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500 साल पहले लोग ऐसे देखते थे रामायण और महाभारत, ब्रिटिश काउंसिल भी हुई इस टीवी की मुरीद

10 महीने पहलेलेखक: मनोज कौशिक
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  • फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में राजस्थानी कला कावड़ बनी आकर्षण का केंद्र
  • ब्रिटिश काउंसिल ने राजस्थान के जैसलमेर जिले के कलाकार को दिया मौका

1) लकड़ी के कारिगर छोटे से मंदिर की तरह बनते हैं कावड़

जैसलमेर के कलाकार कोजा राम बताते हैं कि लकड़ी के कारिगर छोटे से मंदिर की तरह कावड़ को तैयार करते हैं। इसके बाद इस पर अलग-अलग रंग करके कहानियों के पात्रों को छोटा-छोटा बनाया जाता है। इस कावड़ के दरवाजे मंदिर के कपाट की तरह खुलते हैं। बहुत से कपाट के बीच अंदर गर्भ गृह होता है, जहां भगवान की मूर्ति स्थापित की जाती है।

कोजा राम ने बताया कि कावड़ वास्तव में एक तीर्थ है। यह हस्तकला करीब पाच सौ साल पुरानी है। तब राजस्थान में कुछ विशेष समुदाय के लोग इस छोटे से पोर्टेबल मंदिर पर अलग-अलग कहानियों के पात्रों की पेटिंग करके उनकी कथाएं गाकर सुनाते थे। गांव-गांव जाते तो बड़ी संख्या में लोग जुटते और वे कहानियां सुनते थे। लोग ये कथाएं सुनकर तीर्थ की तरह पुण्य मानते थे और चढ़ावे में पैसे भी चढ़ाते थे। इससे कावड़ हस्तकला के कलाकारों की रोजी रोटी चलती थी।

कोजा राम बताते हैं कि रेडियो, टेलीविजन, कंप्यूटर, इंटरनेट और मोबाइल जैसे-जैसे आए, उनके आने से कावड़ का चलन कम हो गया। तकनीक बदली तो कलाकारों को कहानियां बदलनी पड़ी। रामायण, महाभारत, कृष्ण लीला जैसे धार्मिक ग्रंथों के बाद श्रवण, जातक कथाएं व अन्य पौरणिक कथाओं को सुनाना शुरू किया लेकिन नई-नई तकनीक से टक्कर नहीं ले सके।

कोजा राम कहते हैं कि कावड़ गायन से अब परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। इस वजह से ज्यादातर कलाकारों ने इसे छोड़ दिया है और दूसरे काम धंधे अपना लिए हैं। उनके खुद के परिवार में पहले दो बेटे गायन करते थे लेकिन अब वे अकेले इसे कर रहे हैं।

ब्रिटिश काउंसिल ने इस साल सूरजकुंड में भारत और ब्रिटेन के कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए एमओयू किया था। इसी के तहत कलाकार कोजाराम को ब्रिटिश काउंसिल ने मौका दिया। मेले में पहुंचे ब्रिटिश काउंसिल के भारत में निदेशक जॉनथन कैनेडी ने बताया कि दोनों देशों के कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए यहां पहुंचे हैं। दोनों देशों के कलाकारों के मिलने से उनके स्किल बढ़ेंगे। हस्तकला को प्रमोट करके कलाकारों के लाइफ स्टाइल को बढ़ाना उनका मकसद है। इसके चलते ही भारतीय कलाकारों को भी उन्होंने मौका दिया है।  

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