ग्रामीणों काे ग्लूकोमा से सचेत रहने की जरुरत, लापरवाही में आंखाें की जा सकती है रोशनी
पीजीआईएमएस के क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान की ओर से आठ से 14 मार्च तक हरियाणा ऑप्थेलमोलॉजिकल सोसायटी के सहयोग से विश्व ग्लूकोमा सप्ताह मनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत कई कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को ग्लूकोमा से बचाव के बारे में जागरूक किया जाएगा। सोमवार को नेत्र रोग विभाग में ग्लूकोमा क्लीनिक की इंचार्ज डॉ. मनीषा राठी व डॉ. सुमित सचदेवा ने एक व्याख्यान के माध्यम से लोगों को जागरूक कर उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया। चिकित्सकों ने आमजन से आग्रह किया कि पीजीआईएमएस में ग्लूकोमा के इलाज की सभी अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध हैं, इसलिए समय पर उपचार के लिए पीजीआईएमएस आएं।
प्रतिवर्ष में 1200 मरीज काला मोतिया से पीड़ित होकर आ रहे
वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमित सचदेवा ने कहा कि ग्लूकोमा विश्व में अंधेपन का एक कारण है। ग्लूकोमा क्लीनिक की शुरुआत में उनके पास साल में सिर्फ 300 मरीज आते थे और आज धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ने से पीजीआई में सालाना करीब 1200 मरीज काले मोतिया के आते हैं और कुछ मरीज तो आखिरी स्टेज में तब आते हैं, जब उन्हें दिखना बिल्कुल बंद हो जाता है। डॉ. सुमित सचदेवा ने बताया कि संस्थान में प्रत्येक सोमवार व बुधवार को ग्लूकोमा यूनिट द्वारा डॉ. मनीषा व उनके दिशा-निर्देशन में स्पेशल क्लीनिक चलाया जाता है।
जागरूकता अभियान चलाना की जरूरत : वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीषा राठी ने कहा कि नेत्र विभाग द्वारा 8 से 14 मार्च तक विश्व ग्लूकोमा सप्ताह मनाया जा रहा है ताकि आमजन को काले मोतिया के बारे में अधिक से अधिक जागरुक किया जा सके। उन्होंने कहा कि हमें ग्लूकोमा यानि काला मोतिया के बारे में अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करना चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग जागरूक होकर समय पर अपना इलाज कर इस बिमारी से बच सकें।
ग्लूकोमा के लक्षण
1) रोशनी के चारों ओर आभा दिखाई देना
2) नजर में संकरापन आना
3) बार-बार चश्में का नंबर बदलना
4) आंख में लालिमा
5) आंखों में धुंधलापन आना
6) आंख में व सिर में दर्द होना
ग्लूकोमा होने पर क्या करें
1) मरीज चिकित्सीय सलाह के अनुसार निरंतर अपनी दवा लें।
2) एक बार में आपको जितनी दवा बताई गई है उसकी मात्रा या संख्या में बढ़ोतरी न करें।
3) ड्रॉप्स के बीच 15 मिनट का अंतर रखें।
4) ड्रॉप्स को ठीक तापमान पर रखें।