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महिलाओं ने बयां की संघर्ष की कहानी, जरूरतमंदों का सम्मान

एक वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर} सहारे की तलाश में जो मैं भटकती रही उम्र भर, इस वजह से बन गई एक दिन मैं बोझ सब पर। छोड़ दो मुझे अकेला और नहीं बनना मुझे किसी पर भी बोझ, दो कदम ही सही पर खुद के दम पर अब चलने दो मुझे...। शिक्षिका अंजना की इस जोश भरी कविता ने पार्टी हॉल में बैठी महिलाओं में एक नई उम्मीद भरने की कोशिश की। मौका रहा रंग संस्था और किटी ग्रुप के सदस्यों की ओर से हुई गेट-टूगेदर का। शीला बाईपास के समीप एक रेस्टोरेंट में यह संयुक्त कार्यक्रम किया गया। इस संस्था और किटी ग्रुप में शामिल शिक्षिका, प्राचार्य व होम मेकर्स का मकसद जरूरतमंद महिलाओं के जीवन में रंग भरना, मुसीबत के समय परिवार को उबारने वाली महिलाओं को सम्मान देना और आर्थिक मदद करना है। इसलिए इसका गठन किया गया। इन सदस्यों ने मिलकर आम महिलाओं को खास बनाने की कड़ी में एक पहल की। इसमें ऑटो, प्रेस, मालिश, तंदूर लगाकर घर का खर्चा चलाने वाली सुमित्रा, मुकेश, अनीता व संतोष को सम्मान दिया।
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