रोहतक / जीभ व जबड़े पर कंट्राेल खो चुके लोगों का पीजीआई के डॉक्टरों ने खोजा सस्ता इलाज

पीजीआई रोहतक। पीजीआई रोहतक।
X
पीजीआई रोहतक।पीजीआई रोहतक।

दैनिक भास्कर

Nov 24, 2019, 05:43 AM IST

रोहतक (विवेक मिश्र). पीजीआई के डेंटल और न्यूरो विभाग ने मिलकर प्रदेश के 10 मरीजाें पर 6 माह तक रिसर्च व इलाज कर डिस्हार्मनी एंड डिस्कार्डेंस बैलेंस बीमारी काे काफी हद तक दूर करने का उपाय खोजा है। इस बीमारी में मुंह और जबड़े की मांसपेशियों का दिमाग से कनेक्शन बिगड़ जाने पर मरीज अजीब तरह का व्यवहार करने लगते हैं। लगातार जबड़ा, जीभ या पूरा मुंह हिलते रहना इसका लक्षण है।

 
यह बीमारी 40 वर्ष से अधिक उम्र के लाेगाें में दिखाई दे रही है। इस समस्या से परेशान लोग घर से बाहर निकलने से डरने लगे। थक हारकर मरीज पीजीआई के डेंटल कॉलेज में इलाज कराने के लिए पहुंचे। डेंटल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय तिवारी के निर्देशन में डॉ. हरनीत सिंह की टीम ने इसका इलाज करने की जिद ठानी।

डॉ. हरनीत सिंह ने मरीजों की केस स्टडी करने के बाद न्यूरो विभाग के चिकित्सकों की मदद से इलाज करना शुरू किया। छह माह तक मरीजों का इलाज करने के दौरान जीभ व जबड़े की मांसपेशियों काे दिमाग की नसों से कनेक्ट कर उन्हें संतुलन बनाने लायक किया। अब मरीज राहत महसूस कर रहे हैं। चिकित्सकों ने दावा किया है कि एक साल में अभी तक इस समस्या से पीड़ित मरीजों के 10 केस मिले हैं।

जबड़े के आकार की प्लेट लगाकर कर रहे इलाज

चिकित्सक डॉ. हरनीत सिंह ने कहा कि रिसर्च मंे रोहतक, महेंद्रगढ़, पलवल और झज्जर जिले के 6 मरीजों को शामिल किया गया। ये सभी मरीज तकरीबन 40 से अधिक उम्र के थे। इन लोगों की स्थिति अजीबोगरीब हरकत वाली थी। इसकी वजह से ये घरों से बाहर निकलकर किसी को अपना चेहरा नहीं दिखा पा रहे हैं। ये मरीज जब डेंटल काॅलेज में आए तो इन मरीजों का प्रोफाइल तैयार कर मुंह के अंदर जबड़े की जांच की गई। इसके बाद न्यूरो विभाग के चिकित्सकों की मदद ली गई।

वहां से मरीजों को दिमाग की नसों को एक्टिव करने के लिए इलाज दिया गया। फिर डेंटल कॉलेज में मरीजों को जबड़े पर कंट्रोल बनाने के लिए एक प्लेट तैयार कराकर लगाई गई। निजी कंपनियों की ओर से 14 हजार रुपए तक की कीमत के इंजेक्शन न मंगवाकर सरकार की ओर से संस्थान में उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं के जरिए मरीजों का इलाज किया गया। तब जाकर मरीजों को काफी हद तक जबड़े पर संतुलन बनाने में मदद मिल सकी है। 

जबड़ा हिलते रहने से डिप्रेशन में थी

रोहतक जिला निवासी 40 वर्षीय महिला ने बताया कि पांच साल से उसका जबड़ा लगातार हिलता रहता था। इसकी वजह से उसके मुंह और सिर में दर्द की समस्या के साथ डिप्रेशन का शिकार हाे गई थी। पीजीआई के डेंटल काॅलेज में छह माह तक चले उपचार के दौरान चिकित्सकों ने एक प्लेट लगाकर और दवाएं देकर ठीक कर दिया।

झज्जर जिला निवासी 50 वर्षीय व्यक्ति ने बताया कि एक साल पहले उन्होंने एक दांत निकलवाया था। इसके बाद अचानक जबड़ा हिलते रहने की समस्या बढ़ गई। पीजीआई के डेंटल काॅलेज में चिकित्सकों ने उपचार दिया। अब काफी हद तक जबड़े पर कंट्रोल रखने में मदद मिली है।

मुंह के जबड़े और जीभ में संतुलन बनाने के लिए दिमाग की नस सीधे काम करती है। इस नस के एक्टिव न रहने की स्थिति में व्यक्ति की जबड़े या जीभ मंे कंट्रोल रख पाने की क्षमता खत्म हो जाती है।यह बड़ी उपलब्धि है कि पीजीआई के चिकित्सकों ने इस बीमारी का हल काफी रिसर्च और मेहनत करने के साथ ढूंढ निकाला है। हाल ही में हुई नेशनल कान्फ्रेंस में डेंटल कॉलेज की टीम ने यह रिसर्च पेश कर गोल्ड मेडल जीता है।
डाॅ. संजय तिवारी, प्रिंसिपल, डेंटल काॅलेज, राेहतक

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना