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नेपाल से उत्तराखंड पहुंची थी बाल मिठाई, स्वाद के साथ दिखने में भी है अनोखी

एक वर्ष पहले
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हेल्थ डेस्क. आपने चॉकलेट तो कई तरह की खाई होंगी, लेकिन उत्तराखंड के अल्मोड़ा (कुमाऊं) की ‘खास चॉकलेट’ की तो बात ही कुछ और है। यह कोको बीन्स पाउडर से नहीं, बल्कि खोया (दूध से बना मावा) से बनती है। आज बात अल्मोड़ा की इसी चॉकलेट की करते हैं जिसका नाम है बाल मिठाई। बाल मिठाई को उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की आइकॉनिक स्वीट कहा जा सकता है। कई लोग इसे चॉकलेट बर्फी के नाम से भी जानते हैं। शेफ हरपाल सिंह सोखी से जानिए उत्तराखंड में कैसे हुई बाल मिठाई की शुरुआत...

1) लाला जोगाराम को जाता है श्रेय

माना जाता है कि अल्मोड़ा क्षेत्र में बाल मिठाई सातवीं या आठवीं सदी में नेपाल से आई थी। नेपाल का इस मिठाई से क्या संबंध है, इसको लेकर प्रामाणिक इतिहास तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन कुमाऊं क्षेत्र में इसे लोकप्रिय बनाने का श्रेय लाला जोगाराम को जाता है। 20वीं सदी की शुरुआत में अल्मोड़ा के लाल बाजार में लाला जोगाराम की मिठाई की दुकान हुआ करती थी। जोगाराम इस मिठाई के लिए फालसीमा नामक गांव से ही स्पेशल क्रीमवाला दूध बुलवाते थे। यह गांव डेयरी प्रोडक्ट के लिए लोकप्रिय था। वह इस क्रीम वाले दूध का खोया बनाकर पहले तो उसकी ब्राउन कलर की बर्फी बनाते और फिर उसके ऊपर शक्कर की चाशनी में भिगे हुए खसखस के दाने लपेट देते थे। खसखस के यही दाने जब मुंह में जाते तो खोया के स्वाद के साथ इन्हें चबाने पर एक अलग ही आनंद मिलता। 

आजकल कुछ लोग खसखस की इन बॉल्स के स्थान पर बाजार में मिलने वाली शक्कर की छोटी-छोटी गोलियों का भी इस्तेमाल करने लगे हैं। मेरा मानना है कि इन शुगर बॉल्स से मिठाई के ऊपर सजावट तो हो जाएगी, लेकिन वैसा लुत्फ नहीं आएगा, जैसा कि खसखस की शुगर बॉल्स में आता है। इसे बनाते कैसे हैं, कुछ बात इसकी भी कर लेते हैं। हालांकि यहां हम पूरी रेसिपी नहीं दे रहे हैं, लेकिन इसे बनाना कितना आसान है या कठिन, इससे आपको एक अंदाजा जरूर लग जाएगा। 

बाल मिठाई बनाने के लिए मुख्य तौर पर खोया, शक्कर और खसखस की जरूरत होती है। सबसे पहले शक्कर लेकर इसकी चाशनी बनाते हैं। चाशनी के एक हिस्से को अलग निकालकर रख लेते हैं। चाशनी के दूसरे हिस्से को एक कड़ाही में लेकर उसमें खोया मिलाकर उसे तब तक भूनते हैं, जब तक कि वह डार्क ब्राउन न हो जाए। इसी से उसमें चॉकलेट का फील आता है। इसी से चॉकलेट बर्फी बनाई जाती है। अब चाशनी का जो हिस्सा बच गया है, उसे गर्म करने के बाद उसमें खसखस के दाने डाल देते हैं। इससे खसकस की शुगर बॉल्स बन जाएंगी। इन बॉल्स को बर्फी पर लपेट दिया जाता है और इस तरह तैयार हो जाती है 

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