सीख / आरएसएस के प्रचारक इंद्रेश कुमार ने स्टूडेंट को बढ़ाया प्रेम का पाठ



आरएसएस प्रचारक इंद्रेश कुमार। आरएसएस प्रचारक इंद्रेश कुमार।
कार्यक्रम में दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ करते हुए इंद्रेश कुमार। कार्यक्रम में दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ करते हुए इंद्रेश कुमार।
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आरएसएस प्रचारक इंद्रेश कुमार।आरएसएस प्रचारक इंद्रेश कुमार।
कार्यक्रम में दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ करते हुए इंद्रेश कुमार।कार्यक्रम में दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ करते हुए इंद्रेश कुमार।

  • महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे थे इंद्रेश कुमार
     

Dainik Bhaskar

Feb 07, 2019, 05:23 PM IST

रोहतक. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक इंद्रेश कुमार ने रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में छात्रों को प्रेम का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम ने प्यार को ऐसे पेश किया, जिससे वासनाएं और विकार भड़कते हैं, जबकि भारत ने प्यार को इस तरह प्रस्तुत किया जो वासनाएं और विकारों को मुक्त करता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और राधा का उदाहरण देकर समझाया। वे गुरुवार को एमडीयू में आयोजित राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे। 
 

 

वेलेंटाइन डे के मौके पर छात्रों से की गई चर्चा का किया जिक्र

  1. इंद्रेश कुमार ने कहा कि पिछले वर्ष वेलेंटाइन डे के मौके पर मैंने कुछ लड़के-लड़कियों से बातचीत की थी। मैंने उनसे पूछा कि क्या वे परिवार के साथ वेलेंटाइन डे मना सकते हैं। उन्होंने कहा नहीं हम परिवार के साथ नहीं मना सकते। तभी किसी रेस्टोरेंट और बगीचों में जाकर मनाते हैं। 
     

  2. तब मैंने उन्हें कहा कि कभी राधा-कृष्ण का प्ले देखा है। वह पूरा प्ले प्यार और सौंदर्य से भरा होता है। क्या उसे अपने घर में कर सकते हो। तो बच्चों ने जवाब दिया कि हां हम उसे अपने घर में कर सकते हैं। तब मैंने उनसे सवाल किया कि राधा-कृष्ण का प्ले घर में कर सकते हो और वेलेंटाइन डे घर में क्यों नहीं मना सकते। इस पर बच्चों ने जवाब दिया कि जब वेलेंटाइन डे मनाते हैं तो वासनाएं भड़कती हैं, जबकि राधा-कृष्ण की भाव भंगिमाएं बनाते हैं तो सच्चे प्यार की भावनाएं उमड़ती हैं।  
     

  3. इंद्रेश कुमार ने कहा कि हमें इस भारत को समझना चाहिए। हमने प्यार को उस रुप में प्रस्तुत किया जो वासनाएं और विकार मुक्त करे जबकि पश्चिम ने प्यार को ऐसे पेश किया जो वासनाएं और विकार भड़क जाए। सुख चला जाए और आनंद कभी न मिले। उन्होंने कहा कि भारत ने इस प्यार रूपी मूल्य को होली के रुप में प्रकट किया। जहां गाल से गाल रगड़ी जाती है, हाथों पर गुलाल और गाल रगड़े जाते हैं।
     

  4. इससे विकार नहीं आते, वासनाएं नहीं भड़की। प्यार जीवन का मूल्य है। टेक्नोलॉजी हो, एजुकेशन हो, जिंदगी हो यदि इनमें से प्यार निकल जाए तो कुछ नहीं होता। पुस्तक और पढ़ाई में प्यार नहीं हो तो शिक्षा ग्रहण नहीं की जा सकती।
     

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