रोहतक / शपथ ग्रहण के बाद 20 मिनट तक कमरे के लिए भटकते रहे रोहतक मेयर



नेम पलेट लगाने के बाद कुर्सी पर बैठते मेयर मनमोहन गोयल। नेम पलेट लगाने के बाद कुर्सी पर बैठते मेयर मनमोहन गोयल।
नगर निगम कार्यालय मेें अधूरा पड़ा मेयर मनमोहन गोयल का कार्यालय। नगर निगम कार्यालय मेें अधूरा पड़ा मेयर मनमोहन गोयल का कार्यालय।
जाॅइंट कमिश्नर के कमरे के बाहर मेयर की प्लेट लगाते कर्मचारी। जाॅइंट कमिश्नर के कमरे के बाहर मेयर की प्लेट लगाते कर्मचारी।
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नेम पलेट लगाने के बाद कुर्सी पर बैठते मेयर मनमोहन गोयल।नेम पलेट लगाने के बाद कुर्सी पर बैठते मेयर मनमोहन गोयल।
नगर निगम कार्यालय मेें अधूरा पड़ा मेयर मनमोहन गोयल का कार्यालय।नगर निगम कार्यालय मेें अधूरा पड़ा मेयर मनमोहन गोयल का कार्यालय।
जाॅइंट कमिश्नर के कमरे के बाहर मेयर की प्लेट लगाते कर्मचारी।जाॅइंट कमिश्नर के कमरे के बाहर मेयर की प्लेट लगाते कर्मचारी।

  • जॉइंट कमिश्नर के रूम की नेम प्लेट उतारकर कुर्सी पर बैठाया
  • कमिश्नर बोले- मैंने 5 बार अपने कमरे को उनका कार्यालय बनाने का ऑफर दिया, लेकिन वे मना कर गए
  • मनमोहन गोयल बोले- नगर निगम कार्यालय में ही बैठूंगा
     

Dainik Bhaskar

Jan 11, 2019, 06:52 AM IST

राेहतक. नगर निगम चुनाव जीतने के 21 दिन बाद भी अधिकारी मेयर मनमोहन गोयल के बैठने के लिए कमरा तैयार नहीं करवा पाए। गुरुवार को शपथ लेने के बाद भाजपा के मेयर मनमोहन गोयल को निगम कार्यालय में बैठने के लिए 20 मिनट तक कमरा नहीं मिल सका।

 

वे एक कमरे से दूसरे कमरे में भटकते रहे। आनन-फानन में जॉइंट कमिश्नर के कमरे की नेम प्लेट उतार कर मेयर को अस्थायी तौर पर वहां बैठाया गया। पहले मेयर का ऑफिस ओल्ड एडीसी कार्यालय में होता था, लेकिन मेयर मनमोहन गोयल ने साफ कह दिया कि वे नगर निगम कार्यालय में ही बैठेंगे। इसके बाद एक स्टोर रूम को तोड़कर उसको तैयार किया जा रहा है। उसमें अटैच बाथरूम का निर्माण शुरू करवाया गया है।  

 

गुरुवार को शपथ ग्रहण समारोह के बाद समर्थक मेयर मनमोहन गोयल से जिद करने लगे कि वे निगम के अंदर कुर्सी पर बैठकर फोटो सेशन करवाएं। पहले प्रथम तल पर स्थित जॉइंट कमिश्नर कार्यालय में चले गए। वहां जेसी की कुर्सी पर बैठने से गोयल ने इंकार कर दिया तो ठीक सामने निगम कमिश्नर के कार्यालय में मेयर के साथ लोग पहुंचे। यहां भी मनमोहन ने यह कहते हुए मना कर दिया कि बिना अधिकारियों के कहे वे कमिश्नर की कुर्सी पर नहीं बैठ सकते और 12 मिनट तक खड़े रहे। 

 

डैमेज कंट्रोल के लिए डीटीपी केके वार्ष्णेय उन्हें दोबारा जॉइंट कमिश्नर के कार्यालय में ले गए। वहां गोयल कुर्सी पर बैठे और लगभग 25 मिनट तक रुके। बाहर उनके नाम की नेम प्लेट भी बदलवाई गई। एसडीएम सदर राकेश कुमार के पास निगम के जॉइंट कमिश्नर का अतिरिक्त कार्यभार है। वे एसडीएम के कार्यालय से भी काम कर लेते हैं। 

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