रोहतक / तीन नियमित एफएसओ और सात डीओ के भरोसे प्रदेश में फूड सेफ्टी का जिम्मा



no regular FSO appointment in the Food Safety Department since 2011
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no regular FSO appointment in the Food Safety Department since 2011

  • वर्ष 2011 के बाद से फूड सेफ्टी विभाग में नहीं हुई है नियमित एफएसओ की नियुक्ति, प्रदेश में 42 पद अब भी रिक्त

Dainik Bhaskar

Oct 22, 2019, 07:03 AM IST

रोहतक (विवेक मिश्र). दिवाली का त्योहार नजदीक है। त्योहार पर बिकने वाली मिठाइयां का आर्डर दुकानदारों के पास पहुंचना शुरू हो गया है। अब दुकानदारों की ओर से तैयार की जाने वाली मिठाई की गुणवत्ता किस स्तर की है। इसे जांचने के लिए अफसर फील्ड में निकल पड़े हैं। लेकिन यहां खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सामने सबसे बड़ी समस्या खुद के विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की है। 

 

इस समय प्रदेश का फूड सेफ्टी विभाग तीन नियमित फूड सेफ्टी अफसर और सात डेजिग्नेटेड ऑफिसर के भराेसे चल रहा है। ये अधिकारी और इनके अलावा पार्ट टाइम कर्मचारी ही खाद्य पदार्थों की बिक्री करने वाले दुकानों पर पहुंचकर सैंपल भरने की प्रक्रिया में जुटे हैं। वजह यह है कि वर्ष 2011 के बाद से फूड सेफ्टी विभाग में एफएसओ पद पर विभाग ने नियुक्ति नहीं हुई है। लिहाजा प्रदेश के 45 में से 42 एफएसओ के पद अाज भी खाली हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब तक विभाग में मैन पावर की कमी पूरी नहीं होगी। तब तक जनता को स्वस्थ खानपान मुहैया कराने का दावा कितना सफल हो सकता है। 

 

वर्कलोड के हिसाब से डीओ के पद ही मंजूर नहीं  

विभागीय अधिकारी के अनुसार सैंपल लेने वाले अफसरों के पद ही काफी कम है। गाइडलाइन के अनुसार प्रदेश में 75 फूड सेफ्टी ऑफिसर होने चाहिए। लेकिन रेगुलर एफएसओ के पद 45 ही हैं, जबकि कार्यरत 3 एफएसओ फतेहाबाद, करनाल, यमुनानगर में ही हैं। डेजिग्नेटेड ऑफिसर डीओ के पद 25 होने चाहिए, लेकिन प्रदेश में 22 रेगुलर पद हैं। इसमें सात रोहतक, हिसार, सिरसा, सोनीपत, अंबाला, गुरुग्राम, फरीदाबाद जिले में अतिरिक्त कार्यभार पर काम कर रहे हैं। इन डीओ पर एक नहीं बल्कि दो से तीन जिलों का प्रभार है। ऐसे में प्रदेश के अंदर बिकने वाली खाद्य सामग्री में मिलावट हो रही है या नहीं, इसे जांचने के लिए व्यापक अभियान चलाने में चलाने में दिक्कत आ रही है। यही वजह है कि वर्ष 2019 के अक्टूबर माह तक टीम ने खाद्य सामग्री के 57 सैंपल लिए, जिसमें 12 नमूने फेल मिले है और आरोपियों पर महज 18 हजार रुपए जुर्माना लगाया जा सका। 

 

14 दिन में आने वाली सैंपल की रिपोर्ट दो माह में आ रही 

एफएसएसए लागू होने के बाद से प्रदेश में खाद्य विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने दुकानों से सैंपल भरने शुरू किए। लेकिन सैंपलों की टेस्टिंग के लिए आज  तक लैब का विस्तार नहीं किया। करनाल और चंडीगढ़ में स्थापित लैब में ही प्रदेश भर से आने वाली खाद्य सामग्री के सैंपलों की टेस्टिंग की जाती है। अधिकारी दावा करते हैं कि रिपोर्ट 14 दिन में तैयार हो जाती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि दो माह से पहले लैब संचालक रिपोर्ट जारी नहीं करते हैं। तब तक सैंपलिंग लिए गए खाद्य पदार्थ उपभोक्ताओं को बेच दिए जाते हैं और विभागीय अधिकारियों को कार्रवाई करने में देरी हो जाती है। वहीं जिलों में बैठे खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के आवश्यकतानुसार संसाधन भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

 

40 लैब टेक्नीशियन को विभाग में जॉइन कराने की तैयारी

विभाग के उच्चाधिकारियों का दावा है कि प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में लगे 40 के करीब लैब टेक्नीशियन को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। संभावना है कि नवंबर माह से ये सभी 40 कर्मचारियों को एफएसओ के पद पर ज्वाइन कराया जाएगा। इसके बाद विभाग में एफएसओ के पद पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और मिलावटखोरों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए गुणवत्ताहीन खाद्य सामग्री की बिक्री पर अंकुश लगाया जा सकेगा।

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