सेहत /यह भ्रांति है कि गर्भवती को खूब घी खिलाना अच्छा होता है



Health Knowledge by Dr Avyakt Agrawal- Myths and truth of pregnancy
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Health Knowledge by Dr Avyakt Agrawal- Myths and truth of pregnancy

Dainik Bhaskar

Jun 16, 2019, 03:03 PM IST

हेल्थ डेस्क. गर्भावस्था और डिलिवरी के बाद सलाह-मशविरों की लंबी सूची-सी बन जाती है। घर के बड़े-बुज़ुर्गों के साथ-साथ नाते-रिश्तेदार और आस-पड़ोस के लोग भी सलाह देने से नहीं चूकते। मां को खानपान की हिदायतों के साथ अपने अनुभव भी थोपने की कोशिश की जाती है। लेकिन क्या ये सलाह मेडिकल साइंस की दृष्टि से ठीक हैं? यहां हम पारंपरिक ज्ञान को चुनौती नहीं दे रहे, लेकिन याद रखिए कि जीवनशैली के साथ परिस्थितियां भी बदल गई हैं। फिर मेडिकल साइंस में हुए कई रिसर्च के निष्कर्ष हमारे सामने हैं जिन पर ज्यादा भरोसा किया जाना चाहिए। आज डॉ. अव्यक्त अग्रवाल बता रहे हैं गर्भावस्था और डिलिवरी के बाद की कुछ भ्रांतियां और उनके सच...

  • भ्रांति 1 : गर्भवती स्त्री को ठंडी तासीर वाले फल आदि नहीं खिलाने चाहिए। इससे गर्भवती महिला व बच्चे दोनों को नुकसान हो सकता है। 

    सच : हर फल अलग-अलग विटामिन्स, मिनरल्स और फाइबर्स के अच्छे सोर्स होते हैं। ये गर्भवती की ऊर्जा, रोगप्रतिरोधक क्षमता और आंतों के बेहतर फंक्शन के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए जब तक डॉक्टर खुद न कहें, गर्भवती को कोई भी फल खाने से नहीं रोकना चाहिए।

  • भ्रांति 2 : खाने में घी खूब खिलाना चाहिए। इससे बच्चा और मां दोनों तंदुरुस्त होंगे। 

    सच : गर्भवती के लिए घी जरूरी है, लेकिन उतना ही जितना सामान्य व्यक्ति के लिए जरूरी होता है। गर्भवती को जो भी ऊर्जा मिले, वह कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट (घी इत्यादि) की बैलेंस्ड डाइट के रूप में मिले। अगर फैट की मात्रा अधिक होगी, तो मां का शरीर प्रोटीन को ज्यादा एब्जॉर्ब नहीं कर पाएगा। प्रोटीन मां ही नहीं, गर्भस्थ शिशु की मसल्स, इम्युनिटी, हड्डियों, अंदरूनी अंगों इत्यादि के विकास के लिए भी जरूरी है। 

  • भ्रांति 3 : सोनोग्राफी से गर्भस्थ शिशु को नुकसान होगा। 

    सच : सोनोग्राफी पूर्णतः सुरक्षित ही नहीं, बल्कि बेहद आवश्यक जांच भी है, जिसे प्रेग्नेंसी के 9 माह के दौरान कम से कम 4 बार करवाना होता है। इससे शिशु की वृद्धि, अंगों का निर्माण, प्लेसेंटा की स्थिति जैसी अनेक बेहद ज़रूरी जानकारियां मिलती हैं। 

  • भ्रांति 4 : मां (जच्चा)को चावल, रोटी और हरी सब्जियां नहीं देनी चाहिए। चावल खाने से स्तनपान करने वाले शिशु को सर्दी हो जाएगी। मां रोटी खाएगी तो शिशु के पेट में दिक्कत होगी। हरी सब्जियां खाएगी तो शिशु को हरे दस्त होंगे। 

    सच : मां के कुछ भी खाने से दूध का सम्मिश्रण नहीं बदलता। बल्कि अगर वे ये चीजें नहीं खाएंगी तो उसे एनीमिया हो सकता है। दूध में कमी भी हो सकती है। स्तनपान के समय मां को अतिरिक्त 500 कैलोरी की जरूरत होती है जिसके लिए रोटी और हरी सब्जियां इत्यादि खाना बेहद जरूरी है।  

  • भ्रांति 5 : मां को मलेरिया या टायफॉइड होने पर स्तनपान बंद नहीं किया तो शिशु को भी यह बीमारी हो जाएगी। 

    सच : मां को अगर कोई बीमारी है (एचआईवी और हैपेटाइटिस छोड़कर) तो स्तनपान करने मात्र से वह शिशु को नहीं होगी। मां के दूध में बीमारी के इंफेक्शन नहीं आते। केवल यही बीमारियां नहीं, बल्कि यह भी मात्र भ्रांति है कि मां को सर्दी होने से दूध पीने वाले बच्चे को भी सर्दी हो जाएगी। अगर सर्दी होती भी है तो केवल सर्दी के इंफेक्शन से, न कि मां के दूध के कारण। 

  • भ्रांति 6 : भरी गर्मी में भी जच्चा को कपड़े से कान बांधे रखना चाहिए या शॉल ओड़े रखना चाहिए, अन्यथा जीवनभर के लिए दिमाग़ में हवा भर जाएगी व सिरदर्द होता रहेगा। 

    सच : मां और बच्चे दोनों के लिए कपड़े और तापमान वैसे ही होने चाहिए जैसे किसी और के लिए जरूरी होते हैं। व्यर्थ गर्मी में रहना तकलीफदेह, थकाने वाला और ऊर्जा कम करने वाला होगा।

  • भ्रांति 7 : मां को दूध कम आ रहा है। इससे शिशु का पेट नहीं भरेगा और इसलिए ऊपर का दूध शुरू कर देना चाहिए। 

    सच : शुरू में मां के दूध में सबसे जरूरी पोषक तत्व कोलोस्ट्रम गाढ़ा और कम मात्रा में होता है। लेकिन यह शिशु के लिए पर्याप्त होता है। अगर ऊपर का दूध शुरू कर देंगे तो दूध के बनने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाएगी। 

  • भ्रांति 8 : डिलिवरी अथवा सीज़ेरियन के बाद काफी दिनों तक आराम करना जरूरी है। 

    सच : सीज़ेरियन के बाद चौथे दिन से और नार्मल डिलिवरी के बाद दूसरे दिन से चल-फिर शुरू की जा सकती है। डिस्चार्ज के बाद अगर कोई जटिलता नहीं है, तो सामान्य गृहकार्य भी कुछ दिनों में शुरू किए जा सकते हैं। हमेशा बिस्तर पर रहने से डीप वैन थ्रोम्बोसिस जैसी समस्या हो सकती है, जिसमें पैर की धमनियों में खून का थक्का जम जाता है। 

  • भ्रांति 9 : मां को कैल्शियम की दवा देने से बच्चे में भी कैल्शियम स्टोर होने लगेगा। 

    सच : शुरुआत के तीन महीनों के दौरान मां को फोलिक एसिड और बाद के महीनों तक आयरन, कैल्शियम देना बहुत जरूरी है। इसमें कोई सच्चाई नहीं है कि कैल्शियम देने से बच्चे में भी कैल्शियम स्टोर हो जाएगा। कोई भी दवा बंद और शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य ले लेनी चाहिए। 

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