राजनीति / इनेलो को फिर बड़ा झटका, राष्ट्रीय प्रवक्ता सतीश नांदल भाजपा में हुए शामिल



सुभाष बराला के साथ सतीश नांदल। सुभाष बराला के साथ सतीश नांदल।
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सुभाष बराला के साथ सतीश नांदल।सुभाष बराला के साथ सतीश नांदल।

  • पिछले दिनों फरलो पर आए ओमप्रकाश चौटाला नांदल से मिलने उनके घर गए थे
  • 2014 में पार्टी के पास 19 विधायक थे अब सिर्फ 5 विधायक बचे

Dainik Bhaskar

Jun 29, 2019, 04:17 PM IST

रोहतक. जींद उपचुनाव के बाद इनेलो नेताओं का पार्टी छोड़कर जाने का सिलसिला जारी है। शनिवार को इनेलो को फिर झटका लगा। रोहतक के जिलाध्यक्ष व राष्ट्रीय प्रवक्ता सतीश नांदल भाजपा में शामिल हो गए। नांदल इनेलो की टिकट पर गढ़ी सांपला, किलोई से चुनाव लड़ चुके हैं। पिछले दिनों फरलो पर आए ओमप्रकाश चौटाला विशेष रुप से नांदल से मिलने उनके घर पहुंचे थे। नांदल का पार्टी छोड़कर जाना इनेलो के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। 

 

तीन दिन पहले दो विधायक हुए थे शामिल
बीती 25 जून को इनेलो के नूंह से विधायक जाकिर हुसैन और जींद के जुलाना से विधायक परमिंदर सिंह ढुल भाजपा में शामिल हुए थे। दोनों को चंडीगढ़ पार्टी कार्यालय में प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला व सीएम मनोहर लाल खट्टर ने सदस्यता दिलाई थी।

 

सितंबर में पार्टी के तत्कालीन सांसद दुष्यंत चौटाला और उनके भाई दिग्विजय चौटाला को निष्कासित किए जाने के बाद उन्होंने अपनी नई जननायक जनता पार्टी बनाई। इसके बाद हुए नगर निगम मेयर चुनाव हो या फिर जींद उपचुनाव और लोकसभा चुनाव, सभी में इनेलो कमजोर साबित हुई और लोकसभा में उसका एक भी प्रत्याशी जमानत तक नहीं बचा पाया। ऐसे में उसके विधायकों का मोहभंग होना शुरू हो गया।  

 

2014 में जीती थी 19 सीटें

2014 में हुए विधानसभा चुनाव में इनेलो 19 सीटें जीतकर हरियाणा विधानसभा में पहुंची थी। अभय चौटाला नेता प्रतिपक्ष बने थे। 2019 में इनेलो के जींद से विधायक हरिचंद मिड्ढा और पिहोवा जसविंद्र संधू की मौत हो गई। इसके बाद चौटाला परिवार में विवाद शुरू हो गया। दुष्यंत, दिग्विजय, अजय चौटाला को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।

 

निष्कासन के बाद नई पार्टी जजपा का गठन हुआ तो विधायक नैना चौटाला, विधायक पिरथी नंबरदार, अनूप धानक, राजबीर फौगाट व नैना चौटाला ने इनेलो से किनारा करते हुए जजपा में अपनी निष्ठा दिखाई। इसके बाद अभय चौटाला ने स्पीकर को इनकी सदस्यता रद्द करने के लिए कहा और उसके नेता प्रतिपक्ष से इस्तीफा स्वीकार करने के लिए कहा। इनेलो के 15 विधायकों में से 2 की मौत हो गई थी। पांच विधायक भाजपा में चले गए हैं जबकि 4 जजपा में चले गए हैं। अब महज 8 विधायक बचे हैं।

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