साउथ कोरिया / कॉस्मेटिक कंपनियां बच्चों को बना रहीं निशाना, 4-10 साल बच्चियों के लिए खुलवाए स्पा और पार्लर



South Koreas K beauty companies aimed at children opened spas and parlors for children 4-10 years
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South Koreas K beauty companies aimed at children opened spas and parlors for children 4-10 years

  • कॉस्मेटिक कंपनी का दावा, बच्चियों को उनकी मां से जोड़ने की कोशिश
  • विरोध जता रहे लोग, कहा; बच्चियों के दिमाग पर पड़ रहा गहरा असर, वो खुद को बड़ा महसूस कर रही हैं
     

Dainik Bhaskar

Feb 20, 2019, 06:09 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. दुनिया की ब्यूटी कैपिटल कहे जाने वाले साउथ कोरिया में कॉस्मेटिक कंपनियां टर्नओवर बढ़ाने के लिए अब बच्चों को निशाना बना रही हैं। खासतौर पर 4 से 10 साल की उम्र की बच्चियाें के लिए जानी मानी कॉस्मेटिक कंपनियों ने ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने के साथ स्पा की शुरुआत कर दी है। इस नए ट्रेंड से छोटी उम्र की बच्चियां आकर्षित हो रही हैं लेकिन लोग विरोध जता रहे हैं। उनका कहना है कि खूबसूरती के प्रति दीवानगी के कारण बच्चियां बचपन खो रही हैं और उनमें जल्द बड़ा दिखने की चाहत बढ़ रही है।

यूट्यूब पर मेकअप प्लान शेयर कर रहीं बच्चियां

  1. बच्चियों की खूबसूरती को ‘के-ब्यूटी’ यानी किंडरगार्टेन ब्यूटी कहा जाता है। साउथ कोरिया में बच्चियों में खूबसूरत दिखने की दीवानगी इस कदर बढ़ रही है कि वे अपने यूट्यूब चैनल पर मेकअप ट्रिक शेयर कर रही हैं। वे बता रही हैं कि प्रायमरी स्कूलों में जाने वाली बच्चियों का मेकअप प्लान कैसा होना चाहिए? इसके अलावा नए प्रोडक्ट को वीडियो में प्रमोट भी कर रही हैं।

  2. बच्चियों के लिए कॉस्मेटिक्स और स्पा तक मौजूद

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    बच्चों के लिए ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने वाली शुशु कॉस्मेटिक कंपनी ने साउथ कोरिया में 2013 में कारोबार की शुरुआत की थी। वर्तमान में कंपनी के 13 बड़े स्टोर हैं जो बच्चों के लिए हेल्दी कॉस्मेटिक उपलब्ध कराने का दावा करते हैं। कॉस्मेटिक प्रोडक्ट के तहत पानी में घुलने वाली नेल पॉलिश, नॉन-टाॅक्सिक लिप कलर, फैंसी गर्ल साबुन, बकरी के दूध से बने शैम्पू जैसे कई उत्पाद शामिल हैं। इनकी पैकिंग से लेकर नाम तक बच्चों को लुभाते हैं और पैकिंग पर स्लोगन लिखा रहता है, “मैं बच्ची नहीं हूं”।

  3. खासकर 4 से 10 साल की उम्र की बच्चियों के लिए खोले गए स्पा में उन्हें फुट बाथ, मसाज, फेस मास्क, मेकअप और मेनीक्योर जैसी सर्विसेज उपलब्ध कराई जाती हैं। इसमें 1700 से 2500 रुपए तक खर्च आता है। बच्चों के लिए सियोल में प्रीपरा किडस कैफे बनाया गया है, जहां 4 से 9 साल की बच्चियां अपने फेवरेट कार्टून कैरेक्टर की तरह तैयार होती हैं। स्पा लेने के साथ मेकअप करती हैं। यहां शॉपिंग करने के बाद उनकी कैटवॉक होती और एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में गानों पर डांस भी करती हैं।

ट्रेंड के साथ विरोध भी बढ़ रहा

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    फ्रीलांस मेकअप आर्टिस्ट सियो गारम इसका विरोध करती हैं और कहती हैं कि मैं ऐसे क्लाइंट को सर्विसेस देने से मना करती हूं जो बच्चों का मेकअप करने के लिए कहते हैं। सियो ने फेसबुक पर लोगों से अनुरोध करते हुए लिखा है कि कृपया लाल लिपिस्टिक और कर्ली बालों के साथ बच्चों की फोटो का इस्तेमाल करना बंद करें।

  2. सियोल की कोनकुक युनिवर्सिटी की प्रोफेसर यून का कहना है कि खूबसूरत कार्टून कैरेक्टर की तरह सिर से लेकर पैर तक छोटी बच्चियों का मेकअप किया जाता है। धीरे-धीरे बच्चियां उनकी तरह दिखने की कोशिश करने लगती हैं। इससे लड़कियों में संदेश जाता है कि उनकी सफलता सिर्फ खूबसूरती से जुड़ी हुई है।

  3. साउथ कोरिया के ब्यूटी इंडस्ट्री के एक्सपर्ट ली हवाजुन का कहना है कि कॉस्मेटिक कंपनियां बच्चों को भी एक उपभोक्ता के तौर पर देख रही हैं और इंडस्ट्री तेजी से विस्तार कर रही हैं। ब्यूटी कंपनियों का फोकस अब बच्चों की मदद से उपभोक्ताओं को बढ़ाना है। हालांकि बच्चों के कारण उन्हें विरोध न झेलना पड़े इसके लिए कंपनियां खास रणनीति बनाकर काम कर रही हैं।

  4. शुंगशिन वुमन यूनिवर्सिटी के ब्यूटी स्टडीज के प्रोफेसर किम जू-डक के मुताबिक, इस ट्रेंड एक बड़ा कारण हर तरफ बच्चों के मेकअप वाली तस्वीरों का दिखाया जाना भी है। प्रोफेसर किम ने 2016 में प्राथमिक विद्यालय की 288 बच्चियों पर सर्वे किया। उन्होंने पाया 42 फीसदी बच्चियां मेकअप करके आई थीं। उनका कहना है कि आंकड़ा बहुत तेजी से बढ़ा है। 

  5. 6 साल की बच्ची की मां क्वों जी हयूं हाल ही में प्रीपरा किडस कैफे गईं थीं। उनका कहना है कि यहां का माहौल बच्चों को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है और उनके दिमाग पर गहरा प्रभाव छोड़ता है, जहां बच्चे खुद को बड़ा महसूस करते हैं। लेकिन मैंने अपनी बेटी को इससे बहुत अधिक प्रभावित नहीं होने दिया।

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