधायक बीबी बतरा अपनी प|ी नीलम बतरा सहित यजमान रहे। इस अवसर पर सरपरस्त नंदलाल गांधी, प्रधान सुरेश मित्तल, हर्ष नांगिया, दिनेश नरूला, अशोक आर्या, सुरेश गांधी, यशपाल भाटिया, गुलशन शाहा, राजेंद्र नासा, ओमप्रकाश नासा आदि उपस्थित रहे।

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