विदेश से लौटे लोगों की सेहत पर हर पल विभाग की नजर
विदेशाें से घूमकर जिले में आने वाले लोगों की हरियाणा स्वास्थ्य विभाग लगातार मॉनीटरिंग कर रहा है। रविवार को भी जिला स्वास्थ्य विभाग ने शहर लौटे तीन नए लोगों को कोराेना वायरस का संदिग्ध मानते हुए निगरानी में रखा है। जिले में अब तक कोरोना वायरस के 25 संदिग्धों को चिह्नित कर उन्हें घर में रखकर आईसोलेट किया जा रहा है। इन 25 संदिग्धों में चिकित्सक, मेडिकल स्टूडेंट्स, ट्रेवलर्स और कारोबारी शामिल हैं। हेल्थ विभाग अथॉरिटी ने सभी संदिग्ध मरीजों को घर में रहकर स्वास्थ्य लाभ लेने के आदेश जारी किए हैं। रविवार को भी शहर की मार्केट में मास्क व सिनेटाइजर की किल्लत रही। कैमिस्ट शॉप संचालक मनमानी कीमतों पर मास्क की बिक्री करते रहे। रविवार काे पीजीआई में कोराेना वायरस के एक संदिग्ध मरीज ने उपचार में कोताही बरतने का आरोप लगाया। इस बात को लेकर मरीज व चिकित्सक में बहसबाजी भी हुई। मरीज ने बताया कि वह संस्थान में पहले भर्ती रह चुका है।
विभाग की अपील : सोशल मीडिया की फेक न्यूज पर भरोसा न करें, अफवाहों को फेलने से रोकें
वहीं हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. ओपी कालरा, सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला व पीजीआई के पल्मोनरी क्रिटिकल केयर मेडिसिन डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. ध्रुव चौधरी ने शहरवासियों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर चल रही फेक न्यूज पर वाे कतई भरोसा न करें। यदि किसी मरीज को सर्दी, खांसी, जुखाम, बदन दर्द, तेज बुखार या सांस लेने में दिक्कत है तो वो पीजीआई में आकर उपचार करा सकते हैं।
लहसुन से इसके इलाज
एक अन्य मैसेज में लहसुन से इसके इलाज का दावा किया जा रहा है। जबकि कोई भी एजेंसी ने ऐसा दावा नहीं किया है कि इसकी कोई दवा बाजार में आई है। इस बारे में डब्ल्यूएचओ के ट्वीट में कहा गया है कि यह फेक न्यूज है।
}बाजार में आ गई है दवा
इस मैसेज में दावा किया गया है कि होम्योपैथिक दवा आर्सेनिक एलबम 30 से नियंत्रित किया जा सकता है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया इस बात का सबूत नहीं है कि यह दवा खाने से कोरोना का इलाज हो सकता है।
}शराब पीने वालों को नहीं होता कोराेना
व्हाट्सएप पर चल रहे मैसेज में कहा जा रहा है कि शराब पीने वालों पर कोरोना का असर नहीं होता। भास्कर ने कई चिकित्सकों से बात कर रिएलिटी का पता किया तो सभी ने इसे गलत बताया। डब्ल्यूएचओ ने कहीं पर भी ये नहीं लिखा है कि शराब पीने से कोरोना से बचा जा सकता है।
नॉलेज : आमतौर पर कोविड-19 कोरोना या दूसरे वायरस खुले वातावरण में जिंदा नहीं रह पाते लेकिन सरफेस में पहुंचते ही इनकी उम्र बढ़ जाती है। मोबाइल से आम तौर पर वायरस नहीं फैलते लेकिन अगर किसी ने उस पर खांस दिया या किसी संक्रमित व्यक्ति की छींक पड़ गई तो यह वायरस 48 घंटे तक वहां जिंदा रह सकता है। कोराेना यानी कोविड 19 वायरस प्लास्टिक की सतह पर नौ दिन तक जीवित रह सकता है।
चीनी सामान में छिपा है वायरस : यह मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है कि चीनी सामानों में कोरोना वायरस है। सरकार ने होली पर चीन से आए सामान नहीं खरीदने की अपील की है। जबकि केंद्र सरकार ने अभी तक ऐसी कोई एडवाइजरी जारी नहीं की है।