बिगनर्स वर्कआउट / पुशअप से पेट की मसल्स मजबूत बनाने और बॉडी पॉश्चर सुधारने के लिए 5 नियम फॉलो करना जरूरी



how to do push up to stay away from injury
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how to do push up to stay away from injury

  • अलग-अलग मसल्स को मजबूत बनाने के लिए पुश-अप करने का तरीका भी बदलें जैसे क्लोज़ ग्रिप पुश अप और वाइड ग्रिप पुशअप

Dainik Bhaskar

Jul 09, 2019, 04:47 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. पुश-अप सबसे सुरक्षित एक्सरसाइज मानी जाती है। शरीर के ऊपरी हिस्से की मसल्स को मजबूत बनाने का यह अच्छा तरीका है। इसका असर चेस्ट की मसल्स, ट्राईसैप्स, कंधों और पेट की मसल्स पर पड़ता है। इसे सीखने के लिए कोई खास विशेषज्ञता की जरूरत नहीं होती। कोई भी इसे बड़ी आसानी से सीख सकता है। इसके लिए किसी खास उपकरण की ज़रूरत भी नहीं होती और इसे अलग-अलग फिटनेस लेवल पर बड़ी सरलता से एडॉप्ट किया जा सकता है। इसके लिए किसी तरह का कोई खास स्थान भी नहीं चाहिए, यानी इसे कहीं भी और कभी भी किया जा सकता है। इस तरह पुश-अप सबसे सुरक्षित ही नहीं, सबसे सुविधाजनक एक्सरसाइज भी है जिसके कई तरह के फायदे होते हैं। डॉ. सीमा ग्रोवर, चीफ फिजियोथेरेपिस्ट, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल से जानिए इसे करते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है…

पुश-अप के 5 नियम

  1. बिगनर्स और पेशेवर दोनों के लिए जरूरी है यह वर्कआउट

    यह शरीर में से अतिरिक्त फैट भी निकालने का काम भी करती है। अलग-अलग मसल्स को मजबूत बनाने के लिए व्यक्ति को विभिन्न प्रकार के पुश-अप करने चाहिए जैसे क्लोज़ ग्रिप पुश अप, वाइड ग्रिप पुशअप और स्टैगर्ड पुश-अप। बिगनर्स यानी जिन्होंने वर्कआउट की शुरुआत की है, उनके लिए पुश-अप बहुत जरूरी एक्सरसाइज है। इसके अलावा पेशेवर बॉडी बिल्डर्स के लिए भी फायदेमंद हैं क्योंकि यह शरीर के ऊपरी हिस्से को ताकत और मजबूती देती है। ये ट्राइसेप्स, पेक्टोरल (चेस्ट को कंधों से जोड़ने वाली मसल्स) और कंधों की मसल्स को मजबूत बनाती है। 

  2. पुश-अप को कम्पाउंड एक्सरसाइज कहा जाता है, क्योंकि यह हाथों-पैरों सहित कई मसल्स को एक साथ प्रभावित करती है। जब हम पुश-अप करते हैं, तब इसके लिए काफी मसल्स को एकसाथ एक्टिव होना पड़ता है। इसका नतीजा यह होता है कि इससे दिल को टिश्यूज़ तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है जिससे दिल हेल्दी बना रहता है। अगर पुश-अप ठीक से और उचित मार्गदर्शन में किए जाएं तो वे पीठ के निचले हिस्से तथा पेट की मसल्स को भी मजबूती देते हैं तथा पोश्चर में सुधार लाते हैं। व्यक्ति को अपने रोज़मर्रा के एक्सरसाइज रूटीन में पुश-अप्स को शामिल करना ही चाहिए।

  3. पुश-अप प्रभावी एक्सरसाइज जरूर है, लेकिन तकनीक और जानकारी के अभाव में यह घातक भी हो सकती है। गलत पोश्चर में पुश-अप करने की वजह से व्यक्ति को कई समस्याएं हो सकती हैं जैसे पीठ के निचले हिस्से या कंधे में दर्द होना। इसलिए जब भी आप वर्कआउट की शुरुआत करें तो अपने जिम इंस्ट्रक्टर या फिटनेस एक्सपर्ट से पुश-अप करने के सही तरीके की जानकारी जरूर ले लीजिए।

  4. अगर किसी व्यक्ति को पहले से ही कंधे में दर्द हो या उसकी हाल ही में रोटेटर कफ या बाईसेप टेंडन सर्जरी हुई हो, तो उसे पुश-अप करने से बचना चाहिए। या अगर किसी का वजन बहुत ज्यादा है तो फिटनेस एक्सपर्ट उसे भी पुश-अप नहीं करने की सलाह देते हैं क्योंकि इससे आगे चलकर कलाइयों में दर्द की समस्या हो सकती है। 

  5. अगर किसी की कलाई में पहले कभी चोट लगी हो तो पुश-अप करना खतरनाक हो सकता है। ऐसे मामले में डॉक्टर की सलाह के बिना पुश-अप न करें। इसके बजाय डॉल्फिन पुश-अप की सलाह दी जाती है। डॉल्फिन पुश-अप में कोहनियों का सहारा लिया जाता है, न कि कलाइयों का। शरीर धीरे-धीरे पुश-अप के अनुकूल हो जाता है, जिससे इस एक्सरसाइज का असर कम होने लगता है, क्योंकि मसल्स को पुश-अप्स की आदत हो जाती है। इसलिए अगर आप एक्सरसाइज के प्रभाव में बढ़ोतरी चाहते हैं तो पुश-अप्स की संख्या को बढ़ाकर अपनी मसल्स को चुनौती देते रहें। 
     

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