सबक जो सीखे थे, तजुर्बों ने नकार दिए, दिल कहता है, अब किताब न रख...

Rohtak News - सिटी रिपाेर्टर

Jan 24, 2020, 08:40 AM IST
सिटी रिपाेर्टर
कभी अपनी बेबसी पर खुद पछताती...: बीना कौशिक ने औरत का दर्द यूं बयान किया- कभी मुस्कुराती कभी फिर हैरान होती, कभी अपनी बेबसी पर खुद पछताती है, लगता है इतिहास की कोई किताब है।

वरिष्ठ कवयित्री कमला राठी ने ‘मुंह दिखाई’ विषय पर कविता सुनाई ।

मां.. सर ढकने को तो नहीं पर नजरे झुकाने को कहती है...

एमडीयू की छात्रा रोजी गुल ने युवा मन के भाव यूं व्यक्त किए। उन्होंने कहा तू आए या ना आए, तेरे इंतजार में रहती हूं, तेरी आहट होती है दिल में, सपनों में खोयी रहती हूं।

एमडीयू की ही छात्रा सोनिका पंवार ने महिलाओं की सुरक्षा का मर्म बताया। उन्होंने कहा घर से निकलने से पहले मां बार-बार डरती है, सर ढकनें को तो नहीं पर नजर झुकाने को कहती है।

वही स्नेह ‘विशेष’ के भाव थे: ये सोचकर उसके सवाल पर खामोश रह जाती हूं मैं, कि वक्त जब जवाब देगा तो मुझसे बेहतर देगा। हरियाणा इकाई की महासचिव वंदना हिना मलिक ने कविता सुनाई कि बाद भीगने के भी मन खुश्क ही रहा, तुम होते तो बूंदों में नमी भी होती।

तुम जो हौले से मुस्कराओ, तो कोई बात बने...

वही डॉ. ज्योति राज जो कविता सुनाई उसके बोल माहौल का अंदाज बदलने वाले थे। उन्होंने कहा तुम जो हौले से मुस्कुराओ, तो कोई बात बने, गीत गाकर तुम मनाओ तो कोई बात बने।

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