पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

मीनोपॉज के बाद सतर्क रहें महिलाएं, हो सकती है दिल की समस्या

2 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

हेल्थ डेस्क. मीनोपॉज या रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। 40-50 की उम्र में प्रजनन संबंधी हॉर्मोन (एस्ट्रोजन हॉर्मोन) का उत्पादन बंद होने के बाद रजोनिवृत्ति की अवस्था आती है। इससे शरीर में हॉर्मोनल असंतुलन होता है, वज़न बढ़ जाता है। कई बार अचानक गर्मी लगने, चेहरे, माथे, गर्दन से पसीना आने की शिकायत भी होती है। रजोनिवृत्ति के बाद ये लक्षण हाई ब्लड प्रेशर और आर्टियल फिब्रिलेशन के भी होते हैं। 
 

1) मीनोपॉज के बाद होते हैं शरीर में बदलाव

एस्ट्रोजन हॉर्मोन पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है। मीनोपॉज के बाद शरीर में इसका स्राव कम हो जाता है। एस्ट्रोजन के कम होने से रक्त प्रवाह की गति कम हो जाती है, जिससे रक्त पंप करने में दिल को ज्यादा जोर लगाना पड़ता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने की आशंका कई गुना तक बढ़ जाती है। इसलिए मीनोपॉज के बाद दिल संबंधी समस्याओं के मामले भी बढ़ जाते हैं। उम्र बढ़ने के साथ जहां शरीर के मेटाबॉलिज्म की दर (वह प्रक्रिया जिसके तहत शरीर ग्रहण किए गए भोजन को ऊर्जा में बदलता है) भी कम हो जाती है, वहीं महिलाएं शारीरिक रूप से सक्रियता कम कर देती हैं। इससे वजन बढ़ता है और दिल की बीमारी की आशंका भी कई गुना बढ़ जाती है। मीनोपॉज के बाद महिलाएं अत्यधिक नमक और सोडियम भी लेने लगती हैं। इससे शरीर में वॉटर रिटेंशन बढ़ जाता है और उनकी रक्त शिराओं पर दबाव पड़ता है।  

मीनोपॉज के बाद अगर सांस लेने में किसी भी तरह की तकलीफ महसूस हो रही है, दिल में किसी भी तरह की असामान्य धड़कन या कुछ अजीब महसूस हो रहा है, सीने में भारीपन महसूस हो रहा है, सिरदर्द बना हुआ है, नींद आने में दिक्कत हो रही है, चक्कर आ रहे हैं या जी मिचलाता है, तो डॉक्टर से परामर्श लें। अगर परिवार में दिल की बीमारियों की कोई हिस्ट्री है तो भी तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। अगर डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, तो ज्यादा सतर्क और सजग रहने की आवश्यकता है। 

ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहे, इसके लिए अच्छी और नियमित जीवनशैली जीना जरूरी है। अगर ब्लड प्रेशर की कोई समस्या है, तो नियमित तौर पर हेल्थ चैकअप करवाते रहना जरूरी है। अपना वजन और ब्लड प्रेशर समय-समय पर चैक करते रहें। ऐसी महिलाओं को ये काम करने चाहिए :  

  • डाइट, व्यायाम और जीवनशैली में बदलाव को लेकर डॉक्टर से पर्सनल प्लान बनवाना चाहिए।
  • सप्ताह में कम से कम 150 मिनट यानी रोज़ाना तकरीबन 20 से 25 मिनट तक कसरत करना चाहिए।
  • साबुत अनाज (अंकुरित आदि रूप में), सब्जियों और मौसमी फलों को अपने खान-पान में नियमित तौर पर शामिल करें।
  • डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही और चीज़ भी पर्याप्त मात्रा में लें, ताकि शरीर को कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, मैग्नीशियम, विटामिन-डी और विटामिनके मिल पाए।
  • डिब्बाबंद खाना, चिप्स आदि ना खाएं और खाने में नमक भी कम से कम ही लें। किसी भी तरह के धूम्रपान से पूरी तरह दूर रहें। चाय-कॉफी का सेवन भी कम से कम करें।

दिल स्वस्थ रहे, हाई बीपी की समस्या न हो, इसके लिए हम यहां तीन सरल योगासन बता रहे हैं। ये सभी के लिए फायदेमंद हैं।योग विशेषज्ञ शैलजा त्रिवेदी से जानिए कौनसे योगासन फायदा देंगे। 

सुप्तवज्रासन : वज्रासन में बैठकर कोहनी के बल पर जाते हुए सिर का पिछला हिस्सा जमीन को स्पर्श करें। सांस रोककर हथेलियों को जांघों पर रखें। जांघ-सीने में खिंचाव लगेगा। बायीं करवट में लुढ़ककर उठें। दो सेट करें।
 

भुजंगासन : पेट के बल ऐसे लेट जाएं कि दोनों हाथ सीने के पास रहें। इसी स्थिति में शरीर को ऊपर की ओर उठाएं और गहरी सांस लें। सांस पर ध्यान केंद्रित करते हुए जितना ऊपर उठ सकते हैं उठें, फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए पहले की स्थिति में आ जाएं। तीन सेट करें।
 

पश्चिमोत्तासन : दोनों पैरों को सामने की ओर स्ट्रेच करते हुए एक-दूसरे से जोड़ें। धीरे- धीरे आगे झुकते हुए, बिना अपने घुटने मोड़े, अपनी नाक को घुटनों से सटाएं। हो सके तो अपने सिर को घुटनों से सटाने की कोशिश करें। इसके तीन सेट करें।

खबरें और भी हैं...