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पुलवामा हमले की बरसी / पुलवामा में शहीद हुए दो जवानों के बच्चों को फ्री में पढ़ा रहा सहवाग का स्कूल, सेना में जाना चाहते हैं दोनों बच्चे

झज्जर के सहवाग स्कूल में पढ़ाई कर रहे पुलवामा में शहीद हुए जवान के बेटे राहुल व अर्पित। झज्जर के सहवाग स्कूल में पढ़ाई कर रहे पुलवामा में शहीद हुए जवान के बेटे राहुल व अर्पित।
पुलवामा हमले में शहीद हुए यूपी के इटावा निवासी रामवकील। पुलवामा हमले में शहीद हुए यूपी के इटावा निवासी रामवकील।
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झज्जर के सहवाग स्कूल में पढ़ाई कर रहे पुलवामा में शहीद हुए जवान के बेटे राहुल व अर्पित।झज्जर के सहवाग स्कूल में पढ़ाई कर रहे पुलवामा में शहीद हुए जवान के बेटे राहुल व अर्पित।
पुलवामा हमले में शहीद हुए यूपी के इटावा निवासी रामवकील।पुलवामा हमले में शहीद हुए यूपी के इटावा निवासी रामवकील।

  • 14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमले में शहीद हुए थे सीआरपीएफ के 40 जवान
  • यूपी के इटावा के शहीद रामवकील और झारखंड के रांची के शहीद विजय के बेटे पढ़ रहे

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2020, 01:14 PM IST

झज्जर (देवेंद्र शुक्ला). पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को 40 सीआरपीएफ जवानों पर हुए हमले को एक साल बीत गया। इन परिवारों के लिए बेटों की कमी तो देश पूरा नहीं कर सकता, लेकिन किसी न किसी रूप में उनके सम्मान के लिए हाथ आगे बढ़ रहे हैं। पुलवामा हमले में शहीद जवानों में से 2 के बेटों को क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने गोद लिया है और वे इन्हें झज्जर स्थित अपने स्कूल सहवाग इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल में फ्री पढ़ा रहे हैं। यहां रहकर दोनों बच्चे सेना में भर्ती के लिए भी तैयार हो रहे हैं। 

यूपी के इटावा निवासी शहीद सैनिक रामवकील का बेटा 11 साल का अर्पित कक्षा 6 और झारखंड के रांची निवासी शहीद जवान विजय का 10 साल का बेटा राहुल कक्षा 4 में पढ़ाई कर रहा है। दोनों ही बच्चे एक साल पहले यहां बोर्डिंग में आए। अर्पित और राहुल ने कहा कि उनके पिता की इच्छा थी कि वे भी सेना में रहकर देशसेवा करें। वे अपने पिता के इस सपने को जरूर पूरा करेंगे।

अर्पित बोला- पिता जब भी घर आते थे तो बंदूक दिखाकर कहते थे तू भी सैनिक बनना
11 साल के अर्पित ने कहा कि 1 साल पहले ही उसकी पिता से फोन पर बात हुई थी। वे उस समय पुलवामा में ड्यूटी पर ही थे। आखिरी बार फोन पर हुई बातचीत में पिता ने कहा था कि वे यहां ठीक हैं और तुम भी मन लगाकर पढ़ाई करना। अपनी मां का ख्याल रखना। अर्पित ने कहा कि छुट्टी के दौरान जब भी उसके पिता घर आते थे तो वह बंदूक दिखाकर बोलते थे कि तुम भी मेरी तरह देश की रक्षा करने वाला एक सैनिक ही बनना।

राहुल बोला- पिता ने कहा था मुझे कुछ भी हो सकता है, मन लगाकर पढ़ाई करना
10 साल के राहुल ने कहा कि वह दिन उसे अभी तक याद है जब 14 फरवरी 2019 की सुबह उसने अपने पिता विजय से फोन पर बात की थी। तब पिता ने कहा था कि यहां सैनिक गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं और उन्हें कुछ भी हो सकता है। तुम खूब मन लगाकर पढ़ाई करना। उसके पिता छुट्टियों में जब भी घर पर आते थे तो उसे सेना के किस्से सुनाते थे। राहुल ने कहा कि उसको पिता की कही गई ये बातें अब भी याद हैं। वो भी बड़ा होकर सेना में भर्ती होगा। 

सहवाग ने की थी शहीद जवानों के बच्चों को फ्री शिक्षा की घोषणा
पुलवामा हमले के बाद क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने देश की सुरक्षा करते हुए शहीद हुए सीआरपीएफ के जवानों के बच्चों काे अपने बोर्डिंग स्कूल में  फ्री एजुकेशन देने की घोषणा की थी। इसके बाद ही झारखंड और यूपी के अर्पित और राहुल के परिजनों ने स्कूल से संपर्क किया तब से ये बच्चे यहां स्टडी कर रहे हैं।

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