फूड हिस्ट्री / रोस्टेड चिकन में भीगे पोहे और मसाले मिलाकर बनता है 'पोहा चिकन भुजिंग'

Dainik Bhaskar

Mar 03, 2019, 12:15 PM IST



food history by chef harpal singh sokhi- poha chicken bhujing
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food history by chef harpal singh sokhi- poha chicken bhujing
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हेल्थ डेस्क. मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में पोहा काफी लोकप्रिय नाश्ता है। खासकर शाकाहारी लोग इसे काफी चाव से खाते हैं। इसे प्याज, मूंगफली के दानों और अन्य भारतीय मसालों से बनाया जाता है। वैसे इसके कई वर्जन हैं और इसे कई तरह से बनाया जा सकता है। अब अगर आपसे यह कहें कि इसे नॉनवेज तरीके से भी बनाया जा सकता है तो क्या आप यकीन करेंगे? जी हां, आज शेफ हरपाल सिंह सोखी बात कर रहें हैं पोहे के इसी नॉनवेज वर्जन की।

सेहत भी, स्वाद भी
यह अजीब लग सकता है, लेकिन पोहे और चिकन के कॉम्बिनेशन से बनाई जाने वाली यह नॉनवेज डिश मुंबई के विरार इलाके में काफी पॉपुलर रही है। सेहत के हिसाब से भी इसे एक कम्पलीट डिश माना जा सकता है क्योंकि पोहे के तौर पर जहां इसमें कॉबोहाइड्रेट होते हैं, तो चिकन के रूप में पर्याप्त प्रोटीन भी। 
 

चिकन का तेल कम करने के लिए मिलाया पोहा
इसके ईजाद होने की कहानी भी बड़ी रोचक है। इसको ईजाद करने का श्रेय बाबू हरि गावड़ को जाता है। बात 1940 के आसपास की है। बाबू हरि ताड़ी की शराब बेचने का धंधा करते थे। जब भी उनके दोस्त उनसे मिलने आते तो बाबू हरि उन्हें शराब पिलाते। शराब के साथ चखना भी होता। एक दिन बाबू हरि और उनके कुछ दोस्त शराब पी रहे थे। चखने के तौर पर चिकन परोसे गए। लेकिन जिस बर्तन में चिकन बनाए गए थे, उसमें उस दिन तेल थोड़ा ज्यादा हो गया। तो बाबू हरि ने तेल को सोखने के लिए उसमें कुछ पोहे मिला दिए। बस, यहीं आविष्कार हो गया एक डिश का। नाम दिया गया 'पोहा चिकन भुजिंग' या 'भुजिंग चिकन'। 

महाराष्ट्र और गुजरात में लोगों की खास पसंद
'भुजिंग' शब्द मराठी भाषा के 'भूजने' से लिया गया है जिसका अर्थ है किसी चीज को भूनना। इसे बनाने के लिए चिकन को इसी भूजने यानी रोस्टिंग की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पहले चिकन को हरे धनिया की चटनी में मेरिनेट किया जाता है और फिर अच्छी तरह भूना जाता है। चिकन को भूनने के बाद इसे प्याज के साथ शेलो फ्राई किया जाता है। जब चिकन की रोस्टिंग और फ्राइड की प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो फिर इसमें पानी में पहले से भिगोए हुए पोहे मिलाए जाते हैं। अब इसमें अपने-अपने स्वाद के अनुसार वही मसाले मिलाए जाते हैं जो सामान्य पोहे में इस्तेमाल किए जाते हैं। मुंबई से यह डिश गुजरात पहुंची जहां नॉन वेजिटेरियन लोगों ने इसे हाथो-हाथ लिया। आज मुंबई और महाराष्ट्र में कई होटलों में यह डिश अलग-अलग तरीकों से बनाई जाती है। 

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