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महिलाएं राजनीति में भागीदारी बढ़ाएं ताकि महिला सशक्तीकरण के कानूनों की मांग मजबूती से उठा सकें

Rohtak News - महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होते हुए राजनीति में आना चाहिए ताकि वे महिला सशक्तिकरण के कानूनों की...

Bhaskar News Network

Feb 14, 2019, 03:42 AM IST
Rohtak News - haryana news women should increase participation in politics so that women39s empowerment laws can be raised firmly
महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होते हुए राजनीति में आना चाहिए ताकि वे महिला सशक्तिकरण के कानूनों की मांग को मजबूती से उठा सकें। यह बात हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन प्रतिभा सुमन ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कही। वे बुधवार को जाट कॉलेज के सभागार में भारत ज्ञान विज्ञान समिति हरियाणा, सर्च राज्य संसाधन केंद्र हरियाणा व कॉलेज की महिला सेल की ओर से ‘महिलाओं के कानूनी अधिकार’ विषयक जागरूकता सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करने पहुंची थीं।

सेमिनार में जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी करमिंदर कौर व पीजीआई थाने की एसएचओ गरिमा श्योराण विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित थीं। जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी करमिंदर कौर द्वारा लिखित संदर्भ पुस्तिका ‘महिलाओं के कानूनी अधिकार’ का विमोचन भी किया गया।

अपना पक्ष मजबूत करने के लिए हर मंच पर आना होगा महिलाओं को

आयोग की चेयरपर्सन प्रतिभा सुमन ने कहा कि महिलाओं को राजनीति में अपनी भागीदारी को बढ़ाना चाहिए ताकि वे अपने पक्ष को मजबूती से रख सकें। सेमिनार में प्राचार्या डॉ. संगीता दलाल, महिला सेल इंचार्ज डॉ. शबनम राठी, सर्च के पूर्व कार्यकारी निदेशक अविनाश सैनी, डॉॅ. सुशीला डबास, डॉ. मिनल मलिक, डॉ. जसमेर सिंह, सर्च के निदेशक डॉ. शीशपाल, विमलेश कुमारी, सेवानिवृत सर्जन डॉ. आरएस दहिया, डॉ. संतोष मुदगिल, प्रोफेसर प्रमोद गौरी, सर्च के कार्यक्रम समन्वयक सुभाष, ईशवंती, हरियाणा विज्ञान मंच के सचिव सतबीर नागल, सुशील, सीमा, अनीता मौजूद रहे।

सेमिनार के दौरान पुस्तक का विमोचन करतीं चेयरपर्सन प्रतिभा सुमन।

संविधान में सभी को बराबर का अधिकार, फिर भी महिलाएं हक पाने से वंचित हैं

जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी करमिंदर कौर ने कहा कि दुनिया में किसी न किसी रूप में भेदभाव होता रहा है। महिलाओं के साथ भी हर वर्ग में भेदभाव हो रहा है। हमारा संविधान सभी को बराबर अधिकार देता है। लेकिन महिलाओं को वह बराबरी का अधिकार नहीं मिल पा रहा है। परिवार व समाज में जगह-जगह उनके साथ शोषण व हिंसा हो रही है। समाज में पितृ सत्ता के चलते घर में लड़की को पराया धन समझा जाता है। वहीं ससुराल में भी उसे अपनापन नहीं मिल पा रहा है।

सोशल मीडिया ने महिलाओं की समस्याओं को बढ़ाया है

एसएचओ गरिमा श्योराण ने कहा कि सोशल मीडिया ने महिलाओं की समस्या को ओर ज्यादा बढ़ा दिया है। सोशल मीडिया ऐसा माध्यम है जिस पर नियंत्रण नहीं है। कोई भी आपके नाम से फर्जी आईडी बनाकर समाज में आपकी प्रतिष्ठा पर प्रश्न चिह्न लगा सकता है। आज युवाओं के लिए माता-पिता से बढ़कर दोस्त हो गए हैं। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अत्याचार को सहन न करें।

युवा पीढ़ी समाज को जागृत कर उन्हें सशक्त बना सकती है

भारत ज्ञान-विज्ञान समिति हरियाणा एवं राज्य संसाधन केंद्र हरियाणा के अध्यक्ष व कृषि वैज्ञानिक डॉ. महावीर नरवाल ने कहा कि महिलाओं के जीवन में अनेक बाधाएं हैं, लेकिन हमारी युवा पीढ़ी समाज को जागृत कर उनको सशक्त कर सकती हैं। वर्तमान में महिलाओं ने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर लडऩा सीख लिया है। पुरुषों को भी कानू नो की जानकारी लेकर महिलाओं का सहयोग करना चाहिए।

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