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टिकट कटने से आहत नागर पंचायत में रोए, बोले- मेरे साथ गलत हुआ, फिर भी भड़ाना को किया माफ

एक वर्ष पहले
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  • भितरघात के डर से नागर के घर फिर पहुंचे कांग्रेस के उम्मीदवार भड़ाना, पंचायत ने कहा- आप पर कैसे भरोसा करें
  • नागर ने कहा- टिकट कटने पर दुख हुआ, पर कई टिकट कुर्बान।  

फरीदाबाद (भोला पांडे). फरीदाबाद लोकसभा सीट से कांग्रेस का टिकट कटने से नाराज तिगांव के विधायक ललित नागर ने शनिवार को समर्थकों और 84 पाल की सरदारियों/पंचायत की बैठक आवास पर बुलाई। नागर ने कहा कि पार्टी के निर्णय से बहुत दुखी हूं। लेकिन, संगठन के लिए काम करूंगा। कांग्रेसी नेता नागर समर्थकों से दर्द सांझा कर ही रहे थे, तभी हाल ही में घोषित प्रत्याशी अवतार सिंह भड़ाना आ गए। इस पर ललित ने उन्हें पास में बैठा लिया। प्रत्याशी भड़ाना ने भी सफाई दी। बाद में नागर और भड़ाना ने बैठकर पकौड़े खाए और खिलाए और कहा- गिले-शिकवे दूर हो गए। पूरी पार्टी साथ है। दरअसल, ललित नागर को कांग्रेस ने फरीदाबाद का टिकट दिया था। लेकिन, कुछ दिनों बाद ही दोबारा सूची जारी करते हुए ललित की जगह अवतार सिंह भड़ाना को प्रत्याशी घोषित कर दिया।

1) भावुक होकर जब सोफे पर बैठे नागर तो कंधे पर हाथ रखकर उन्हें भड़ाना ने समझाया

माइक संभालते ही सरपंच चंदन ने फिर लंबरदार वीर सिंह समेत अन्य कई अन्य ने भड़ाना को खरी-खरी सुनाई। लोगों ने कहा कि पिछले चुनाव में क्षेत्र आपके पीछे खड़ा था। समर्थन दिया, लेकिन हार गए तो पार्टी छोड़ गए। पांच साल हम लोगों ने कितना दुख झेला है, आपको क्या पता। भाजपा में बात नहीं बनी तो लौट आए। कैसे आप पर विश्वास कर लें। इस पर भड़ाना ने सफाई दी, फिर नागर ने माइक संभाला तो टिकट का नाम लेते ही उनकी आंखों में आंसू आ गए। बात खत्म होने के बाद नागर सामने बने पार्क में भड़ाना को लेकर गए। दोनों ने बैठकर पकौड़े खाए और खिलाए और कहा- गिले-शिकवे दूर हो गए। पूरी पार्टी साथ है।

भड़ाना मंच पर बैठ गए तो नागर बोले- सरदारों हम तो ऐसे आदमी हैं जो सब भूलकर पार्टी की राह पर चलते हैं। मैं आपका खून हूं। आपका बेटा हूं। हो सकता है कि हमारे साथ किसी भाई ने गलत किया हो, लेकिन आपको और ईश्वर को साक्षी मानकर फिर से भड़ाना की मदद करेंगे। भगवान जाने अगले आदमी की आत्मा में क्या है, वह क्या करेगा। हमारे मन में किसी के प्रति जहर नहीं होना चाहिए। अभी तो बहुत लंबी उम्र है। पार्टी हाईकमान के सामने कोई मजबूरी रही होगी कि अपने चहेते का टिकट काटकर भड़ाना को दे दिया। पार्टी के लिए मैं एक टिकट क्या चार टिकट भी कुर्बान करने को तैयार हूं। ये बात कहते-कहते उनकी आंखों में आंसू आ गए।

भड़ाना पंचायत में पेश हुए और बोले- ललित नागर को पार्टी हाईकमान ने उम्मीदवार बनाया था। हम भी कोशिश में थे, क्योंकि दूसरी पार्टी में बहुत कुछ छोड़कर उम्मीद में आए थे कि कांग्रेस से उम्मीदवारी मिलेगी। टिकट मिलने के बाद नागर हमसे मिले और कहा कि अब तुम चुनाव मत लड़ना। मेरा साथ देना, लेकिन हमने ललित से एक दिन की मोहलत मांगी थी। हमें पार्टी हाईकमान से पूछना था कि हमारी उम्मीदों पर उनका क्या रुख है। खैर...पार्टी के फैसले पार्टी ही करती है। राजनीति में कई बार सबकुछ सहना पड़ता है। हमने 30 वर्षों तक जनता की सेवा की है। राजनीति में कई उतार-चढ़ाव भी देखे हैं। स्वाभाविक है कि ललित काे टिकट कटने से तकलीफ है। पर आज आप लोगों के हाथ में ताकत है। अब सरदारों का फैसला सिर माथे।

विधायक की आंख में आंसू देख समर्थक आक्रोशित हो उठे। नागर के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। इसके बाद भड़ाना को खरी खरी सुनाई। समर्थकों ने आरोप लगाया कि 2009 और 2014 के चुनाव में खुलेआम नागर का विरोध किया था। यह हम कैसे भूलें। अगले व्यक्ति ने फिर भी माफी नहीं मांगी। समर्थकों को नागर हाथ जोड़कर शांत कराया।  

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