रोहतक गैंगरेप / सात दोषियों की फांसी की सजा पर फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक



दोषियों के साथ पुलिस टीम। दोषियों के साथ पुलिस टीम।
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दोषियों के साथ पुलिस टीम।दोषियों के साथ पुलिस टीम।

  • पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सातों दोषियों की फांसी की सजा को रखा था बरकरार
     

Dainik Bhaskar

Jul 04, 2019, 04:15 PM IST

नई दिल्ली. रोहतक में नेपाली युवती से सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए 7 दोषियों की फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सातों दोषियों की सजा को बरकरार रखा था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने रोक लगाते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया है। 

 

वीभत्स तरीके से हुई थी दरिंदगी
रोहतक की चिन्योट कॉलोनी निवासी अपनी बहन के पास इलाज कराने आई मानसिक रूप से कमजोर 28 वर्षीय नेपाली युवती का शव चार फरवरी को बहुअकबरपुर गांव के खेतों में नग्न हालत में मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दरिंदगी की इंतहा सामने आई थी। दुष्कर्म के बाद आरोपियों ने युवती के अंगों में पत्थर, कील आदि डाली थी। जिससे युवती की आंत तक फट गई थी। पीजीआई रोहतक में इकलौते मेडिको लीगल एडवाइजर डॉ. एसके धतरवाल ने तब कहा था कि 30 साल के कॅरिअर में मैंने ऐसी दरिंदगी नहीं देखी।

 

पुलिस ने इसमें 9 आरोपी पकड़े थे, अदालत ने सात दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। एक फरवरी 2015 को हुए इस मामले में सजा पाने वाले सातों आरोपी रोहतक के गांव गद्दीखेड़ी के थे। इनमें राजेश उर्फ घुचड़, सरवर, पवन, मनबीर, सुनील उर्फ शीले, सुनील उर्फ माढा व पदम शामिल हैं। केस में नामजद एक आरोपी सोमबीर ने दिल्ली में आत्महत्या कर ली थी। जबकि नेपाली मूल का एक आरोपी नाबालिग था। 

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