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पिता की मौत पर भी डॉक्टर ने अस्पताल नहीं छोड़ा, आइसोलेशन वार्ड में करते रहे सेवा

Rohtak News - कोरोना वायरस के खिलाफ चल रही जंग में पहली पंक्ति में खड़े पीजीआई के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन...

Apr 07, 2020, 08:26 AM IST

कोरोना वायरस के खिलाफ चल रही जंग में पहली पंक्ति में खड़े पीजीआई के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन डिपार्टमेंट के चिकित्सकों की टीम बीते 40 दिनों से लगातार दिन रात मरीजों की सेवा करने में जुटी है। कोरोना वायरस के मरीजों को लेकर बनाए गए आइसोलेशन वार्ड और सी ब्लॉक में आने वाले पॉजीटिव व संदिग्ध मरीजों को स्वस्थ करने का संकल्प लिए चिकित्सकों की टीम जुटी है। पीसीसीएम विभाग के एक चिकित्सक पिता के निधन पर घर नहीं पहुंच पाए, उन्होंने पहले मरीजों की सेवा को प्राथमिकता दी। एक चिकित्सक ने 40 दिन से बिना अवकाश लिए ऑन ड्यूटी खत्म होने के बाद भी ऑन कॉल सेवाएं देने के लिए जुटे हैं। कोरोना वायरस के खिलाफ चल रही लड़ाई में चिकित्सकों की टीम की अगुवाई विभागाध्यक्ष सीनियर प्रोफेसर डाॅ. ध्रुव चौधरी कर रहे हैं। बता दें, कोरोना वायरस से बचाव में पीजीआईएमएस में पीसीसीएम विभाग को अहम जिम्मेदारी दी गई है।

पीजीआई के आइसोलेशन व सी ब्लॉक के वार्ड में तैनात चिकित्सक ड्यूटी शेड्यूल पूरा होने के बाद भी मरीजों को ऑन कॉल देते हैं चिकित्सा सुविधा, परिजनों को भी करते रहते हैं मोटिवेट

टीम के इन सदस्यों की भूमिका है अहम

पल्मोनरी क्रिटिकल केयर मेडिसिन डिपार्टमेंट की टीम में शामिल एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मंजूनाथ बीजी, डॉ. दीक्षा त्यागी, डॉ. पवन सिंह, डॉ. लोकेश लालवाण, डॉ. अतुल, डॉ. वेंकटेश, डॉ. सुष्मिता, डॉ. सतीश आदि अन्य जूनियर डाक्टरों की टीम कोरोना वायरस के संदिग्ध व पाजीटिव मरीजों की सेवाएं करने में अहम रोल निभा रहे हैं।

कोरोना की जंग में पूरी टीम का एकजुटता से साथ देना जीत का भरोसा मजबूत करता है


40 दिनों से बिना अवकाश लिए सेवाएं दे रहे हैं ताकि कोरोना से जीत सकें, ये सबकी जीत होगी

कर्नाटक निवासी व पीसीसीएम विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. मंजूनाथ ने बताया कि कोरोना वायरस के खिलाफ चल रही लड़ाई में जीत हासिल करने के लिए पीसीसीएम विभाग को अहम रोल दिया गया। इस टास्क को पूरा करने का संकल्प लिया और 40 दिन से बिना अवकाश लिए कोरोना की जंग में हर रोज संक्रमण का खतरा झेलते हुए कोरोना के मरीजों को चिकित्सीय सेवाएं उपलब्ध कराने में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि अपने परिवार से दूर रह कर मरीजों को इलाज करने के साथ परिजनों को वीडियो कॉलिंग के जरिए हिम्मत बंधाते रहते हैं। हालांकि अपने वार्ड में दाखिल मरीजों से भी उन्होंने आत्मीय संबंध बनाए हैं। डॉ. मंजूनाथ कहते हैं कि काेराेना को हराना है तो इस रोल को उन्हें हर हाल में पूरा करना होगा। कोरोना पर जीत मानव जाति की जीत होगी।

पिता का निधन हाेने की खबर मिली, लेकिन आइसोलेशन वार्ड में मरीज का इलाज जरूरी था

मूल रूप से राजस्थान के अलवर के निवासी व पीसीसीएम विभाग के चिकित्सक डॉ. लोकेश लालवाणी ने बताया कि पांच दिन पहले उनकी ड्यूटी आइसोलेशन वार्ड में थी। ड्यूटी के दौरान घर से फोन आया कि पिता का हार्ट अटैक से निधन हो गया है। पिता के निधन का समाचार मिलने पर वो स्तब्ध से रह गए। लेकिन इन्हीं कुछ पलाें में उन्होंने खुद काे संभाला भी। तय किया कि आइसोलेशन वार्ड में मरीजों का इलाज उनकी प्राथमिकता है। हालांकि अब जब आइसोलेशन वार्ड में दाखिल मरीजों की संख्या कम होने लगी तो डॉ. लोकेश ने छुट्‌टी के लिए आवेदन किया है ताकि वो अपने पिता के अंतिम संस्कार की बची हुई रस्मों को पूरा करवा सकें। वार्ड में अब एक ही मरीज है। उससे भी आत्मियता बनाते हुए डॉ. लोकेश अवकाश पर गए हैं।

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