वार्षिक मेला उत्सव के लिए सजा श्री शीतला माता मंदिर, आज आधी रात से भोग और जयकारे से होगा शुभारंभ
चार सिद्धपीठों में शामिल 400 वर्ष प्राचीन शीतला माता मंदिर में 11 मार्च से वार्षिक पूजनोत्सव शुरू हो रहा है। यह एक महीने तक चलेगा। इस बार पांच बुधवार आएंगे, जब आदिशक्ति मां की विशेष आराधना की होगी। मंगलवार-बुधवार की आधी रात को भोग-आरती और जयकारे के साथ ही दर्शन-पूजन का सिलसिला प्रारंभ हो जाएगा। श्री पंच परमेष्ठी युवा मंडल ने प्राचीन शीतला माता मंदिर प्रबंध सेवा समिति के सहयोग से श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मंडल के 50 सदस्य-पदाधिकारी व मंदिर समिति के सेवादार पूृरे समय तक मंदिर परिसर में व्यवस्था संभालेंगे। माता दरवाजा चौक के आसपास यातायात संभालने के लिए पुलिस का भी इंतजाम किया गया है।
विद्युत झालरों व सतरंगी रोशनी से जगमगाया मंदिर
वार्षिक मेले के उपलक्ष्य में शीतला माता मंदिर परिसर की विशेष सजावट की गई है। यहां विद्युत झालरों की लड़ियों और सतरंग रोशनी बिखरने वाले बल्ब जगह जगह लगाए गए हैं। शाम होते ही पूरा मंदिर परिसर रोशनी से जगमग हो उठता है।
जींद रोड की तरफ से बनाया प्रवेश द्वार
जींद रोड की तरफ के द्वार से श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश करेंगे। वे बैरिकेड्स के जरिए बनाए गए रास्ते से गुजरते हुए देवी मां के दर्शन करेंगे। यही से बांई ओर की तरफ शीतला माता का परिक्रमा मार्ग शुरू हो जाएगा। जो गोगा पीर मंदिर, गुड़गांव वाली माता मंदिर, कंडी माता व बसंती माता मंदिर, वैष्णो माता मंदिर, काली माता व हनुमान मंदिर में पूजन-अर्चन करते हुए माता दरवाजा चौक की ओर निकास
द्वार से बाहर निकलेंगे।
सरोवर गंदगी से पटा, कैसे पूरी होगी मिट्टी निकालने की रस्म:माता दरवाजा चौक स्थित श्री शीतला माता मंदिर का प्राचीन सरोवर का 4 साल बाद भी सौंदर्यीकरण नहीं हो पाया है। इस बार भी सरोवर गंदगी और ध्वस्त बिल्डिंग के डाले जा रहे मलबे से पटा पड़ा है। पानी की जगह बदबूदार कीचड़ है। ऐसे में आस्थावान लोगों द्वारा सरोवर से मिट्टी निकालने की रस्म कैसे पूरी होगी। जबकि यह सरोवर के सौंदर्यीकरण का मुद्दा हर बार की नगर निगम की मीटिंग में उठता रहा है। हर बार अधिकारी व मेयर मात्र आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं। इसके चलते भक्तों में रोष है।
बकाया बता ठेकेदार ने रोका काम
शीतला माता मंदिर के प्राचीन सरोवर का काम संबंधित ठेकेदार ने रोक रखा है। पूछने पर उसने बताया कि उसका नगर निगम पर 26 करोड़ रुपए शहर में चल रहे विभिन्न प्रोजेक्ट का बकाया है। जब तक उसका भुगतान नहीं होगा, काम चालू नहीं किया जा सकता है।
-मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम।
एक माह में इस बार 5 बुधवार को विशेष पूजन, यातायात संभालने के लिए पुलिस का भी इंतजाम
मेले के लिए खुला कंट्रोल रूम:
श्री शीतला माता मंदिर में मंगलवार की रात 12 बजे से शुरू हो रहे वार्षिक मेले में आने वाले भक्तों के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रसाद चढ़ाने के लिए टब रखे गए हैं। इसके लिए मोबाइल टायलेट, पीने का पानी, पंखे का इंतजाम किया गया है। इस दौरान कंट्रोल रूम भी होगा। जहां भक्त अपनी असुविधा के बारे में बताकर मदद ले सकते हैं।
-विवेक जैन, अध्यक्ष श्री पंच परमेष्ठी युवा मंडल।
मंदिर परिसर में दर्शन-पूजन के विशेष इंतजाम
देवी मां के भक्तों के दर्शन-पूजन के लिए श्री शीतला माता मंदिर परिसर में विशेष प्रबंध किए गए हैं। भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए बेरीकेड्स लगाकर पथ बनाया गया है। ताकि लोग आसानी से अपनी मान्यता के अनुसार पूजा पाठ कर सकें। श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी और सुरक्षा का भी इंतजाम रहेगा। -पं. थानेश्वर दास उदासीन, महंत श्री प्राचीन शीतला माता मंदिर माता दरवाजा चौक।
श्रद्धालुओं से अपील
{सभी भक्तजन लाइन में ही आकर देवी मां के दर्शन करें।
{प्रसाद जमीन पर न गिरने दें। उसे श्रद्धापूर्वक चढ़ाएं।
{जल लेकर मंदिर में प्रवेश न करें। मंदिर के मुख्य द्वार पर ही जल चढ़ाएं।
{सभी भक्त प्रसाद मंदिर परिसर में रखे पात्र में ही डालें।
इन तारीखों पर विशेष पूजन: प्राचीन शीतला माता मंदिर में चैत्र मास के हर बुधवार को विशेष पूजन किया जाता है। इस बार यह अवसर 5 बार आएगा। पहला बुधवार 11 मार्च को है। इसके बाद 18 मार्च, 25 मार्च, 1 अप्रैल और 8 अप्रैल को भी बुधवार पड़ रहा है। जब देवी की आराधना के लिए भक्ति परिवार सहित माता दरवाजा चौक स्थित श्री शीतला माता मंदिर धाम पहुंचेंगे।
प्रवेश द्वार पर ही अर्पित करें जल: प्रवेश द्वार ही जल पात्र रखा मिलेगा। जहां पर श्रद्धालु जल अर्पित करेंगे। इसके बाद प्रसाद की बर्बादी बचाने के लिए मुख्य मंदिर, काली माता मंदिर, शीतला माता मंदिर समेत सभी मंदिरों के सामने प्रसाद रखने के लिए टब रखे जाएंगे। ताकि प्रसाद जमीन में पड़कर व्यर्थ होने से बच सके। हर मंदिर के साथ सहयोग के लिए पूरे समय तक सेवादार मौजूद रहेंगे।
यह बन सकता है विकल्प: प्राचीन सरोवर की तलहटी में कृत्रिम गड्ढा बनाकर उसमें टैंकर के जरिए स्वच्छ जल भरकर श्रद्धालुओं को मिट्टी निकालने की रस्म पूरी करने की सुविधा प्रदान की जा सकती है। इस संबंध में मेयर मनमोहन गोयल ने कहा कि सरोवर में मिट्टी निकालने का वैकल्पिक इंतजाम बुधवार को करवाया जाएगा।
माता दरवाजा स्थित शीतला माता मदिंर में मेले की पूजा की तैयारी करते पुजारी व श्रद्धालु।
माता दरवाजा स्थित सराेवर में डाला हुअा मलबा।